ग्रामीणों ने खोली लीपापोती की कलई

Agra Updated Sun, 27 Oct 2013 05:37 AM IST
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आगरा। ‘साहब! अस्पताल कागजों में चल रहा है। बनने के बाद से यहां कोई झांकने तक न आया और इंदिरा आवास की पूरी किस्त भी हमें नहीं मिली।’ शुक्रवार को विकास कार्यों का यह सच गांववालों ने निरीक्षण को केंचरा गांव आए प्रमुख सचिव नियोजन संजीव मित्तल के सामने रखा। उन्होंने आवास, शौचालय, सीसी रोड, पेंशन समेत सभी योजनाओं में पिछले तीन दिन में की गई लीपापोती को बेनकाब कर दिया।
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केंजरा पहुंचे प्रमुख सचिव को गांव वालों ने अधूरे पड़े रास्ते और कच्ची गलियां दिखाईं। कागज में उपस्वास्थ्य केंद्र सुचारु होने की बात पर गांववाले भड़क गए। बताया कि बनने के बाद से आज तक उन्होंने एएनएम की शक्ल नहीं देखी। शौचालय निर्माण भी आधा-अधूरा मिला। अधूरे आवासों को देखकर पूना देवी से पूछा तो उन्होंने बताया कि सिर्फ 50 हजार रुपये की एक किस्त मिली है। हालांकि एडीएम (ई) ने 50 हजार और 30 हजार की दो किस्तें मिलने की बात कही। मार्च के बाद से वृद्धावस्था पेंशन और रानी लक्ष्मीबाई पेंशन न मिलने की बात सामने आई। गांव में पोल गड़े होने के बाद भी बिजली न होने की शिकायत भी हुई। डीएम जुहेर बिन सगीर, सीडीओ प्रभांशु श्रीवास्तव समेत सभी विभागों के अधिकारी इस दौरान मौजूद रहे।
सीएचसी जैतपुर के कर्मचारी नदारद
प्रमुख सचिव जैतपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचे वहां दवा वितरण कक्ष में दवाओं का ढेर तो दिखा पर बांटने वाला कोई न था। खून की जांच करने वाला भी न था। उन्होंने एएनएम से बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना के तहत स्कूलों में किए गए स्वास्थ्य परीक्षण संबंधी का चार्ट मांगा। वह ढूंढे नहीं मिला। आवासीय सुविधा के बाद भी स्टाफ के गायब रहने पर सीएमओ से नाराजगी जताई। इसके बाद केंजरा गांव के लिए निकल गए।

खस्ताहाल सड़क पर गाड़ी खराब
आगरा से बाह के उबड़खाबड़ रास्ते में छदामी के मठ के पास प्रमुख सचिव की गाड़ी खराब हो गई। इसके बाद डीएम की गाड़ी से वह जैतपुर सीएचसी तक गए। तकरीबन एक घंटे बाद उनकी गाड़ी ठीक होकर पहुंची।

चौपाल में हुआ हंगामा
प्रमुख सचिव की चौपाल में किसानों ने खनन के नाम पर पुलिस कर्मियों द्वारा उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि अपने खेतों से भी मिट्टी लाने क ी अनुमति के लिए आगरा दौड़ लगानी होती है।

आवेदन के साथ 20 रुपये के नोट
तहसील बाह में प्रमुख सचिव ने किसानों से आवेदन पत्र के साथ 20 रुपये लगाने का कारण पूछा तो पता चला कि खतौनी देने के सरकारी मूल्य 15 रुपये की जगह किसानों से प्रति खतौनी 20 रुपये लिए जाते हैं। इस पर उन्होंने एडीएम (ई) हरनाम सिंह को आरोपी कर्मचारियों को निलंबित करने के आदेश दिए।
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