यूपीसीबी ‘कालिया नाग’, ‘तारणहार’ का इंतजार

Agra Updated Thu, 01 Nov 2012 12:00 PM IST
आगरा। प्रदूषण के बढ़ते स्तर से गोकुल बैराज से लेकर हाथी घाट तक कालिंदी में पानी का रंग काला पड़ चुका है। आलम यह है कि जल निगम ने शहर के लोगों को इसकी जलापूर्ति देने में असमर्थता जताते हुए जिला प्रशासन के अधिकारियों को पत्र लिखा है। नदी में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार प्रदूषण विभाग बेपरवाह हैं। अव्वल तो प्रदूषण नियंत्रण विभाग नदी में प्रदूषण बढ़ने की बात को ही नकार रहा है। ऐेसे में वह प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाएगा इसका सहज अनुमान हो जाता है। यूपीसीबी कालिंदी के लिए ‘कालिया नाग’ बन चुका है। अब ‘तारणहार’ का इंतजार है। शायद वही कालिंदी को उसकी दुर्दशा से मुक्ति दिलाएगा।
यमुना का पानी एक सप्ताह से प्रदूषण के चलते बिल्कुल काला हो गया है। यह स्थिति मथुरा के गोकुल बैराज से लेकर आगरा में हाथी घाट तक है। यही नहीं बड़े पैमाने पर यमुना में शहर की गंदगी बहती दिख रही है। हालात यह हैं कि काले पानी के कारण जलीय जीव भी नहीं दिखाई दे रहे हैं।
बढ़ते प्रदूषण के कारण जल संस्थान के अधिकारियों ने जलापूर्ति देने में असमर्थता जता दी है। अधिकारियों ने पत्र लिखकर कहा है कि पानी का शोधन करना मुश्किल है।
इतने पर भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यमुना में प्रदूषण की बात को खारिज कर रहा है। उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी डा. बीबी अवस्थी का कहना है कि नदी के पानी का रंग बदल गया है। हालांकि वह यह नहीं बता सके कि रंग बदलने का कारण क्या है। उनका कहना था कि पानी में डियो (घुलनशील आक्सीजन) की मात्रा ठीक है। उनका कहना है पानी का रंग काला स्टोर किए पानी को छोड़े जाने के कारण हो सकता है, लेकिन उक्त पानी कहां से छोड़ा गया, इस बाबत वह कुछ नहीं बता सके।

यमुना के पानी का रंग बदलने के पीछे कहीं से स्टोर पानी का छोड़ा जाना है। जहां तक प्रदूषण की बात है तो इसमें अभी भी घुलनशील आक्सीजन की मात्रा ठीक है। अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि आखिर स्टोर पानी कहां से छोड़ा गया है। सैंपल लेकर पानी की जांच की जा चुकी है।
डा. बीबी अवस्थी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

घाटों पर जबरदस्त गंदगी
गणेश चतुर्थी और नवरात्र के बाद दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन यमुना में किया जाता है। इस दफा शहर में सैकड़ों स्थानों पर गणेश और देवी प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। उनका विसर्जन नदी में किया गया। इससे घाटों पर बड़े पैमाने पर गंदगी फैल गई है। इस दौरान तमाम तरह के रंग और देव प्रतिमाओं पर चढ़े कपड़े भी प्रवाहित किए गए।

यमुना में प्रदूषण के पीछे चमड़े के वेस्ट का सीधा यमुना में गिराया जाना भी है। मथुरा में साड़ी उद्योग का कचरा भी यमुना में ही डाल दिया जाता है। दीपावली के चलते औद्योगिक इकाइयों से वेस्ट छोड़े जाने के कारण भी यमुना मैली हुई है।
डा. डीके जोशी, समाजसेवी

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