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बाल-बाल बचे माता-पिता

Agra Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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अग्रवाल कालोनी में शुक्रवार रात हुए अग्निकांड में बूढ़े माता-पिता और दोनों भाई बाल-बाल बच गए। बताते हैं कि जब लघुशंका के लिए उठे पवन ने आग देखी थी। उसे नीचे कमरों में सो रहे पिता, मां, भाई राजू और उसके परिवार और बच्चे को ीह निकालने का समय मिल पाया। उनके कमरे से बाहर आते ही आग नीचे बाइक में लग गई। जिससे बाहर के गेट तक पहुंचने का रास्ता बंद हो गया। इसके बाद आग पवन के माता-पिता के कमरे तक पहुंच गई।
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पेंट का काम करता था बड़ा बेटा
ब्रज मोहन के चार लड़के थे। सबसे बड़ा महेश पेंट बेचने का काम करता था। दूसरा पुत्र राकेश सेल्समैन था। जबकि तीसरा और चौथा की परचूनी की पास ही दुकान थी। पिता भी परचूनी की दुकान पर सहयोग करता था। पिता ब्रज मोहन की मानें तो महेश ने घर में कुछ पेंट्स का सामान घर में रख लिया था।

मकान में दो सौ बोतलें मिलीं थिनर की
ब्रज मोहन के मकान की ऊपरी मंजिल पर घटना के बाद थिनर की दो सौ से अधिक बोतलें मिलीं हैं। इस अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां कितना थिनर रखा होगा। इसके अलावा मिट्टी का तेल भी मिला है। जबकि नीचे बरामदे में गैस सिलेंडर भी रखे थे।

रात में ही पहुंची बहन
ब्रज मोहन की इकलौती बेटी सुनीता पति राजेंद्र के साथ बल्केश्वर में रहती है। उसको रात में जब घटना की जानकारी मिली तो वह तत्काल पति के साथ सेवला पहुंची। उसको आभास नहीं था कि इतनी बढ़ी घटना हो सकती थी। यही वजह थी कि वह बार-बार घर की तरफ टिकटिकी लगाकर देख रही थी। मानो उसे उम्मीद थी कि ऊपरी मंजिल से भाइयों की आवाज आएगी।

नए घर का सपना भी खाक
ब्रज मोहन के बढ़े पुत्र महेश ने घर में कम जगह के चलते पास में ही एक मकान छह माह पहले खरीदा था। उसका मकान बन कर तैयार हो गया था, लेकिन कनागत के कारण दशहरे पर गृह प्रवेश की तिथि रखी थी। लोगों के अनुसार जब किसी ने उससे शिफ्ट करने के लिए कहा तो वह कहता था कि धूमधाम से दशहरे पर गृह प्रवेश करेंगे।

आग की वजह के लग रहे कयास
मकान में आग लगने के कारणों पर कयास ही लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि रात में 12 बजे के करीब बिजली गई थी। हो सकता है कि मोमबत्ती जली छोड़ दी हो। इसके अलावा शार्ट सर्किट और गैस रिसाव से घटना होने की संभावना भी जताई जा रही है। एफएसओ रहमान का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। उसके बाद ही हकीकत सामने आएगी।

अग्निशमन के नियमों का नहीं दिया ध्यान
ब्रज मोहन को दो मंजिला मकान महज 50 गज में बना हुआ है। जगह कम होने की वजह से अग्निशमन नियमों का ध्यान नहीं दिया गया। ऊपर की मंजिल में दो कमरे हैं। इन दोनों कमरों के गेट पास ही हैं। जबकि सीढ़ियों तक आने के लिए बरामदा पार करना पड़ता है। जब आग लगी तो बरामद से नीचे उतरना संभव ही नहीं था। यही वजह थी कि पवन चाह कर भी सीढ़ियों से ऊपर नहीं जा सकता था। चूंकि आग बरामद में रखे थिनर में लग रही थी।
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