यमुुना में प्रदूषण रोकने के लिए क्या हुई पहल?

Agra Updated Tue, 28 Jan 2014 05:43 AM IST
आगरा। शहर में प्रदूषण और यमुना की गंदगी पर रोक के लिए क्या पहल हुई? याचिका समिति ने सवाल दागे तो अफसर निरुत्तर हो गए। दिल्ली में हुई बैठक में सवालों से घिरे अफसरों ने दो माह की मोहलत मांग अपनी जान छुड़ाई। उन्होंने वादा किया है कि यमुना को प्रदूषण मुक्त रखने की कोशिशों का असर दो माह में नजर आने लगेगा।
गौरतलब है कि केंद्रीय याचिका समिति ने यूपी के प्रमुख सचिव शहरी विकास, मंडलायुक्त सहित स्थानीय अधिकारियों को दिल्ली तलब किया था। बुधवार को याचिका समिति की बैठक संसदीय एनेक्सी में हुई। इसमें केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों के अलावा स्थानीय अधिकारी भी शामिल हुए। कई अहम मुद्दे उठे और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर भी चर्चा हुई। सांसद रामशंकर कठेरिया ने बैठक में यमुना में प्रदूषण, गंदगी और दूषित पानी की समस्या उठाई। उन्होंने कहा कि पेठा और चमड़ा उद्योगों से निकलने वाला केमिकलयुक्त पानी सीधा यमुना में गिर रहा है। यमुना से ही शहर में पेय जलापूर्ति की जाती जाती है। दूषित पानी पीने से लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। यमुना प्रदूषण की वजह से ताजमहल सहित नदी के किनारे स्थित ऐतिहासिक स्मारकों पर भी खतरा बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शहर के नालों का पानी यमुना में गिरने से रोकने का आदेश दिया था। 1996 में पेठा इकाइयों, जूता कारखानों और डेयरी उद्योग को शहर से बाहर करने के आदेश दिए थे, लेकिन अफसरों ने गंभीरता से नहीं लिया। महाजन कमेटी ने मंटोला नाले के लिए 33 करोड़ की योजना तैयार की थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वीकृति दे दी थी। महाजन कमेटी ने 2006 में शमशान घाट नाले के लिए भी करीब दो करोड़ रुपये की योजना तैयार की थी, लेकिन आज तक काम शुरू नहीं हो सका है।
इन सभी मामलों पर समिति ने न केवल सवाल जवाब किया बल्कि नाराजगी भी व्यक्त की। अधिकारियों ने समिति से दो माह की मोहलत मांगी है। बैठक में केंद्र सरकार की ओर से पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के सचिव डा. वी राजगोपालन, चेयरमैन सुशील कुमार, एडवाइजर डा. राशिद हसन, सीपीसीबी सदस्य जेएस कामयोत्रा, प्रमुख सचिव यूपी शहरी विकास सीवी पालीवाल, प्रमुख सचिव पर्यावरण वीएन गर्ग, मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर, एडीए वीसी अजय चौहान, नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह, सीडीओ प्र्रभांशु श्रीवास्तव, एडीएम सिटी बीपी खरे, गंगाजल सेल प्रमुख सुशील कुमार, मुख्य नगर नियोजक इश्तियाक अहमद, मुख्य अभियंता जल निगम जावेद अंसारी, पर्यावरण अभियंता राजीव राठी मौजूद थे।

समिति ने देखी थी शहर की हकीकत
याचिका समिति के सदस्य शहर की हकीकत से पूरी तरह से वाकिफ हैं। 26 सितंबर को समिति के सदस्य चेयरमैन अनंत गीते के नेतृत्व में आए सदस्यों ने नूरी दरवाजा की गलियों को देखा था। पेठा कारखानों से निकलने वाली गंदगी का भी जायजा लिया था। इसके साथ ही टीम यमुना किनारा गई थी। छावनी क्षेत्र में भी एक रास्ते के विवाद को लेकर सेना के अधिकारियों से सदस्य मिले थे।

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