18 साल पुराना पुलिस का कहर याद आया

Agra Updated Thu, 01 Nov 2012 12:00 PM IST
आगरा। खेरागढ़ के गांव नरीपुरा के लोगों को मंगलवार की घटना 18 साल पुरानी पुलिस की बर्बरता की दास्तां याद दिला गई। चार साल पहले उस कहर से गांव वालों को मुक्ती मिली है। यही वजह थी कि जब पुलिस सोमवार को गांव वालों पर कहर ढाह रही थी, तो कोई पुलिस की खिलाफत करने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था।
मृतक राजू के चचेरे भाई उदयभान सिंह ने बताया कि मंगलवार की शाम ताश खेल रहे गांव वालों पर पुलिस के कहर के विरोध की हिम्मत ही नहीं जुटा पाए। इसकी वजह 18 साल पुरानी कहानी है। सन 1984 में पुलिस ने गांव नरीपुरा में दबिश दी थी। इस दौरान पुलिस ने दो झोपड़ियों में आग लगा दी थी। इसमें एक झोपड़ी ग्या प्रसाद की थी। ग्या प्रसाद पुलिस के सामने गिड़गिड़ाता रहा कि अंदर पत्नी और छह माह का बच्चा सो रहा है, लेकिन पुलिस ने उसकी एक नहीं सुनी। आग लगने पर किसी तरह ग्या ने पत्नी को तो बचा लिया, पर वह मासूम बच्चे को नहीं बचा पाया। इस घटना ग्रामीणों में पुलिसके आक्रोश भर दिया। उन्होंने पुलिस का विरोध किया। इस पूरे मामले में पुलिस पर तो कोई कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि गांव वालों को नामजद किया। मामले की जांच तत्कालीन एसडीएम ने की। उन्होंने भी पूरे घटना क्रम के लिए पुलिस को दोषी ठहराया। उनके ही जांच के आधार और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने ग्रामीणों के पक्ष में फैसला सुनाया। ग्रामीणों ने इन 14 सालों में बहुत कुछ झेला है। यही वजह थी कि मंगलवार को जब अपनों पर ही पुलिस कहर बरप रही थी तो ग्रामीण केवल उनसे मिन्नतें ही कर रहे थे।

पुलिस उत्पीड़न के चलते बेटों ने छोड़ दिया गांव
आगरा। साहब सिंह कुशवाह को पुलिस पर विश्वास ही नहीं है। उनका कहना था कि पुलिस की वजह से उनके चारों बेटे अलग-थलग हो गए हैं। पुलिस आए दिन उनके घर में आ जाती और झूठे आरोपों में उनके बेटों को गिरफ्तार कर ले जाती थी। दहशत के चलते छह साल पहले राजू आगरा में बस गया था। दो छोटे बेटे बबलू और राजपाल सूरज गुजरात चले गए। छोटा बेटा तहसीलदार ही उनके साथ है।

दो दिन पहले ही आया था गांव
आगरा। राजू छह साल से आगरा में रह रहा था। वह गांव में आता था पर कम। दो दिन पहले ही सिद्ध बाबा की परिक्रमा देने के लिए वह गांव आया था। उसको क्या मालूम था कि जिस पुलिस से बचने के लिए वह छह साल से माता पिता से अलग हो गया था वहीं उसकी मौत की वजह बन जाएगी।

मामले की जांच के आदेश: आईजी आगरा जोन
आगरा। आईजी जोन आगरा भवेश कुमार ने बताया कि समाचार पत्र के आधार मानते हुए उन्होंने एडिशनल एसपी को मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच के बाद जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कोरे कागज पर करा लिए हस्ताक्षर
उदय सिंह ने बताया कि जिन आठ लोगों को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार किया था। उन सभी जगदीश, पप्पू, बाबू, मान सिंह, चंद्रभान, गज्जुआ, और मुरारी को सुबह मुचलके पर छोड़ तो दिया पर उनसे कोरे कागज पर हस्ताक्षर करा लिए हैं। इतना ही नहीं पुलिस ने मामले में राजीनामा कराने के लिए मुरारी को एक लाख रुपये का लालच भी दिया था।

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