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भरोसा जीतिये, प्रोडेक्ट जीतेगा

Agra Updated Wed, 30 Jan 2013 05:30 AM IST
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आगरा। कारोबार को बढ़ाने के लिए सबसे प्रमुख निवेश दिल जीतना है। मौजूदा दौर के कारोबारी जगत में दौड़ रहे बिजनेस, इनोवेशन और सस्टेनबिलटी जैसे शब्द इसी दिल जीतने के अंतर्गत आ जाएंगे। चाहे मार्केटिंग स्ट्रेटजी हो या फिर संसाधनों का उचित दोहन, बेहतर प्रबंधन कर दिल जीतना सबसे जरूरी है।

यह सार है समापन सत्र का जिसमें विश्व के कारोबारी दिग्गजों ने बिजनेस इनोवेशन और सस्टेनबिलिटी पर अपने विचार रखे। सिंगापुर प्रबंधन विश्वविद्यालय के डिप्टी प्रेसीडेंट राजेंद्र श्रीवास्तव ने उदाहरणों के जरिये बताया कि कैसे ब्रिटानिया ने कैसे मधुमेह रोगियों के लिए स्वादहीन बिस्कुट को पसंदीदा और 300 फीसदी से अधिक लाभ वाला उत्पाद बना दिया। उन्होंने कहा कि बाजार की जरूरतों के अनुसार ऐसे ही इनोवेशन और ग्राहकों में विश्वास बनाए रखने की जरूरत है। पोलेंड के मंत्री टोमस ख्रुश्जोव ने कहा कि कारोबार तभी तक स्थायी हो सकता है जब प्राकृतिक संसाधन और जैव विविधता बनी हुई है। पानी नहीं है। हरियाली कम हो रही है। यह खत्म हुआ तो कारोबार भी कहां बचेगा। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम लोगों को इसके बारे में भी शिक्षित करें।

ड्यूपांट की सीईओ इलिन जे कुलन ने एग्रोबेस इंडस्ट्री के साथ लोगों को शिक्षित करने, एग्रीकल्टर, फूड और एनर्जी सिक्योरिटी पर जोर दिया। एनएमसीसी के सचिव अजय शंकर, निक्को कारपोरेशन के चेयरमैन राजीव कौल आदि ने कहा कि सरकार को शिक्षा क्षेत्र में निवेश की जरूरत है। अगर स्किल डेवलेपमेंट नहीं हुआ तो आगे बढ़ना मुश्किल होगा। वहीं सीआईआई के वाइस प्रेसीडेंट अजय एस श्रीराम ने समिट को सफल बताते हुए कहा कि आने वाले समय में इसके फायदे मिलेंगे।

इसलिए चीन करता है अधिक कारोबार....
अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संपदा संगठन स्विट्जरलैंड के महानिदेशक के चीफ आफ स्टाफ एनएन प्रसाद ने भारत में संभावनाओं के साथ कारोबार के क्षेत्र में चीन के बेहतर होने के कारणों को आंकड़ों के जरिये पेश किया। प्रसाद ने बताया कि पिछले दस सालों में चीन ने बीस लाख से अधिक वस्तुएं पेटेंट कराने के लिए आवेदन दिया है जबकि भारत ने केवल 80 हजार। यह अंतर है। 2011 में ही चीन ने जहां 20000 आवेदन किए, ने केवल 8500। यह स्थिति सुधरी है लेकिन चीन के मुकाबले बहुत कम है। बौद्धिक संपदा को पेटेंट कराने के लिए चीन पैसे खर्च करता है। रिसर्च एंड डेवलेपमेंट के क्षेत्र में विश्व के कुछ बड़े देश 75 फीसदी की हिस्सेदारी करते हैं। विश्व में आरएंडडी पर होने वाले खर्च का 13 फीसदी अकेले चीन करता है। 2009 में भारत ने केवल 0.75 फीसदी शोध और विकास पर खर्च किए। 2011 में जरूर 2.8 फीसदी खर्च रहा लेकिन यह बहुत कम है। जबकि भारत की बौद्धिक संपदा चीन, अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई देशों के विकास में योगदान दे रही है। भारत में 50 करोड़ लोगों के लिए आज भी उच्च शिक्षा की जरूरत है। ऐसे में निवेशकों के पास शिक्षा क्षेत्र में निवेश का मौका भी है।

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