बौद्धिक संपदा का कोई मोल नहीं

Agra Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
आगरा। बौद्धिक संपदा का कोई मोल नहीं है। यह भी चल-अचल संपदा की तरह महत्वपूर्ण है। व्यक्ति विशेष के ज्ञान, अनुभव व उसकी बौद्धिकक्षमता को बगैर उसकी सहमति के उपयोग करना गैरकानूनी है। यह बातें उद्यमिता विकास संस्थान के निदेशक डीपी सिंह ने सोमवार को नेशनल चैंबर एवं उद्यमिता विकास संस्थान की ओर से ‘बौद्धिक संपदा अधिकार’ विषय पर आयोजित सेमिनार में कहीं।
चैंबर भवन में उन्होंने कहा कि बौद्धिक क्षमता उसकी व्यक्तिगत क्षमता है। चैंबर के अध्यक्ष महेंद्र कुमार सिंघल ने कहा कि बौद्धिक संपदा का कोई अन्य पक्ष उपयोग करना चाहता है तो निर्धारित शर्तों पर उसकी सहमति से एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद ही कर सकता है। लेकिन इस एमओयू का ट्रेड मार्क रजिस्ट्रेशन होना चाहिए। ट्रेडमार्क आगरा के पीके अरोड़ा ने कहा कि किसी भी वस्तु का ट्रेडमार्क उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिलाता है कि वह अपनी क्वालिटी और क्वांटिटी में खरा उतरता है। कार्यक्रम में अनुराग माथुर, सुरेश गुप्ता, जितेंद्र शर्मा, महान अरोड़ा, मनीष अग्रवाल, चैंबर के उपाध्यक्ष राजीव तिवारी, अशोक अरोरा, गिरीश चंद गोयल, अनूप गोयल आदि लोग मौजूद रहे।

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