सूचना देने के लिए चाहिए मेहनताना

Agra Updated Thu, 15 Nov 2012 12:00 PM IST
आगरा। ट्रांसमिशन पावर कारपोरेशन की हाई टेंशन बिजली अपने ही रिटायर कर्मचारी के परिवार पर टूट रही है। पहले तो रिटायरमेंट के बाद अपने कर्मचारी की लाखों रुपये की रिकवरी निकाल दी। पीड़ित कर्मचारी गम में घुलकर इस दुनिया को छोड़कर चला गया। अब पत्नी न्याय की लड़ाई लड़ रही है और कारपोरेशन उन्हें चक्कर कटवा रहा है। हालात ये हैं कि आरटीआई के तहत सूचना उपलब्ध कराने का पावर कारपोरेशन द्वारा मेहनताना मांगा जा रहा है।
गैलाना रोड निवासी आरपी उपाध्याय ट्रांसमिशन में सहायक स्टोर कीपर के पद से जुलाई 2004 में रिटायर हुए थे। पहले तो विभाग ने जीपीएफ के भुगतान में परेशान किया गया। विभाग की गलती की वजह से आरपी उपाध्याय को चक्कर लगाने पड़े और इसी गम में 2011 में उनकी मौत हो गई। तत्कालीन ऊर्जा मंत्री के दखल के बाद पत्नी कृष्णा उपाध्याय को पारिवारिक पेंशन मिली। इसके बाद विभाग ने उनकी पत्नी को करीब चार लाख रुपये की रिकवरी थमा दी। इसको लेकर परिवार एक बार फिर मुश्किल में घिर गया। तब से कृष्णा उपाध्याय न्याय की जंग लड़ रही हैं। जबकि जानकारों की कहना है कि किसी कर्मचारी की मौत के बाद नियमत: रिकवरी नहीं निकाली जा सकती है।
कृष्णा ने उपाध्याय आरटीआई के तहत 6 जनवरी 2012 को पावर कारपोरेशन से सूचना मांगी है। उन्होंने वर्ष 2003 से 2011 तक स्टोर के भौतिक सत्यापन का रिकार्ड, स्टोर के गेट पास और आउट इनवाइस सहित चार सवालों पर जानकारी मांगी है। इस पर विभागीय अधिकारी उन्हें घुमाने में लगे हैं। कभी पोस्टल आर्डर पर गलत लिखना बताया गया तो कभी किसी अधिकारी के पास भेजा गया।
श्रीमती उपाध्याय ने हार नहीं मानी तो अधीक्षण अभियंता विद्युत पारेषण मंडल ने सूचना उपलब्ध कराने के एवज में मेहनताने की डिमांड कर दी है। उन्होंने 2000 पेज की फोटो काफी उपलब्ध कराने के लिए 4000 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट मांगा। साथ ही मैन पावर में क्लैरीकल मैन डेज 44000 रुपये और लेबर मैन डेज के 22000 रुपये भी मांग लिये जबकि आरटीआई के तहत सूचना मांगने पर मेहनताने का कोई प्रावधान नहीं है। वहीं यह भी लिखा है कि पैसा जमा कराने के बाद 2-3 महीने में सूचना देने का प्रयास करेंगे। कृष्णा उपाध्याय का कहना है कि विभागीय चूक का खामियाजा आम आदमी क्यों भुगते। आरटीआई में स्पष्ट है कि समय पर सूचना नहीं देने पर आवेदक को बिना शुल्क के सूचना उपलब्ध कराई जाएगी।

धारा सात की उपधारा पांच में प्रावधान है कि समय पर सूचना नहीं देने पर आवेदक को सूचना मुफ्त में देनी होगी। वहीं सूचना देने के एवज में मेहनताने का कोई प्रावधान नहीं है। अगर ऐसा है तो इसके खिलाफ अपील करनी चाहिए।
गिरीश भारद्वाज
अधिवक्ता

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