15 करोड़ का गुटखा कारोबार होगा प्रभावित

Agra Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
जीस्ट:
गुटखा पर प्रतिबंध के फैसले से इसका नशा करने वालों और उत्पादकों को तगड़ा झटका लगा है, लेकिन लाखों-करोड़ों लोगों की सेहत की अनदेखी भी नहीं की जानी चाहिए। गुटखा का दुष्परिणाम जगजाहिर है। प्रतिबंध स्वागत योग्य है, लेकिन इससे उद्योग बन चुके गुटखा सेक्टर का कल कैसा होगा, अमित सिंह की रिपोर्ट यही जानने की कोशिश करती है।

आगरा। लोगों के स्वास्थ्य को लेकर सजग हुई सरकार अब राजस्व का घाटा उठाने को भी तैयार है। इसलिए एक अप्रैल, 2013 से सूबे में गुटखा पर प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि प्रतिबंध लगाने से राजस्व की हानि के साथ ही जिले के व्यापारियों को भी मोटा नुकसान होगा। आसपास के जिलों का कारोबार भी प्रभावित होगा।
गुटखा प्रतिबंध के आदेश लागू होने की घोषणा के बाद कारोबारी और इससे जुड़े कर्मचारियों ने दूसरा विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है। जिले में ही कई गुटखा इकाई बड़े पैमाने पर गुटखे का निर्माण करती हैं, जिसमें से कई नामी ब्रांडों समेत कुल आधा दर्जन कंपनियां शामिल हैं। एक गुटखा कंपनी के मालिक कमल केसरवानी का कहना है कि जिले में हर माह कुल 12 से 15 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। प्रतिबंध लगने के बाद हर महीने करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपये सेल टैक्स और दो से ढाई करोड़ रुपये सेंट्रल एक्साइज समेत पांच करोड़ रुपये का राजस्व का घाटा होगा। गुटखा से संबंधित कारोबार करने वाले ट्रांसपोर्टर नरेश वर्मा ने कहा कि कर्नाटक से रोजाना पांच करोड़ रुपये की सुपाड़ी मंगाई जाती है, जिसका उपयोग गुटखा और पान मसाला में बड़ी मात्रा में किया जाता है। इसके अलावा यहां से कानपुर, हाथरस, मथुरा को भी सुपाड़ी भेजी जाती है। कानपुर गुटखा का बड़ा सेंटर है। प्रतिबंध लगने के बाद आस-पास के जिलों में भी कारोबार प्रभावित होगा।
गुटखा मालिक डबी सरीन ने कहा कि प्रतिबंध लगने से लाखों लोग बेरोजगार होंगे। पान मसाला का कारोबार करने वाले बाबी भाई का कहना है कि सरकार के फैसले से एक लाख से अधिक लोगों का रोजगार छिनेगा।
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अब कैंसर से बच सकेंगे परिवार
गुटखा प्रतिबंध करने के आदेश को सुनकर जिले के परिवारों में खुशी है। विजय नगर निवासी सुरेश का कहना है कि अब लोग तंबाकू से होने वाली गंभीर बीमारियों से निजात पा सकेंगे। गुटखा खाने की लत पड़ चुकी लोगों में भी खुशी है कि अब उनका नशा आसानी से छूट जाएगा। खंदारी निवासी अजय अग्रवाल का कहना है कि वे पिछले कई साल से गुटखा छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अब उनका कहना है कि जब उन्हें गुटखा मिलेगा नहीं, तो वह खाएंगे कैसे। इसी तरह सभी परिवारों में सरकार के फैसले का जोरदार स्वागत हो रहा है।

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देश में कैंसर से हर आठ मिनट में एक मौत
मुंह का कैंसर - 65 प्रतिशत कैंसर रोगियों में
गुटखा और तंबाकू से होने वाला मुंह का कैंसर- 85 प्रतिशत
एसएन में गुटखा और तंबाकू के सेवन से मुंह के कैंसर के मरीज - 450 (प्रतिवर्ष)


मुंह के कैंसर में 85 प्रतिशत मरीजों में गुटखा और तंबाकू का सेवन पाया गया है। समय से इलाज न होेने पर ऐसे मरीजों की मौत भी हो रही है।
डा. सुरभि गुप्ता, कैंसर विशेषज्ञ, एसएन मेडिकल कालेज

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