मुख्यमंत्री जी! आगरा को चाहिए एयरपोर्ट, बैराज, स्टेडियम

Agra Updated Mon, 28 Jan 2013 05:30 AM IST
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आगरा। पार्टनरशिप समिट के लिए शहर में दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि आए हुए हैं। इस समिट से प्रदेश के साथ आगरा की जनता ने भी विकास के तमाम सपने बुने हैं। ये सपने कितना हकीकत बन पाएंगे यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। लेकिन यदि कुछ छोटी-बड़ी जरूरतों को मुख्यमंत्री पूरा कर दें तो आगरा विकास की नई इबारत लिख सकता है।
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नाले में तब्दील हो चुकी कालिंदी, पीने के लिए गंदा पानी, टूटी सड़कें, गंदगी, खेल सुविधाओं का अभाव आगरा के दामन पर दाग सरीखा है। ताज के शहर में रात में पर्यटकों के ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं। सीएम साहब! चंद बुनियादी बदलाव हो जाए तो आगरा की तकदीर बदल सकती है। यहां बैराज बन जाए तो न केवल शहर को स्वच्छ पानी मिलेगा बल्कि यमुना भी लबालब होगी और ताज के हुस्न में चार चांद लग जाएंगे। इंटरनेशनल एयरपोर्ट मिलने से आगरा सीधे दुनिया के देशों से जुड़ जाएगा। इससे व्यापार और पर्यटन उद्योग भी निखरेगा। आगरा ने शूटिंग में कई नामचीन खिलाड़ी दिए हैं। यदि यहां इंटरनेशनल स्टेडियम का निर्माण हो जाए तो यहां विश्वस्तरीय स्पर्धा होंगी, जिससे पर्यटन का विकास तो होगा ही, खिलाड़ी भी यहां पैदा होंगे। दुनिया के मानचित्र पर आगरा जानामाना शहर है। यहां तमाम सेमिनार, समिट और कांफ्रेंस हो सकती हैं। जरूरत बस एक अंतराष्ट्रीय स्तर के कन्वेंशन सेंटर की स्थापना का है।




करें कुछ ऐसा कि जाम से मिले निजात
शहर की सबसे बड़ी समस्या जाम की है। हाईवे पर वाटरवर्क्स से सिकंदरा चौराहा तक जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। इसके लिए जनता ने आवाज उठाई लेकिन कुछ नहीं हुआ। खुद अधिकारी भी इस समस्या को अतिगंभीर मानते हैं। निजात के नाम पर कहतेे हैं, फ्लाइओवर बनने के बाद ही समाधान हो सकता है। समिट के चलते पिछले दो दिनों से हाईवे पर जाम नहीं लगा रहा। वजह चौराहों से अतिक्रमण हटाया जाना है। होना कुछ ऐसा चाहिए कि शहरवासियों को जाम से निजात मिल सके।


...तो बढ़ेगा मेडिकल टूरिज्म
आगरा। ताजनगरी में मेडिकल टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। इसके लिए जरूरी है कि शहर में आने वाले विदेशियों को फील गुड हो। सस्ता और अच्छे इलाज के साथ यदि घूमने-फिरने और ठहरने की बेहतर व्यवस्था की जाए तो मेडिकल टूरिज्म में शरह अपना नाम कर सकता है। साथ ही एसएन मेडिकल कालेज में स्पेशलाइज्ड कोर्स शुरू किए जाएं। ऐसा होने पर अलग-अलग स्पेशलिटी में एमसीएच और डीएम की डिग्री लेकर चिकित्सक हास्पिटल शुरू कर सकेंगे।


बेपटरी है उच्च शिक्षा
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगरा पिछड़ा हुआ है। डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय पढ़ाई से ज्यादा प्रदर्शन और हंगामे के लिए पहचान बना चुका है। प्रवेश, परीक्षा और परिणाम देने में असफल साबित हो रहा है। विवि से संबद्ध 550 कालेजों में पढ़ाई का स्तर निचले स्तर का है। ऐसे में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी चुनौती है। सरकार को इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। इसके साथ ही निजी मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग कॉलेजों की मॉनीटरिंग भी की जानी चाहिए।

