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Agra: दुर्लभ चिड़ियों से गुलजार होगी चंबल, 400 घोंसलों में दिए अंडे, बचाने की कवायद में जुटा वन विभाग

अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 26 May 2022 12:38 AM IST
सार

दुनिया से लुप्त हो रहे रिवर टर्न, ब्लैक बेलीड टर्न और इंडियन स्कीमर पक्षियों ने चंबल के नंदगवां, चीकनीपुरा, भगवानपुरा घाट के टापू की बालू में घोंसले बनाएं हैं। हर घोंसले में दो से तीन अंडे दिए हैं। 

इंडियन स्कीमर
इंडियन स्कीमर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

आगरा के बाह में चंबल का क्षेत्र दुर्लभ चिड़ियों से गुलजार होगा। दुनिया में लुप्त प्राय इंडियन स्कीमर, रिवर टर्न, ब्लैक बेलीड टर्न ने यहां 400 से ज्यादा घोंसले बनाए हैं। इनमें इंडियन स्कीमर ने 500 से ज्यादा अंडे दिए हैं। रिवर टर्न, ब्लैक बेलीड टर्न के भी 300 से ज्यादा अंडे चिन्हित किए गए हैं। अंडों से बच्चे भी निकलने लगे हैं। इससे चंबल में इन दुर्लभ होते इन पक्षियों का कुनबा बढे़गा। 



वन विभाग के मुताबिक दुनिया से लुप्त हो रहे रिवर टर्न, ब्लैक बेलीड टर्न और इंडियन स्कीमर पक्षियों ने चंबल के नंदगवां, चीकनीपुरा, भगवानपुरा घाट के चंबल के टापू की बालू में घोंसले बनाएं है। हर घोंसले में दो से तीन अंडे दिए हैं। सर्दियों में चंबल का रुख करने वाले पक्षी रिवर टर्न, ब्लैक बेलीड टर्न, इंडियन स्कीमर की आबादी ईरान, म्यांमार, थाईलैंड और नेपाल में ही बची है। 


प्रजनन काल मई में भी इन पक्षियों ने न सिर्फ चंबल में अपना डेरा जमा रखा है, बल्कि घोंसले भी बनाए हैं। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि वन विभाग के कर्मी इन घोंसलों की रखवाली करते हैं। ताकि चंबल में इन दुर्लभ चिड़ियों का कुनबा बढ़ सके।

खास बातें                    

रिवर टर्न : क्री-क्री की आवाज करने वाली चिड़िया रिवर टर्न की लंबाई 39-42 सेमी तथा पंखों का फैलाव 80-85 सेमी होता है। पेट का रंग सफेद, पैरों का रंग लाल होता है।
ब्लैक बेलीड टर्न: पीयू-पीयू की आवाज करने वाली चिड़िया ब्लैक बेलीड टर्न की लंबाई 32-35 सेमी और पंखों का फैलाव 60-65 सेमी होता है। पेट का रंग काला, टांगों का रंग पीला नारंगी होता है। 
इंडियन स्कीमर: चीं-चीं की आवाज करने वाली चिड़िया इंडियन स्कीमर की लंबाई 40-45 सेमी, पंखों का फैलाव 100-110 सेमी होता है। पेट का रंख सफेद, टांगें लाल रंग की होती हैं।        

मानवीय गतिविधियों से खतरा

रेंजर के मुताबिक इन पक्षियों की आबादी घटने का सबसे बड़ा कारण इनके घोंसलों को नुकसान पहुंचना है। नदी किनारे और टापू पर बढ़ती मानवीय गतिविधियों से इनके वास स्थल उजड़ रहे हैं। बताया कि अंडों के पास मानवीय गतिविधियां रोकने और सियार आदि वन्यजीवों से अंडों को बचाने के लिए वनकर्मियों को लगाया गया है। 
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