नव जागरण का मंत्र दे गए थे बापू

Agra Updated Wed, 30 Jan 2013 05:30 AM IST
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आगरा। जन-जन में आजादी की अलख जगाने के लिए संपूर्ण देश का भ्रमण करने वाले बापू के पावन चरण आगरा में भी पड़े थे। बापू ने तीन बार शहर की यात्रा कर यहां नव जागरण का मंत्र फूंका। उनकी प्रेरणा से ही आगरा स्वाधीनता संग्राम में शिखर पर रहा। किरावली और जैंगारा का सत्याग्रह ऐतिहासिक बन गया। आखिरी बार हरिजन-उद्धार के लिए फंड इकट्ठा करने आए बापू को महिलाओं ने अपने गहने तक अर्पित कर दिए थे।
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समाजसेवी स्व. प्रताप चंद्र जैसवाल स्मृति ग्रंथ के एक लेख में बापू की यात्रा का वर्णन मिलता है। इसके अनुसार महात्मा गांधी की ये यात्राएं बहुत महत्व रखती हैं। सबसे पहले 1917 में वह एक दिन के लिए शहर में आए और अयोध्या नाथ कुंजरू के यहां रुके। इस दौरान उन्होंने सभा को भी संबोधित किया था। राष्ट्रपिता की एक झलक पाने के लिए जन ज्वार उमड़ पड़ा था। इसके बाद कांग्रेस को सुदृढ़ बनाने व नव चेतना का संचार करने के लिए बापू 1920 में अलीगढ़ आए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की प्रार्थना पर 23 नवंबर को वह आगरा पहुंचे। युग पुुरुष के स्वागत में बैंड बाजों के साथ जुलूस निकला जिसे उन्होंने धन की बर्बादी बताया। इस बार राष्ट्र पिता बेलनगंज स्थित गिरधारी लाल वकील के यहां ठहरे थे।

24 सितंबर 1929 की यात्रा में बापू 13 दिन तक यमुना पार स्थित बृज मोहन लाल के बाग में बनी कोठी (वर्तमान में गांधी स्मारक) में ठहरे। उनकी यात्रा का उद्देश्य हरिजन-उद्घार के लिए फंड एकत्रित करना था। इस दौरान बापू ने कई गांवों का भी दौरा किया। किरावली व अछनेरा से सबसे अधिक फंड मिला। स्वतंत्रता सेनानी श्री कृष्ण दत्त पालीवाल, श्री चंद दौनेरिया, अध्यापक राम रतन, कालीचरण तिवारी आदि उनके साथ रहे।

विद्यार्थियों को संदेश
1920 में शहर आए बापू ने सभा में छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आपको शारीरिक श्रम करने की शिक्षा मिलनी चाहिए। अगर आप पढ़ लिखकर सरकारी नौकर होने की आकांक्षा रखते हैं तो आपके लिए यही पाठशालाएं ठीक हैं। मुझे ऐसे विद्यार्थियों की जरूरत है जिनमें समय आने पर बलिदान देने, फांसी पर चढ़ने और भिक्षा मांगने की शक्ति हो। यदि देशवासियों पर हुए अत्याचार से आपके हृदय में अग्नि धधक रही हो तो आप कालेज छोड़ सकते हैं। सभा में उन्होंने कौमी एकता पर भी बल दिया था।

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