बदहाल है प्राइमरी शिक्षा
जनपद में प्राइमरी शिक्षा बदहाल है। सरकारी योजनाएं रजिस्टरों तक सिमटी हुई हैं। मिड डे मील योजना हो या फिर निशुल्क पुस्तक-पोशाक वितरण, सभी में गड़बड़झाला है। पूरे सत्र बच्चाें को पुस्तक और पोशाक नसीब नहीं हुई। नगर और देहात के ब्लॉकाें को मिलाकर 2,54,686 बच्चे पंजीकृ त हैं। अगर धरातलीय स्थिति देखें तो इनमें से 80-90 हजार बच्चे पोशाक से वंचित हैं। इसी तरह सख्त मॉनिटरिंग न होने से बच्चाें को मानकाें के अनुरूप मध्याह्न भोजन नहीं मिला।

स्वास्थ्य विभाग है ‘अस्वस्थ’
एक मेडिकल कालेज, एक जिला अस्पताल और एक महिला चिकित्सालय इसके साथ ही 15 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 45 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र। इस सबके बावजूद सरकारी इलाज मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। कहीं चिकित्सक नदारद हैं तो कहीं पैरामेडिकल स्टाफ नहीं हैं। ‘अस्वस्थ’ चल रहा स्वास्थ्य विभाग मरीजाें का इलाज करने के बजाय उनकी बढ़ा रहा है।

प्रोसेसिंग यूनिट मिले तो छू लें आसमान
ताजनगरी का आलू अपने ही शहर में पहचान के लिए तरस रहा है। किसानों ने खून-पसीना बहाकर आगरा को देश में नंबर वन आलू उत्पादक का खिताब तो दिला दिया, लेकिन सुविधाओं के लिए वह आज भी मोहताज हैं। सालों से ‘आलू प्रोसेसिंग यूनिट’ की मांग महज चुनावी मुद्दा बनकर रह गई है। हालांकि सरकार ने संकेत दे दिए हैं, लेकिन किसानों का कहना है कि यदि आलू प्रोसेसिंग यूनिट मिल जाए तो वह आसमान छू लेंगे। हर साल खराब होने वाला हजारों क्ंिवटल आलू नष्ट होने से बचेगा। किसानों की मेहनत का मोल भी उन्हें मिल सकेगा।

आगरा को चाहिए नियमित उड़ान
आगरा। ताजनगरी का आसमान नियमित उड़ान से अछूता है। खेरिया एयरपोर्ट से सप्ताह में तीन उड़ानें हैं, वह भी एक निर्धारित रूट पर संचालित हैं। शहर के पर्यटन व्यवसायी एयरपोर्ट के विकल्प के रूप में सिविल टर्मिनल की मांग भी करते हैं, लेकिन सरकार ध्यान नहीं दे रही।
ताजनगरी में प्रतिवर्ष 80 लाख पर्यटक आते हैं। इसके बाद भी एयर इंडिया की नियमित उड़ान सेवा नहीं है। आगरा के उद्यमियों की लंबी कोशिशों के बाद 26 दिसंबर से खेरिया एयरपोर्ट पर दिल्ली-आगरा-बनारस-खजुराहो विमान सेवा सप्ताह में तीन दिन के लिए शुरू की गई। उद्यमियों का मानना है कि यह उड़ानें व्यापारिक दृष्टि से बहुत फायदेमंद नहीं हैं।
पर्यटन के अलावा आगरा का हस्तशिल्प जैसे पच्चीकारी, जरदोजी, कालीन और जूता उद्योग विश्व प्रसिद्ध है। इन उद्योगों से जुड़े व्यवसायी लंबे समय से आगरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट की मांग कर रहे हैं। प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने आगरा से मथुरा के बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए जमीन देखने की कवायद की, लेकिन बाद में सरगर्मियां थम गईं। वहीं आगरा के कुछ व्यवसायियों का मानना है कि इंटरनेशलन एयरपोर्ट के निर्माण में पांच से सात साल का समय लगेगा। यदि प्रदेश सरकार एयरपोर्ट केस्थान पर खेरिया हवाई अड्डे पर धनौली के नजदीक सिविल टर्मिनल विकसित करने की दिशा में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के प्रस्ताव को गंभीरता से लेकर यहां टर्मिनल बना दे तो आगरा के पर्यटन और उद्योग केलिए यह बड़ा कदम साबित हो सकता है।
खेरिया हवाई अड्डे पर सुविधाएं
खेरिया हवाई अड्डे पर कस्टम, इंस्ट्रूमेंटल लैंडिंग सिस्टम, दो हवाई पट्टियां (10,000 फीट और 6000 फीट), रात्रि लेडिंग, पाकिंग की सुविधाएं हैं। पूर्व में आगरा में आगरा-जयपुर, मुंबई, काठमांडू, बनारस, लखनऊ की नियमित उड़ानें थीं, लेकिन बाद में बंद हो गईं।

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