अमर उजाला एक्सक्लूसिव: कोरोना के डेल्टा स्ट्रेन से संक्रमित लोगों में दोगुनी बनी एंटीबॉडी

न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 10 Oct 2021 12:28 AM IST

सार

एसएन मेडिकल कॉलेज में 121 संक्रमित लोगों की जांच की गई है, जिसमें सामने आया है कि डेल्टा स्ट्रेन संक्रमित होने और टीकाकरण कराने वालों में 25 हजार तक एंटीबॉडी बनी हैं। 
एसएन की लैब में चिकित्साकर्मी (फाइल)
एसएन की लैब में चिकित्साकर्मी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

आगरा में कोरोना के डेल्टा स्ट्रेन से संक्रमित हुए लोगों में पहली लहर में संक्रमित हुए लोगों के मुकाबले दो गुना एंटीबॉडी मिली हैं। इनमें 1000 आईयू/एमएल तक एंटीबॉडी पाई गईं। पहली लहर में संक्रमित हुए लोगों में अधिकतम 500 आईयू/एमएल तक ही एंटीबॉडी बनी थीं। ये वे लोग हैं जिन्होंने अभी तक टीका नहीं लगवाया है।
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एसएन मेडिकल कॉलेज के ब्लड ट्रांसफ्युजन मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. नीतू चौहान ने बताया कि अप्रैल-मई में संक्रमित 121 लोगों की एंटीबॉडी की जांच में यह तथ्य सामने आए हैं। इनमें से 63 लोग 100 से 1000 आईयू/एमएल (इंटरनेशनल यूनिट प्रति मिलीलीटर) एंटीबॉडी मिलीं। 


पूछताछ में बताया कि इनको लक्षण तेजी से उभरे थे और हालत भी गंभीर रही थी। दूसरी लहर में ही कोरोना वायरस के डेल्टा स्ट्रेन की पुष्टि भी हुई थी। पहली लहर में संक्रमित हुए लोगों की जांच कराने पर अधिकतम 100 से 500 आईयू/एमएल एंटीबॉडी पाई गई थी। अभी तक एसएन में 2,580 लोगों की एंटीबॉडी की जांच हो चुकी है। 

संक्रमण-टीकाकरण के बाद 25 हजार तक मिली एंटीबॉडी 
दूसरी लहर में कोरोना संक्रमित होकर ठीक होने के बाद टीके की दोनों डोज लगवाने वाले लोगों में भरपूर एंटीबॉडी मिलीं। इनमें 10 से 25 हजार आईयू/एमएल एंटीबॉडी पाई गईं। जो लोग संक्रमित नहीं हुए थे और टीकाकरण करा लिया, उनमें भी अच्छीखासी एंटीबॉडी बनी हैं। 

इनमें 2000 से 10 हजार आईयू/एमएल एंटीबॉडी पाई गईं। पहली लहर में संक्रमित होने के 12 महीने बाद भी लोगों में एंटीबॉडी बनी हुई हैं। पहली लहर में संक्रमित हुए 70 लोगों में भी 100 से 250 तक एंटीबॉडी मिली हैं। 

गंभीर लक्षण वालों में एंटीबॉडी दोगुना संभव: डॉ. गौतम
एसएन मेडिकल कॉलेज के कोविड मरीजों का उपचार करने वाले डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि दूसरी लहर में डेल्टा स्ट्रेन मिला था। यह खतरनाक अधिक था और फेफड़ों को नष्ट कर रहा था। 

जिन मरीजों में वायरस के लक्षण अधिक रहे और गंभीर मरीजों में एंटीबॉडी दोगुना मिलने की पूरी संभावना है। यह भी देखने में मिला कि जिनमें सामान्य लक्षण थे, उनमें एंटीबॉडी भी कम बनी। कई में तो तय 132 आईयू/एमएल से भी कम पाई गईं। 
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