जो सबसे करीबी, वही दे रहे जानलेवा बीमारी

Agra Published by: Updated Fri, 12 Jul 2013 05:30 AM IST
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धर्मेंद्र त्यागी
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आगरा। सर्वाइकल (बच्चेदानी) कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिससे महिलाओं की मौत सबसे ज्यादा होती है। अजब यह कि उनके सबसे करीबी पुरुष भी उन्हें यह जानलेवा बीमारी दे रहे हैं। विडंबना यह कि बड़ी संख्या में महिलाएं यह बीमारी उन्हीं से छिपाने को विवश हैं। अंगों की गंदगी से होने वाली इस बीमारी का इलाज भी सिर्फ महिलाओं के लिए उपलब्ध है। एसएन मेडिकल कॉलेज अस्पताल के रेडियोथेरेपी विभाग में सर्वाइकल कैंसर के 25 से 30 नए मामले प्रति माह आते हैं। इनमें तमाम की वजह पुरुष होते हैं। विभाग में ब्रेस्ट कैंसर के प्रति माह 15-20 नए मामले ही आते हैं।
महिलाआें में सर्वाइकल कैंसर की वजह ह्यूमन पैपीलोमा(एचपी) वायरस है। यह गंदगी में पनपता है। अंगों की साफ-सफाई के प्रति लापरवाह और यौनरोगों से पीड़ित पुरुष एचपी के वाहक बन जाते हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के रेडियो थेरेपी विभाग की प्रो. डा. शालिनी गुप्ता बताती हैं, संबंधों के अंतरंग पलों में यह वायरस पुरुषाें से महिलाआें में पहुंचता है। वे बच्चेदानी के कैंसर का शिकार हो जाती है। हालांकि महिलाओं में खुद को साफ न रखना भी इस बीमारी की बड़ी वजह है।



सर्वाइकल कैंसर के कारण
महिला का अधिक पुरुषाें से शारीरिक संबंध होना।
एकधिक संबंध रखने वाले पुरुष के साथ संसर्ग से।
इस कैंसर पीड़ित महिला के पति के साथ संबंध से।
गर्भनिरोधक गोली, शराब-सिगरेट का अधिक सेवन।
बार-बार गर्भधारण करना या गर्भपात कराया जाना।

जरा सी सावधानी, पूरा बचाव
जननांगाें की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
सही उम्र में शादी, यानी ब्याह 18 साल के बाद।
ज्यादा बच्चे नहीं, दो से अधिक न हों तो अच्छा।
असुरक्षित यौन संबध बनाने से बचना आवश्यक।

नियमित जांच जरूरी
सर्वाकल कैंसर का पता लगाने के लिए तीन चरण में पैप स्मीयर जांच कराई जाती है। पहली जांच 24 साल की उम्र या शादी के तीन साल बाद होती है। दूसरी 25 से 45 साल के मध्य तीन साल में एक बार जांच। 46 से 65 के मध्य पांच साल में एक बार यह जांच की सलाह दी जाती है। अगर इनमें सब ठीक मिले तो 65 साल के बाद जांच की आवश्यकता नहीं होती।

वैक्सीन है कारगर उपाय
चिकित्सकों की सलाह है कि बेटी को ह्यूमन पैपीलोमा वायरस वैक्सीन जरूर लगवाएं। यह टीका नौ साल से शारीरिक संबंध न बनाए जाने तक लगाया जा सकता है। पहले टीके के बाद दूसरा एक महीने और तीसरा छठे महीने लगता है। शारीरिक संबंध बनाने के बाद यह वैक्सीन कारगर नहीं, चाहे उम्र कुछ भी हो।

बीमारी से भी बड़ा डर
समाजिक बहिष्कार का
सर्वाइकल कैंसर पीड़ितों की बड़ी संख्या मलिन बस्तियों और गांवों में रहने वाली महिलाओं की है। जांच में पुष्टि होने पर इन महिलाआें को पति और परिवार की बेरुखी का भय सताता है। इन्हें लगता है कि यदि बीमारी का पता चला तो उन्हें ही दोषी ठहराकर पति और परिवार उनका उत्पीड़न करेंगे। उन्हें बहिष्कृत करेंगे। डर की हद यह कि ये अपने मायके वालों से भी बीमारी छिपाती हैं। इसी कारण इलाज नहीं करा पातीं या नियमित नहीं रख पातीं। नतीजा घातक होता है। देहाताें में कैंसर की जांच के संसाधन न होना भी बीमारी फैलने का बड़ा कारण है।

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