मुहावरे पर मत जाना, अच्छे ‘पापा’ हैं घड़ियाल

Agra Updated Fri, 09 May 2014 05:30 AM IST
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उमेंद्र भदौरिया
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बाह (आगरा)। घड़ियाली आंसू। इस मुहावरे ने घड़ियाल को बहुत बदनाम किया है। लेकिन अमेरिकी जंतु विशेषज्ञों की टीम का शोध इस मुहावरे का वैज्ञानिक जवाब भी है। इन्होंने पता लगाया कि घड़ियाल में एक ‘अच्छे पापा’ के सभी गुण मौजूद हैं। जहां आमतौर पर दूसरे वन्य जंतु सहवास के बाद ही दूरी बना लेते हैं वहीं घड़ियाल अंडों से बच्चे निकलने तक इनकी देखरेख में मादा का पूरा साथ निभाता है। एक-दो नहीं वह लगातार 65 दिन तक इस ‘गृहस्थ धर्म’ का जिम्मेदारी के साथ निर्वाह करता है।
अमेरिकी टीम ने यहां चंबल सेंक्च्युरी में लंबे शोध के बाद यह नतीजा निकाला। टीम के अगुआ वैज्ञानिक जेफरीतेंग ने बताया कि अधिकांश जंगली जानवर व जलीय जीव मादा के साथ सहवास करने के बाद उसकी सुध नहीं लेते। चंबल के जानवरों का स्वभाव भी सामान्यत: ऐसा ही है। चार महीने पहले चंबल के घड़ियालों पर शोध करने के लिए जेफरीतेंग अपनी टीम के साथ चंबल सेंक्च्युरी आए।
सेंक्च्युरी के अधिकारियों की अनुमति हासिल करने के बाद टीम ने चंबल नदी के अटेर घाट पर घड़ियालों की पूंछ में ट्रांसमीटर लगाए, ताकि उनकी दिनचर्या का अध्ययन किया जा सके। शोध के बाद सेंक्च्युरी के अधिकारियों को भेजी रिपोर्ट में जेफरीतेंग ने कहा है कि मादा के साथ सहवास करने के बाद नर घड़ियाल उससे दूर नहीं जाता बल्कि अंडे हो जाने पर 65 दिन तक मादा के साथ मिल कर बच्चे निकलने तक इनकी देखभाल करता है। बता दें, मादा घड़ियाल मार्च के अंत से अप्रैल तक अंडे देती है। 65 दिन बाद बच्चे अंडों से बाहर आते हैं।

अंडे की फिक्र में दूर नहीं जाते
पानी कम होने पर 25 से 100 किमी तक नदी में विचरण करने वाले घड़ियाल अंडों की निगरानी के दिनों में यह सफर छोटा कर देते हैं। इनका विचरण उसी टापू के करीब ही होता है जहां इनके अंडे होते हैं। ये सुबह-शाम धूप सेंकने भी इसी टापू पर आते हैं। निगरान के दौरान अगर सियार इधर आता दिखा तो वे उस पर हमला भी करते हैं। सियार बालू खोदकर अंडे नष्ट कर देता है। बता दें, मादा नदी के बीच बने टापू पर बालू में गड्ढ़ा खोदकर अंडे देती है। फिर उसे बालू से ढंक देती है। वन विभाग भी सियार से सुरक्षा के लिए सुरक्षा के लिए इसके ऊपर जाली रखकर उसे बालू से ढंकवा देता है। बच्चों के निकलने से पहले सरसराहट की आवाज होती है तब यह जालियां हटा दी जाती हैं।

बाह में 36 नेस्ट चिह्नित
चंबल सेंक्च्युरी के बाह एरिया में 36 नेस्ट चिह्नित किए गए हैं। इन पर वन विभाग की टीम ने बालू में जाली लगा दी है। ताकि सियार व अन्य जंगली जानवर अंडों को नष्ट न कर सकें। वन विभाग घड़ियालों के विचरण और अंडों की लगातार निगरानी कर रहा है।


अमेरिकी टीम के शोध में नर घड़ियाल को लेकर नई बात सामने आई है। चंबल के ज्यादातर जीव सहवास के बाद मादा के पास नहीं ठहरते। लेकिन घड़ियाल पिता होने का पूरा धर्म निभाता है।
आर के शर्मा, रेंजर बाह
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