‘विकलांग नहीं, भाग्य विधाता हूं मैं...’

Agra Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
आगरा। समुदाय आधारित पुनर्वास पर आयोजित वर्ल्ड कांग्रेस विकलांग प्रतिनिधियों में जोश और उत्साह भरने में सफल रही। समापन समारोह में थाईलैंड के प्रतिनिधि ने हौसला दिखाते हुए कहा कि वह विकलांग नहीं, बल्कि भाग्य विधाता हैं। अपनी और अपने जैसों की तकदीर बदलने के लिए वह हर हद तक जाएंगे। उनके यह कहते ही दुनिया भर के लोगों ने तालियों से स्वागत किया।
जयपुर के दृष्टिबाधित विकलांग जगदीश चौहान ने कहा कि समाज को बदलने का यह सपना जल्द पूरा होने की उम्मीद की जानी चाहिए। दृष्टिबाधितों की भागीदारी ऐसी कांफ्रेंस में बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि उनकी समस्यायें भी सामने आएं। मैल्कम मैक्लालन ने कहा कि सीबीआर केवल जीवन को नहीं बदलेगी, बल्कि समाज और नीति बदलने का पत्र है। जापान सरकार की ओर से 25-27 फरवरी 2015 को टोक्यो में आयोजित तीसरी एशिया पैसिफिक सीबीआर कांफ्रेंस के लिए सभी को आमंत्रित किया।
ब्रेल लिपि में विजिटिंग कार्ड
कांग्रेस में शिरकत करने आए अधिकांश प्रतिनिधियों के विजिटिंग कार्ड ब्रेल लिपि में भी थे। कार्ड के बीच में ब्रेल लिपि में उन्होंने अपना नाम और संस्था का नाम दे रखा था, जिससे दृष्टिबाधित लोग भी उनके बारे में जान सकें। यही संवेदनशीलता और सोच सीबीआर के जरिए आम आदमी तक पहुंचे और समुदाय अपने विकलांग बच्चों का ख्याल रखे, यही सीबीआर (कम्यूनिटी बेस्ड रिहैबिटेशन) का उद्देश्य है।
होटल की तरह समाज बने विकलांग मित्र
सीबीआर वर्ल्ड कांग्रेस के लिए होटल जेपी पैलेस में हर जगह रैंप बनाए गए और हर फ्लोर के लिए लिफ्ट का प्रावधान करना पड़ा। मंच से लेकर पार्क, लॉबी, टायलेट तक आसान पहुंच के लिए रैंप बनाई गईं। कांग्रेस के आयोजक भूषण पुनानी के मुताबिक जिस तरह होटल में बदलाव किए गए, ठीक वही बदलाव समाज में लाने होंगे। हर इमारत, आफिस, घर, पार्क, सिनेमा हॉल और कार्यक्रमों में विकलांगों की भागीदारी को ध्यान में रखकर काम करना होगा।
ताज को महसूस ना कर पाने का मलाल
आगरा। दुनिया की पहली सीबीआर वर्ल्ड कांग्रेस में आए डा. ईनर हैलेंडर ने ताजमहल तक सीधी पहुंच को जरुरी बताया। उन्हें मलाल था कि ताज जैसे स्मारक ऐसे लोगों के लिए फ्रेंडली नहीं है। स्विट्जरलैंड के क्लाउड टेर्डिफ ने उम्मीद जताई कि वह ताज महल पर विकलांग और आम पर्यटकों के बीच भेदभाव को जल्द मिटने के बाद देखने आ पाएंगे।
भारतीय मंत्री दूर, विदेशी रहे भरपूर
आगरा। तीन दिन के सीबीआर वर्ल्ड कांग्रेस से भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कु. शैलजा उद्घाटन और समापन से दूर रहीं, जबकि कई देशों की सरकारों ने इसमें अपने प्रतिनिधि भेजे। दूसरी वर्ल्ड कांग्रेस मलेशिया में आयोजित करने के लिए मलेशिया सरकार ने अपने मंत्री को भेजा, जबकि करीब दो दर्जन देशों के सरकारी विभागों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए।
सीबीआर में अमेरिका, आयरलैंड आगे
सीबीआर के मिलेनियम डेवलपमेंट गोल अपनाकर अमेरिका, आयरलैंड, जापान जैसे देश आगे हैं, जबकि भारत में तो अभी शुरूआत भी नहीं हुई। एमडीजी में शिक्षा, जीवन यापन, रोजगार, स्वास्थ्य, गरीबी जैसे मुद्दे शामिल हैं, जिनके आधार पर विकलांग पुनर्वास की योजनाओं को अमली जामा पहनाया जा रहा है।

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