अनुबंधित बस मालिकों का हो रहा उत्पीड़न

Agra Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
आगरा। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की उदासीनता से अनुबंधित बस मालिकों को घाटे का सामना करना पड़ रहा है। यह जानकारी शुक्रवार को अनुबंधित बस ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने पत्रकार वार्ता में दी।
उन्होंने बताया कि आगरा परिक्षेत्र में दिसंबर-2011 तक मात्र 40-50 बसों का संचालन होता था, लेकिन अब करीब डेढ़ सौ बसें चलती हैं। डीजल के दाम बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन टिकट मूल्य और मेंटीनेंस पहले जितना ही है। न तो आरएम नीरज सक्सेना मिलते हैं और न ही परिवहन मंत्री। क्षेत्रीय प्रबंधक से लेकर एमडी तक शिकायत हो चुकी है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। विकास सिंह बताते हैं कि सितंबर 2011 में रोडवेज को 2.44 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, लेकिन अनुबंधित बसों ने 20 लाख मुनाफे में चलीं। परिवहन निगम की मदद करने के लिए अनुबंध किया जाता है, लेकिन बस स्टैंड पर बस खड़ी करने के लिए हमसे फीस ली जाती है। रोडवेज कर्मचारियों को बस रूट पर चलवाने के लिए पैसे देने पड़ते हैं। कुल मिलाकर बस स्वामियों को आठ रुपया प्रति किलोमीटर का घाटा हो रहा है। इसे देखते हुए कुछ लोगों ने अनुबंध खत्म करने को आवेदन भी कर दिया है। पत्रकार वार्ता के दौरान उपाध्यक्ष विशाल चौधरी, सचिव मोहम्मद इशरार खान, कमल किशोर गोयल, नवल किशोर गोयल और राजीव गोयल मौजूद रहे।

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