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अब नहीं हो सकेगी खाद की कालाबाजारी

Agra Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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आगरा। सहकारी समितियों से खाद की कालाबाजारी अब नहीं हो सकेगी। जिले में समितियों के स्तर तक खाद वितरण को ‘फर्टिलाइजर मॉनीटरिंग सिस्टम’ से लैस किए जाने की योजना बन रही है। इसके जरिए न सिर्फ खाद की कुल उपलब्धता का पता चलेगा, बल्कि वितरण पर पारदर्शी होगा। अनुमान के मुताबिक हर माह खाद की कालाबाजारी की सैकड़ों शिकायतें कृषि अधिकारियों के पास आती हैं।
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खेती में फर्टिलाइजर के बढ़ते उपयोग के कारण खाद की कालाबाजारी बड़ी समस्या बनती जा रही है। समितियों पर खाद आवंटित होने के साथ ही खाद माफिया सक्रिय हो जाते हैं, इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। सब्सिडी पर खाद न मिलने की वजह से ब्लैक में खरीदनी पड़ती है। जिले के अमूमन हर ब्लाक का यही हाल है। कालाबाजारी को रोकने संबंधी मोबाइल तकनीक पर आधारित पायलट प्रोजेक्ट के लिए आगरा का चयन किया गया है। इसके तहत ‘फर्टीलाइजर मॉनीटरिंग सिस्टम’ से समितियों पर खाद की उलब्धता, मांग और वितरण का आंकड़ा पलभर में पता चल सकेगा। सभी लोगों को नियमित रूप से अपडेट अधिकारियों को देनी होगी।


बांट दिए हैं मोबाइल
एआर कोऑपरेटिव कृपाशंकर यादव ने बताया कि जिले में 100 सहकारी समितियां हैं। सभी को मोबाइल नंबर वितरित कर दिया गया है। सॉफ्टवेयर अपडेट करने का काम चल रहा है। अपडेशन के बाद कागजी काम से मोहलत तो मिलेगी ही, साथ ही हेर-फेर की संभावना खत्म हो जाएगी।

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