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बस दावों की राजनीति

Agra Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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आगरा। गुलाम भारत के बाशिंदों की समस्याओं को मुखर होकर उठाने के लिए जिस कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर, 1885 को मुंबई में की गई थी, आगरा की जमीं पर आज उसकी आवाज में बुलंदी नहीं है। 128वें वर्ष में प्रवेश कर रही ‘राहुल की कांग्रेस’ आज नए कार्यकर्ताओं की कमी और पुराने और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की गुटबाजी से जूझ रही है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ पदाधिकारियों को पता ही नहीं है कि कांग्रेस का स्थापना दिवस 28 दिसंबर है। उन्हें इसके लिए डायरी की जरूरत पड़ती है।
कांग्रेस दशकों से विधानसभा चुनाव में आगरा में खाता खोलने की कोशिश कर रही है। जबकि शहर और जिला कांग्रेस कमेटी का दावा है कि कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। हालांकि, शहर कांग्रेस कमेटी के पास विधानसभा चुनाव में वोटों के बढ़ने का हवाला है लेकिन निगम चुनाव में पार्टी को 21 सीटों पर प्रत्याशी नहीं मिले थे, वहीं केवल चार प्रत्याशी ही जीत पाए।
जिला कांग्रेस भी बेहाल है। कमेटी के 90 फीसदी कार्यक्रम शहर में ही होते हैं। विधानसभा चुनावों में रालोद से साझे के बाद भी प्रत्याशी चंद हजारों में सिमट गए थे। बड़े नाम भी तीसरे-चौथे स्थान पर ही रहे थे। जिले में 31 और 15 ब्लाकों में 25-25 सदस्यीय कमेटी वाली जिला कमेटी के कार्यक्रम में लोगों की संख्या उंगलियों पर गिनने के लायक होती है। फिर भी संगठन का दावा है कि कांग्रेस मजबूत स्थिति में है।


पार्टी में हर जगह संगठन मजबूत है। आने वाले चुनावों में इसके सुखद परिणाम होंगे। आज कांग्रेस के साथ जो खड़ा है, वह त्यागी है। धर्म और अवसरवाद की राजनीति में जो हमारे साथ निष्ठा के साथ खड़ा है, वह सम्मानीय है।
दिनेश बाबू शर्मा
अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी

कांग्रेस अच्छी स्थिति में है। संगठन में कोई कमी नहीं है। सभी कांग्रेस को आगे बढ़ाने में लगे हैं। शहर की तीनों सीटों पर विधानसभा-2012 में कांग्रेस प्रत्याशियों ने अपना वोट प्रतिशत बहुत बढ़ाया है।
अश्विनी जैन
अध्यक्ष शहर कांग्रेस कमेटी


‘अधिकारों’ के हथियार से आक्रामक होगी कांग्रेस
प्रांतीय अधिवेशन में प्रतिनिधियों को पांच मुद्दों पर आक्रामक होने के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
आगरा। उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन तलाश रही कांग्रेस ने प्रांतीय अधिवेशन में प्रतिनिधियों को अधिकारों के हथियार से लैस कर वापस भेजा है।
प्रांतीय अधिवेशन में सभी प्रतिनिधियों को पांच बिंदुओं की बुकलेट देकर उसके बारे में बताया गया। साफ कहा गया है कि अन्य पार्टियां अपने झूठ को सच साबित करने के लिए खूब हल्ला करती हैं लेकिन हम अपने सच को भी नहीं बता पाते। इसलिए हमें इन मुद्दों पर लोगों के बीच जाना होगा। इसके लिए जोन स्तर पर फरवरी-मार्च में रैली करने, सदस्यता अभियान तेज करने, पदयात्राएं जारी रखने के लिए भी कहा गया। राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि इन आयोजनों में ही रसोई गैस, कैश सब्सिडी योजना, एफडीआई की जरूरत आदि के बारे में भी जनता को बताना होगा। अधिवेशन से लौटने के बाद पीसीसी सदस्य मधुरिमा शर्मा ने बताया कि सभी से पांच जनवरी तक कार्यक्रमों के प्रस्ताव मांगे गए हैं। जोन स्तर पर रैली की जाएगी।

इन अधिकारों पर होगी बात
शिक्षा का अधिकार
काम का अधिकार
सूचना का अधिकार
भोजन की सुरक्षा का अधिकार
आपका पैसा आपकी जेब अधिकार

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