देखते ही देखते जिंदा जल गए दस लोग

Agra Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
आगरा। सेवला की अग्रवाल कालोनी में शुक्रवार देर रात हुए अग्निकांड में देखते ही देखते दस लोग जिंदा जल गए। पेंट-थिनर से विकराल हुई आग ने चीखने की भी मौका नहीं दिया और सभी को लील गई। आग के विकराल होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आग में फंसे परिवार को बचाव के लिए चीखने तक का मौका नहीं मिला। वहीं एसी-फ्रिज के कंप्रेशर और दो रसोई गैस के सिलेंडर फटने से ढही छत ने भी सबको बेबस कर दिया। हालांकि आग लगने का कारण अभी भी साफ नहीं है अनुमान है कि गैस रिसाव से लगी आग सिलेंडरों के फटने से और बढ़ गई। वहीं देर से पहुंची फायर ब्रिगेड के पास आग बुझाने के पूरे संसाधन नहीं होने से राहत काम डेढ़ घंटे बाद शुरू हो सका। सुबह सवा पांच बजे तक शव निकाले जा सके।
बृजमोहन के दो मंजिला मकान के ऊपरी हिस्से के एक कमरे में रहने वाला बड़ा पुत्र महेश पेंट का कारोबार करता था। वह दूसरे कमरे में रहने वाला दूसरा पुत्र किराना कारोबारी था। महेश ने दीवाली को देखते हुए पेंट-थिनर का स्टाक किया था। रात करीब दो बजे महेश का छोटा भाई पवन लघुशंका के लिए उठा तो उसे ऊपर की मंजिल पर आग देखी। उसने शोर मचाया तो उसके माता पिता, भाई राजू और उसका परिवार सब बाहर निकल आए। आग इतनी भयानक हो चुकी थी कि किसी की ऊपर जाने की हिम्मत नहीं हुई। हालांकि महेश की पत्नी शारदा ने जरूर बचाव की कोशिश की लेकिन कमरे से निकल कर पांच कदम ही चल सकी। उसका शव सीढ़ियों पर मिला। वहीं राकेश और उसका परिवार कमरे की कुंडी भी नहीं खोल सका। राकेश का शव दरवाजे के पास तो उसकी पत्नी ममता, बच्चों अंकित, पीयूष, प्राची के शव पलंग पर मिले। वहीं महेश, उसके बच्चे हिमांशु, शिवम, वर्षा भी सोते रह गए। दीवार तोड़कर जब शव निकाले गए तो अकड़े शरीर आग की भयावहता बता रहे थे। जो जिस अवस्था में था मौत ने उसे उसी अवस्था में लील लिया।
बताते हैं कि आग लगने के बाद गैस सिलेंडरों में हुआ विस्फोट दोनों परिवारों को मौत के मुंह तक ले गया। इससे महेश और राकेश और उनके परिवार के सदस्यों को बचने तक का मौका नहीं मिला। शोर शराबे पर जरूर कालोनी में जगार हो गई और लोगों ने सबमर्सिबल चला कर आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन पेंट-थिनर में आग के कारण पानी डालते ही आग और विकराल होने लगी।
हादसे की सूचना फायर ब्रिगेड और थाना सदर को दी गई लेकिन अग्निशमन दल पहुंचा ही नहीं। एक घंटे बाद छोटी दमकल मौके पर पहुंची लेकिन उसका पाइप घटना स्थल तक नहीं पहुंच सका। करीब 30 मिनट बाद सामान आया तब राहत कार्य शुरू हुआ। मकान के पीछे की दीवार तोड़कर एक घंटे की मशक्कत के बाद आग बुझाई जा सकी। इसके बाद शवों को निकालना शुरू किया गया।
एक साथ दसों शवों का अंतिम संस्कार
शनिवार शाम दसों शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। देर रात इन सभी के शवों को अंतिम संस्कार के लिए ताजगंज शमशान घाट ले जाया गया। जहां सभी को सबसे छोटे भाई पवन ने मुखाग्नि दी।

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