आज है करवाचौथ, सखी री मांग ले सुख का दान..

Agra Updated Fri, 02 Nov 2012 12:00 PM IST
आगरा। प्यार, विश्वास, त्याग और समर्पण का पुंज है करवाचौथ। सुहाग की दीर्घायु के लिये सुहागिनें आज शुक्रवार को निर्जल व्रत रख साधना करेंगी। सोलह शृंगार में सजी संवरी सजनी के अप्रतिम सौंदर्य को साजन अपलक निहारेंगे। अर्धांगिनी करवे से अखंड सौभाग्य की प्रार्थना का अर्घ्य चंद्र देव को अर्पित करेंगी। चलनी से चांद को देखने के बाद पति को पलकों में भरेंगी और फिर उनके हाथों से जल पीकर अपना व्रत खोलेंगी।
सुहागिनों का उत्सव करवाचौथ घर-घर में आस्था और उल्लास से मनाया जाएगा। नई नवेली वधुओं में उत्साह की लहर है। पूर्व संध्या पर सबने भर-भर हाथ मेहंदी लगवाई। संस्कृत मनीषी पंडित चंदन लाल पाराशर ने बताया कि करवाचौथ सौभाग्यवती स्त्रियों का व्रत है जो पति की दीर्घायु और मधुर दांपत्य के लिये किया जाता है। प्रकृति में सूर्य पुरुष और चंद्रमा स्त्री का प्रतीक है। इस दिन सभी सौभाग्यवती महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद अपना व्रत खोलती हैं। करवाचौथ का वार भी अच्छा है और रोहिनी नक्षत्र है। वृष राशि का चंद्रमा है।

पूजन का मुहूर्त
7:30 -8:30 के मध्य में करें

चंद्रोदय
रात 8:31 ( संस्कृत मनीषी पं. चंदन लाल पाराशर )

ऐसे दें अर्घ्य: करवे में जल, चावल डाल कर ऊँ चंद्राय नम: मंत्र का जाप करते हुए चंद्र देव को अर्घ्य दें।

अक्को गद्दी के दिनेश गुरु ने बताया कि सुहागिनें स्नान व बिछुए बढ़ाने का कार्य भद्राओं के बाद प्रात: 8:49 के बाद करें तो शुभ होगा।

पूजन विधि:
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय के अनुसार करवाचौथ के दिन शिव योग भी पड़ रहा है। इस दिन सुहागिनें चंद्रोदय से पूर्व दीवार पर हल्दी से करवाचौथ काढ़ती हैं। पूजन स्थान पर मिट्टी की गौर भी बनाई जाती है। लोटे और करवे में जल भरकर रखा जाता है। हाथ में चावल और पुष्प लेकर सभी एक जगह एकत्र होकर चौथ माता की कथा सुनते हैं। सुहागिनें आपस में सात बार करवा बदलती हैं। हल्दी, रोली, चावल से चौथ माता को पूज, पूआ, लड्डू, हलुवा का भोग लगाया जाता है। सास या जिठानी को चीनी का करवा, सुहाग के सामान का बायना मंसा जाता है। रात को चंद्रमा उदित पर करवा और लोटे के जल का अर्घ्य देकर उनकी आराधना करते हैं। उसके बाद पति की अनुमति लेकर व्रत खोला जाता है।


कथा: इंद्रप्रस्थ नगरी में वेद शर्मा नामक ब्राह्मण के सात पुत्र और एक पुत्री वीरावती थी। विवाह के बाद पहला करवाचौथ का व्रत उसने मायके में रखा। तबियत खराब होने के कारण भाइयों ने पेड़ पर चढ़ चलनी में दीपक रख चंद्रमा के दर्शन करा दिये। वीरावती ने व्रत खोल लिया जिसके कारा उसके पति के प्राण पखेरू हो गये। वीरावती को व्रत के खंडित होने का पता चला। उसने छोटी भाभी के कहने पर भगवान शिव पार्वती की आराधना की। पुन: करवाचौथ व्रत रखा जिससे उसका पति जीवित हो गया। कथा सुनने के बाद सभी पत्नियां चौथ माता से अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।


जोर-शोर से मनाएंगे त्योहार
पंजाबी समाज में करवाचौथ का त्योहार जोर शोर से मनाया जाएगा। सुबह 4 बजे सासें अपनी बहुओं को सरगी देंगी। जिस घर में पहली करवाचौथ होगी, वहां सारी महिलाएं एकत्र होकर कथा सुनेंगी। नव वधू को सभी सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद देंगी।

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