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नवजात की मौत पर नाजुक हालत का ‘पर्दा’

Agra Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST
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आगरा। लेडी लॉयल महिला चिकित्सालय में तीन नवजात की मौत पर स्वास्थ्य विभाग की टीम नाजुक हालत का ‘पर्दा’ डालने में जुट गई है। बुधवार को अपर निदेशक स्वास्थ्य के साथ चार सदस्यीय टीम जांच को पहुंची। वार्ड में पहुंचते ही मरीजों द्वारा हास्पिटल स्टाफ पर अवैध वसूली के आरोप लगाने पर टीम लौट गई।
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सोमवार की रात और मंगलवार सुबह एक के बाद एक तीन नवजात की मौत पर तीमारदारों ने हास्पिटल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया था। बुधवार सुबह स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. मधु सिंघल, बाल रोग विशेषज्ञ डा. एके यादव, एसीएमओ डा. बीआर गौतम के साथ एनआरएचएम नोडल अधिकारी डा. संजय कांशीवाल ने जांच शुरू की। वार्ड में पहुंचते ही मरीजों ने अवैध वसूली के आरोप लगाने शुरू कर दिये। मीडिया की मौजूदगी के कारण टीम वार्ड से सीधे प्रमुख अधीक्षिका कार्यालय में पहुंच गई। यहां प्रमुख अधीक्षिका डा. प्रभा उपाध्याय से पूछताछ की और मरीजों की बीएचटी (बेड हेड टिकट) चेक किया। सूत्रों के मुताबिक, मंजू के शिशु को गर्भ में ही मृत होने की रिपोर्ट बनाई गई है। उर्मिला के प्रसव के दौरान रक्तस्राव होने और कार्ड गले में फंस जाने पर गंभीर हालत के चलते मौत का कारण बताया गया है। वहीं रेनू के शिशु की मौत का कारण बुजुर्ग तीमारदार द्वारा पिलाये गये पानी के सांस की नली में जाने को कारण माना जा रहा है। इस तरह तीनों नवजात की मौत पर चिकित्सकों को बरी करने की तैयारी कर ली गई है।

बाल रोग विशेषज्ञ की अनुपस्थिति की होगी जांच
अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डा. नेपाल सिंह ने बताया कि तीनों की मामले क्रिटिकल थे। ऐसे में प्रसव के दौरान बाल रोग विशेषज्ञ को होना चाहिए था। इसकी भी जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद जरूरत पड़ने पर फिर से जांच कराई जाएगी। आपातकालीन विभाग में स्वास्थ्य और प्रशासनिक अधिकारियों के नंबर दर्ज नहीं हैं। हास्पिटल प्रशासन को बोर्ड पर नंबर दर्ज करने के आदेश दिये हैं, ताकि मरीज अवैध वसूली सहित अन्य समस्याओं की शिकायत कर सकें।

पहले पैसे दो तब मिलेगा शिशु
प्रसव होने पर बच्ची देने के लिए स्टाफ ने 400 रुपये मांगे। रुपये न होने पर बच्चा देने से इनकार कर दिया। इसके चलते एक घंटे तक बच्ची ट्रे में पड़ी रही।
महादेवी, रेनू की सास

प्रसव के बाद बेटा होने पर 500 रुपये और बेटी होने पर 200 रुपये मांगे जाते हैं। न देने पर शिशु को नहीं दिया जाता है।
रेशमा, ताजगंज

बच सकेगी नन्हीं परी
अमर उजाला असर
तीन नवजात की मौत पर अमर उजाला ने लेडी लॉयल हास्पिटल की नवजात स्थिरीकरण वार्ड के खाली पड़े रहने को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। बुधवार दोपहर में टेगोर नगर निवासी सुमन पत्नी पवन के सीजेरियन से बेटी हुई। इसे तुरंत ही स्थिरीकरण वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।

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