ऑटो बंद होने से ध्वस्त न हो जाएं व्यवस्थाएं

Agra Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
50000 लोग प्रतिदिन गुजरते हैं एमजी रोड से
1000 ऑटो दौड़ते है सड़क पर
20 दिसंबर से जेनर्म की बसें बनेंगी सहारा
40 जेनर्म की बसें उठाएंगी यात्रियों का भार

एमजी रोड पर को ऑटो फ्री करने की कवायद शुरू हो चुकी है। प्रशासन का मानना है कि इससे ऑटों चालकों की आपाधापी से लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी। उम्मीदें काफी हैं, मगर व्यवस्थाएं अधूरीं। विरोध के स्वर भी मुखर होने लगे हैं। 20 दिसंबर से जब एमजी रोड पर ऑटो नहीं चलेंगे तो लोग कैसे गंतव्य को जाएंगे। हालांकि जेनर्म ने बसों की संख्या 40 कर देने का आश्वासन दिया है लेकिन 50 हजार यात्रियों के लिए ये नाकाफी होंगी।


आगरा। ताजनगरी की लाइफ लाइन एमजी रोड को ऑटो फ्री करने के लिए प्रशासन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। पहली चुनौती ऑटो न होने पर राहगीरों को बेहतर विकल्प उपलब्ध कराने की है, तो दूसरा ऑटो यूनियनों के विरोध में रूप में सामने आ रहा है।
एमजी रोड पर 20 दिसंबर से ऑटो बंद होने का निर्देश जारी हो चुका है। ऐसा होने के बाद इस सड़क पर चलने वाले 50 से 55 हजार लोगों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए जेनर्म की बसों पर निर्भर होना पड़ेगा। वहीं लगभग 1000 ऑटों चालकों के सामने के सामने भी रोजी-रोटी का संकट पैदा होगा। हैरान करने वाली बात ये है कि जो बसें इस सड़क पर चलाई जाएंगी। उनमें से कई का मेंटीनेंस चल रहा है। जेनर्म डिपो के एआरएम अनिल कुमार का दावा है कि इस सड़क पर 20-22 बसें चलाई जा रही हैं। ऑटों बंद होने के बाद इनकी संख्या 40 कर दी जाएगी।

आड़े आएगी बसों की समस्या
आगरा रोडवेज के पास 170 सिटी बसों का बेड़ा है। इनमें से 10 एसी, 10 मार्कोपोलो और 150 समान्य बसें हैं। इनमें से 30 से 35 बसें मेंटीनेंस के लिए डिपो में हैं, तो कुछ डिपो में बेकार खड़ी हैं। दूसरा बसों के साथ सबसे बड़ी समस्या स्टाप पर नहीं रुकने, यात्रियों से अभद्रता और अधिक किराया वसूले जाने को लेकर आ सकती है।

प्रशासनिक अधिकारियों के निर्णय का हमें सहयोग करना है। जो सही होगा, वही किया जाएगा
- वीपी सिंह, एआरटीओ

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अंतिम विकल्प है हड़ताल
आगरा। प्रशासन के निर्णय पर अब ऑटो चालक भी मुखर होने लगे हैं। शुक्रवार को आगरा मंडल ऑटो एवं टैक्सी एसोसिएशन ने प्रेसवार्ता का आयोजन किया। अध्यक्ष मुकेश कुमार सिंह और महासचिव राजकुमार तिवारी ने कहा कि पहले प्रशासन को यह सोचना चाहिए कि हटाए गए ऑटो शहर के किस भाग में संचालित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस संबंध में एक प्रतिनिधिमंडल आयुक्त से मिलेगा। इसके बाद कोर्ट और हड़ताल अंतिम विकल्प है। इसके लिए प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा। इस दौरान महासचिव राम प्रकाश राठौर और उपाध्यक्ष सचिन प्रताप सिंह भदौरिया आदि मौजूद रहे।

ऑटो यूनियनों का तर्क
- जाम का कारण सड़कों पर अतिक्रमण है।
- बसें और अधिक जगह घेरेंगी और छोटी दूरी के राहगीरों का क्या होगा।
- प्रशासन ऐसे ऑटो को दूसरे मार्गों पर लगाने की व्यवस्था क्यों नहीं करता।
- जिन लोगों ने परमिट में और नया ऑटो खरीदने में पैसे खर्च किए, वो सड़क पर आ जाएंगे।
- यदि कोई समस्या है, तो ऑटो चालकों को जागरूक और प्रशिक्षित करने का काम किया जा सकता है।

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