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झील के पानी ने पैदा किया खतरा

Agra Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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आगरा। सिंचाई विभाग द्वारा मथुरा रिफाइनरी को छोड़े जाने वाला पानी कीठम बर्ड सेंचुरी की झील के लिए अभिशाप बनता जा रहा है। भारी मात्रा में झील में पानी छोड़ने से आईलैंड्स (टीले) डूब गए हैं। इसके चलते पक्षियों के अंडे पानी में नष्ट हो गए। प्रवासी पक्षियों की नेस्टिंग भी प्रभावित हो रही है। इस संबंध में पर्यावरण मंत्रालय को शिकायत भेजी गई है। झील में ज्यादा पानी होने से प्रवासी पक्षियों में भी कमी आई है।
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दरअसल, लगातार पानी छोड़े जाने से झील में इस वक्त भी 22 फीट पानी है। इसके चलते झील में स्थित 12 मीटर चौड़े और दो मीटर तक ऊंचाई वाले कई आईलैंड्स (टीले) पानी में डूब गए हैं। समाजसेवी डा. डीके जोशी ने इस बाबत सुप्रीम कोर्ट, मुख्यमंत्री और पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखा है। इसमें उल्लेख किया है कि पानी छोड़े जाने से वन्य जीव जंतुओं की हत्या हो रही है। आईलैंड पर ही ग्राउंड बर्ड्स नेस्टिंग करती हैं। पानी ज्यादा होने पर टीले डूब जाते हैं। इससे पक्षियों के अंडे भी पानी में बहकर नष्ट हो जाते हैं।

गौरतलब है कि सूर सरोवर झील वर्ष 1922 में विकसित की गई। इसके पानी का उपयोग ग्रामीणों के पीने के लिए, सिंचाई के लिए और फिर उद्योगों को देने के निर्देश थे। इसके बाद भी सिंचाई विभाग प्रतिवर्ष मथुरा रिफाइनरी को पानी देता है। डा. जोशी का कहना कि जब यमुना में दस फीट पानी होता है, तब झील में पांच फीट का स्तर रहता है। लेकिन रिफाइनरी को पानी छोड़ने पर झील लबालब हो जाती है। इससे झील के किनारे प्रवास करने वाले पक्षियों की नेस्टिंग नष्ट हो जाती है।

प्रवासी पक्षियों के आगमन में देरी
कीठम पक्षी विहार में हर साल सैकड़ों प्रवासी पक्षी आते हैं। इस दफा अक्टूबर के मध्य में भी इक्का-दुक्का ही प्रवासी पक्षी देखे जा रहे हैं। वाइल्ड लाइफ के विशेषज्ञों की मानें तो इसके पीछे भी झील में पानी का अधिक होना है। हालांकि, अभी नवंबर तक पक्षियों का आगमन होगा।

झील में पानी छोड़ने से जलस्तर बढ़ जाता है। इससे आईलैंड्स पर अंडे देने वाले पक्षियों को परेशानी आती है। इस दफा भी प्रवासी पक्षी कम आए हैं। ऐसा तब होता है, जबकि सिंचाई विभाग अचानक पानी छोड़ता है। इससे किनारों पर रहने वाले कछुए भी प्रभावित होते हैं। इस संबंध में कार्रवाई के लिए लिखा गया है।
एस. बनर्जी, उप वन संरक्षण, राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी

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