‘जख्म’ कुरेद कर रिश्ता जोड़ गए मोदी

Agra Updated Fri, 22 Nov 2013 05:39 AM IST
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अमित कुलश्रेष्ठ
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आगरा। जंग दिल्ली की गद्दी पर काबिज होने की है। मुद्दे भी देश के हैं, लेकिन भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने विजय शंखनाद रैली में उनके साथ-साथ आगरा की अनदेखी पर केंद्र और राज्य की सरकारों को जनता के कठघरे में खड़ा कर दिया। एयरपोर्ट, पर्यटन, फैक्ट्रियों की तालाबंदी, पेयजल समस्या और आलू उत्पादक किसानों की बदहाली का जख्म कुरेद कर भी लोगों से अपना रिश्ता जोड़ गए। उन्होंने बदहाली की तस्वीर दिखाई तो इसका इलाज के बहाने सुनहरे भविष्य का सपना दिखाना भी नहीं भूले। उनकी यह भाषणशैली खूब रास आई, भीड़ की तालियां इसकी गवाही दे रही थीं।
नरेंद्र मोदी के 30 मिनट के संबोधन का अधिकांश हिस्सा आगरा पर केंद्रित रहा। शुरूआत की तीन लाख लोगों से जुड़े पर्यटन व्यवसाय से। ताजमहल के हवाले से आगरा को उन्होंने पूरी दुनिया में भारत का प्रतिनिधि शहर बताया तो फौरन केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा आगरा की की जा रही उपेक्षा का जिक्र भी छेड़ा। उन्होंने भविष्य का सपना दिखाया जिसमें पर्यटन व्यवसाय की अपार संभावनाएं बताईं। किंतु यह भी बताना न भूले कि इससे आगरा को लाभ नहीं मिलेगा। क्योंकि यहां एयरपोर्ट का निर्माण आज भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच फुटबाल बना हुआ है। फिर यमुना किनारे होते हुए भी पीने के पानी के लिए परेशान आगरा के जिक्र में गुजरात की योजना का बखान किया कि नौ हजार गांव तक पाइप लाइन के जरिए शुद्ध पानी पहुंचाया जा रहा है। पूछा, यूपी में ऐसा क्यों नहीं। आगरा में गंगाजल पाइप लाइन के अधूरे प्रोजेक्ट पर कटाक्ष करते हुए मोदी ने अपनी ही पुरानी बात दोहराई। बोले, गुजरात में इतनी बड़ी पाइप लाइन है कि अखिलेश सपरिवार कार में बैठकर उसमें से गुजर सकते हैं।
आलू किसानों की बदहाली की दुखती रग पर भी उन्होंने हाथ रखा। इस बहाने भी निशाना राज्य सरकार पर साधा। गुजरात के बनासकांठा की तरह यहां उपज का अधिकतम मूल्य दिलाने वाली प्रसंस्करण इकाइयों के न होने का ठीकरा सपा सरकार पर फोड़ा। आगरा की फैक्ट्रियों की तालाबंदी के मुद्दे पर मजदूरों की नब्ज को छुआ। बिजली की कमी और भ्रष्टाचार के साथ महंगाई पर भी स्थानीय मुद्दों के साथ ही तंज कसे। अपनी इस बदली हुई शैली से मोदी न केवल समर्थकों, बल्कि आम आगरावासी के साथ भी गहरे जुड़ने में सफल रहे।

मंच पर दिखे डावर, मीडिया गैलरी में बंसल
विजय शंखनाद रैली में मोदी के साथ मंच पर भाजपाईयों के अलावा एक चेहरा ऐसा भी था, जो पहली बार रैली में भगवा खेमे के साथ दिखा। वह थे शहर के प्रमुख जूता निर्यातक पूरन डावर। एफमेक के अध्यक्ष और प्रमुख उद्यमी पूरन डावर मोदी की बांयी ओर दूसरी सीट पर बैठे और बतौर स्वागत समिति अध्यक्ष उन्होंने मोदी को फूलों की माला पहनाकर स्वागत किया। मंच के नीचे मीडिया गैलरी में प्रमुख महिला उद्यमी रंजना बंसल अपनी भतीजी के साथ मोदी के भाषण के दौरान बनी रहीं।

15 दिन नजर रख तय होते हैं मुद्दे
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की शैली वही है, तंज भी वही हैं, लेकिन बदले हैं तो सिर्फ शब्द। मोदी के भाषणों में अब स्थानीय म़ुद्दे ही हावी हैं। दरअसल, मोदी के साथ चल रही टीम ही उनका भाषण और उसके मुद्दों को तय करती है। यह टीम सिर्फ मुद्दे बताती है, उसे शब्दों में मोदी ही ढालते हैं। स्थानीय नेताओं के फीडबैक, बातचीत और इंटरनेट के जरिए यह टीम 15 दिन पहले से ही मुद्दों पर नजर रखती है। शहरों के हिसाब से मोदी के भाषण बदलते हैं। उनके संबोधन का 75 फीसदी हिस्सा स्थानीय मुद्दों का होता है।
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