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नए रूप में होगी रेलवे की रामलीला

Agra Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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आगरा। इस साल ‘रेलवे की रामलीला’ के नाम से मशहूर लीला का नया रूप लोगों को देखने मिलेगा। धनुष टूटने की आवाज हो या तलवारों की खन-खन सारे इफैक्ट आधुनिक तकनीकी के जरिए दर्शकों तक पहुंचाए जाएंगे। 14 अक्तूबर को मंच पूजन होगा, जबकि 16 से रामलीला शुरू होगी।
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रेलवे की रामलीला का इतिहास 40 साल पुराना है। कर्मचारियों और उनके बच्चों सहित करीब 100 कलाकार इसमें अभिनय करेंगे। इस बार लीला के मंचन में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जाएगा।

रामलीला के निदेशक हुकुम सिंह और रावण का किरदार निभाने वाले मनोज सिंह ने बताया कि लीला के आयोजन में होने वाला खर्चा चंदे से जुटाया जाता है। कम पड़ने पर रेलवे संस्थान के कोष से दिया जाता है। कलाकारों को संस्थान सर्टिफिकेट देता है।


600 पेज की है स्क्रिप्ट
इस साल रामलीला की स्क्रिप्ट 600 पेज की है। करीब 800 श्लोक रावण के हैं, तो 1200 से ऊपर श्रीराम के। कुल मिलाकर कथा में सात से आठ हजार संवाद बोले जाएंगे।

इस साल बजट का संकट
इस बार रामलीला के लिए करीब 10 हजार ही चंदा हो सका है। सूत्रों ने बताया फंड की स्थिति विगत तीन सालों से बिगड़ी है। इससे पहले काफी चंदा होता था। सांस्कृतिक कार्यक्रम होने के बाद भी रामलीला रेलवे के लिए सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम हैं। जानकार बताते हैं कि यदि इसे सांस्कृति कार्यक्रम घोषित करते हैं, तो संस्कृति बोर्ड की तरह इस पर भी पैसा खर्च करना पड़ेगा।


सिर्फ आगरा में होती है रामलीला
उत्तर मध्य रेलवे में आगरा मंडल ही ऐसा है, जहां रेलवे संस्थान रामलीला का मंचन करता है। जबकि इलाहाबाद जैसा मंडल भी रामलीला से उपेक्षित है।

धार्मिक भावनाओं पर सवाल
रेलवे के निदेशक के तौर पर आगरा मंडल में निजामुद्दीन की तैनाती है। विगत वर्षों से वह रामलीला में भाग लेते आए हैं। ऐसे में उनके समुदाय के लोग ही उनका विरोध करते हैं। इस पर भी वहा काम पूरी शिद्दत से करते हैं।

समर्पित हैं बच्चे
मेघनाथ का रोल कर रहे मुकुल कुमार सक्सेना बीटेक की पढ़ाई करने के बाद एक कालेज में शिक्षक हैं। उनका कहना था कि वह इस संस्कृति को आगे बढ़ाना चाहते हैं। सीता का रोल 13 साल का कृष्णा निभा रहा है। लक्ष्मण के रोल में कैप्टन अरमान, तो श्रीराम का रोल अजीत सिंह निभा रहे हैं। वह इस साल जनकपुरी के कोरियोग्राफर भी हैं।

ये हैं मुख्य बिंदु
- आय का साधन न होने से दिन प्रतिदिन घट रही, कलाकारों की रुचि
- नौकरी के बेहतर अवसर और शिक्षा के कारण नहीं आ रहे नए कलाकार
- 30 से 40 बच्चों को बनाया जाएगा वानर
- इस बार फ्लैश बैक से शुरू की जाएगी लीला

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