मैं महंगाई, जमाख्ााोरी से आई

Agra Updated Sat, 23 Nov 2013 05:39 AM IST
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नौकरीपेशा हो या हर दिन कमाने-खाने वाला मजदूर। महंगाई ने घर-घर की कहानी को बदल डाला है। हालात यह हैं, मूली की है गई भरमार, टमाटर ने कर दई हाहाकार। मटर को लगौ तुसार, प्याज के दाम से चढ़ौ बुखार। घर-घर में हो रही लड़ाई, मारने आई डायन महंगाई। महंगी चीनी से फीकी हुई चाय, दूध के लिए पप्पू रोये जाए। चुनावी साल है नजदीक आया, पार्टियों ने पब्लिक का ढोल बजाया। जमाखोरों ने कर दी हालत खस्ता, आमदनी चवन्नी और रुपय्या खर्चा।
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- रोजमर्रा की चीजों पर चारों तरफ से आया महंगाई का जलजला
- सब्जी, दालें, चावल, आटा, मसाले, दूध, कपड़ा, फल है महंगा
- टमाटर, प्याज, आलू, आटा जैसी चीजों के भाव तीन से चार गुने
- चुनावी चंदे के चलते सीजन में दाम गिरने के उलट चढ़ते जा रहे

आगरा। ट्रांसयमुना में राजू। अरे! चाची क्या ले आईं। बेटा एक थैली में 250 रुपये की सब्जी आई है। ये रामबाबू है न, हर रोज पैसे बढ़ा देता है। आलू तब भी रह गए। खैर, आज का काम चल जाएगा। रास्ते में तेरे भतीजे रिषभ के लिए दूध भी लेना है। 50 रुपये ही बचे हैं। बेटा खाए जा रही ये महंगाई। मैं भी कुछ काम करने की सोच रही हूं। यह कहानी एक घर की नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों का नसीब बन गई है, जो चवन्नी की आमदनी में रुपये के बराबर खर्च की महंगाई का दंश झेल रहे हैं।
‘महंगाई बम’ ने आम आदमी को घायल कर दिया है। खाने की थाली में रखी चीजों को घटाते-घटाते बेहद कम कर दिया है। पेट भरने वाली बुनियादी चीजों आटा, दाल, चावल, सब्जी, मसालों समेत दूध-घी-तेल के दाम में आग लगी हुई है। चीनी महंगी हुई तो फीकी चाय पीनी शुरू कर दी। दाल महंगी हुई तो पानी मिला दिया, लेकिन आटा और सब्जी का क्या करें। किचन के खर्चों से लेकर पढ़ाई, कपड़ा और किराया तक हर दिन बोझ बढ़ रहा है। सबसे ज्यादा बजट बिगाड़ा है सब्जी ने। सर्दियों के इस सीजन में भी हरी सब्जी खरीदने के लिए हिम्मत जुटानी पड़ रही है। टमाटर के दाम सुनकर ही लाल हुए जा रहे हैं, जबकि प्याज के आंसू अब तक नहीं सूखे।
गोदामों में गेहूं भरा पड़ा है, लेकिन आटा 22 रुपये से बढ़कर अब 28 से 31 रुपये किलो तक पहुंच गया। यही हाल चावल का है। धान की बंपर फसल के बाद भी मिडिल रेंज के चावल 30 से 40 की जगह 50 से 60 रुपये के बीच हो गए।
तीखी हो गई मिर्च, हल्दी ने किया पीला
सब्जी का स्वाद बढ़ाना है तो जरूरी है मसाले, लेकिन चुनावी साल में अच्छे मानसून के बाद भी धान, गेहूं की तरह मसाले भी कृत्रिम महंगाई का शिकार बनाए जा चुके हैं। मिर्च, हल्दी और इलायची सहित तमाम मसाले लोगों की पहुंच से बाहर हो रहे हैं। जीरा और धनिया की कीमतें भी दिवाली के बाद तेजी से बढ़ रही हैं। हल्दी की कीमतों में सबसे ज्यादा और जबरदस्त उछाल आया है। 100 रुपये पर बिकी हल्दी अब 140 से 160 पर है तो मिर्च 60 से बढ़ते हुए 140 रुपये पर जा पहुंची। यही हाल जीरा और अजमाइन का है। लगातार रेट बढ़ने के पीछे मसाला कारोबारियों ने पूछताछ की तो चुनावी चंदा ही प्रमुख वजह बताया गया।

‘‘यह जमाखोरों द्वारा तैयार की गई कृत्रिम महंगाई है। प्याज हो या चावल या आटा, चुनावी चंदा देने के लिए बाजार और उपभोक्ताओं से खेला जा रहा है। सबसे बेहतर मानसून वाले साल में ऐसी महंगाई के पीछे सिर्फ जमाखोरी और चुनावी चंदा ही है।’’
डा. शरद भारद्वाज, अर्थशास्त्री

प्रशासन चुप, जमाखोरों की मौज
आगरा। चुनाव से पहले कृत्रिम महंगाई के पीछे जमाखोरी को बड़ी वजह माना जा रहा है, लेकिन ऐसा पहली बार है कि प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्याज के दाम थोक में 22 और रिटेल में 80 तक रहे, लेकिन सरकारी एजेंसियों ने छापेमारी की कोई कार्रवाई नहीं की। थोक के मुकाबले खुदरा में दो से तीन गुना बेची जा रही सब्जियों को काउंटर लगाकर बिकवाने में कोई पहल नहीं हुई।


सब्जी भाव
टमाटर 80
प्याज 60
गोभी 40
पत्ता गोभी 40
बैंगन 40
सेम 100
शिमला मिर्च 80
मैथी 40
बथुआ 40
अदरक 150
लहसुन 150
आलू 24
मूली 20
पालक 30
गाजर 30
(ये रेट प्रति किलो में बोदला सब्जी मंडी के हैं)

मसालों के दाम सुनकर ही पीले पड़े
मसाले भाव
हल्दी 140
मिर्च 140
धनिया 120
जीरा 200
खटाई 160

कंगाली में आटा गीला
नाम पहले अब
आटा 22 28
चावल 38 55
तेल 85 100

फल
केला 40 रुपये
पपीता 40
चीकू 60
सेब 80
अनार 120

दो गुने भाव पर बिक रहा किवी
आगरा। फलों के भाव तो 20 से 30 फीसदी तक बढ़े हैं, लेकिन सबसे ज्यादा रेट किवी का बढ़ा है। डेंगू, वायरल बुखार में प्लेटलेट्स बढ़ोतरी में किवी को फायदेमंद माना जा रहा है। इससे किवी की मांग में जबरदस्त इजाफा हो गया। बुखार के बीमारों की मांग के कारण दो महीने से किवी का भाव आसमान पर है। आम तौर पर 18 से 22 रुपये प्रति के भाव वाला किवी इन दिनों 40 से 60 रुपये के भाव पर बिक रहा है। शहर के अस्पतालों, नर्सिंग होम के पास के फल विक्रेताओं पर ही किवी की बिक्री ज्यादा है।
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