रामनामी दुपट्टे उतरवाने के बाद ही दिया ताज में प्रवेश

Agra Updated Wed, 24 Oct 2012 12:00 PM IST
आगरा। वनवासी सत्संग समिति की महिला सदस्यों को मंगलवार को ताजमहल में सुरक्षा के नाम पर अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ा। गेरुआ वस्त्रों में देख सीआईएसएफ जवानों ने उन्हें पहले तो प्रवेश से रोका। फिर काफी जद्दोजहद के बाद उनके रामनामी उत्तरीय (दुपट्टे) उतरवाकर ही जाने दिया, जबकि इन पर रोक भी नहीं है। उनकी जवानों से तीखी नोंकझोंक भी हुई। वनकन्याओं ने इसे एक राष्ट्रीय स्मारक पर नियमों की आड़ में की जा रही तानाशाही करार दिया। सीआईएसएफ का कहना है कि इन युवतियों द्वारा प्रदर्शन किए जाने की ‘आशंका’ थी।
कोठी मीना बाजार में श्री हरि सत्संग समिति का सत्संग चल रहा है। इसमें भाग ले रही समिति से जुड़ी वनवासी समाज की 20 युवतियां मंगलवार की सुबह ताजमहल देखने पहुंची। वे अपनी विशिष्ट वेशभूषा थीं। गेरुआ वस्त्र और ऊपर से रामनामी उत्तरीय। इनमें कुछ साड़ी तो कई लंबा कुर्ता भी पहनती हैं। उत्तरीय को वह दुपट्टे की तरह इस्तेमाल करती हैं। टिकट लेने के बाद जब वह गेट पर पहुंची तो उन्हें रेड जोन की सुरक्षा में तैनात जवानों ने रोका। किसी धार्मिक समूह से होने की बात कहकर प्रवेश देने से इनकार कर दिया। वनकन्याओं ने समझाया कि यह उनका बाना है और यहां वह सिर्फ ताज देखने आई हैं। लंबी बहस के बाद जवानों ने उनके रामनामी दुपट्टे उतरवा लिए तब प्रवेश करने दिया।
युवतियों ने उत्तरीय उतारने के बाद असहज महसूस कर रही वन कन्याएं पूरा ताज देखे बिना कुछ ही समय में बाहर आ गईं। दुपट्टे वापस लेने के दौरान भी उनकी जवानों से तीखी नोंकझोंक हुई। उनका कहना था कि वह किसी धार्मिक उद्देश्य से वहां नहीं आई थीं। जिस तरह से उनके दुपट्टे उतरवाए गए, वह नियमों की गलत व्याख्या और उनका अपमान है।

सुरक्षा का सवाल
ताजमहल के रेड जोन में किसी तरह की व्यवसायिक, धार्मिक गतिविधि या प्रदर्शन की इजाजत नहीं है। यदि कोई समाचार चैनल बाइट लेता है तो उसके लोगों से भी नाम पट्टिका हटवाई जाती है?। वनवासी युवतियां समूह में थीं। प्रदर्शन आदि की आशंका के चलते उनके दुपट्टे रखवाए गए थे। उनसे अभद्रता नहीं की गई। यह सुरक्षा नियमों में शामिल है।
-एपी सिंह, कमांडेंट, सीआईएसएफ

कोई कारण रहा होगा
ताज के रेड जोन में रामनामी दुपट्टे पर कोई प्रतिबंध नहीं है। पूरे प्रकरण की मुझे जानकारी नहीं है। दुपट्टे लेने के पीछे कोई अन्य कारण रहा होगा। इस संबंध में सीआईएसएफ से बातचीत के बाद ही स्थिति स्पष्ट कर सकूंगा। -एनके पाठक, अधीक्षण पुरातत्वविद्

यह तो सरासर बेइज्जती है
वनवासी समाज के भाई-बहन बड़ी संख्या में यहां सत्संग में शामिल होने आए हैं। रामनामी उनकी वेशभूषा का हिस्सा है। उनमें से कुछ बहनें ताजमहल देखने गई थीं। वहां सुरक्षाकर्मियों ने इसे उतरवाए लिया। किसी युवती से उसका अंगवस्त्र कैसे उतरवा सकते हैं। उन्होंने दुपट्टे को अपनी इज्जत भी बताया, लेकिन वह नहीं माने। इससे उनकी भावनाएं आहत हुईं हैं।
भगवानदास बंसल, महामंत्री, श्री हरि सत्संग समिति

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