शक्ति भवन की रिपोर्ट दरकिनार कर टोरंट से करार

Agra Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
आगरा। टोरंट पावर लिमिटेड से करार के कारण होने वाला घाटा नहीं होता अगर शक्ति भवन की रिपोर्ट नजर अंदाज नहीं की जाती। शक्ति भवन के अधिशाषी अभियंता ने करार से पहले बरती गई अनियमितता और होने वाले घाटे की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक को सौंप दी थी। रिपोर्ट को न केवल दरकिनार किया गया बल्कि उच्चाधिकारियों ने नाराजगी भी जाहिर की। रिपोर्ट में कानपुर और आगरा में इनपुट बेस्ड फ्रेंचाइजी के रूप में किए करार से करीब 17 हजार करोड़ रुपए के घाटे की आशंका जताई थी।
इनपुट बेस्ड फ्रेंचाइजी देने के पहले पावर कारपोरेशन ने अधिकारियों से सुझाव मांगे थे। शक्ति भवन (लखनऊ) के वाणिज्य स्कंध के अधिशाषी अभियंता यतेंद्र पाल सिंह ने अपनी रिपोर्ट दी। इसमें हा गया कि टोरंट पावर के साथ कानपुर और आगरा के लिए जिन स्थितियों में करार हुआ उससे बीस सालों में राज्य सरकार और कारपोरेशन को करीब 17 हजार करोड़ का घाटा होगा। यतेंद्र पाल सिंह ने आपत्ति लगाई थी कि आगरा में एवरेज बिलिंग रेट 2.82 रुपए दिखाया गया, जबकि उन्हीं दक्षिणांचल द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार ही एवरेज बिलिंग रेट 4.01 रुपए प्रति यूनिट आ रहा है। कानपुर में भी एवरेज बिलिंग रेट 3.55 रुपए प्रति यूनिट दर्शाया गया है, जबकि केस्को द्वारा दिए गए आंकड़े में यह 4.32 रुपए प्रति यूनिट आ रहा है। ऐसे में कानपुर में 5454 करोड़ और आगरा में कंपनी को अपरोक्ष रूप से 5746 करोड़ का नुकसान हो रहा है। मामले में मुख्यमंत्री को शिकायत करने वाले आगरा मंडल व्यापार संगठन के अध्यक्ष गोविंद अग्रवाल और दुर्गविजय सिंह भैया का कहना है कि कंपनी से करार करने से पहले आपत्तियों का निस्तारण नहीं किया गया। वहीं अन्य कई अनियमितताएं हुई हैं। ऐसे में करार खारिज किया जाना चाहिए।

बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा कंपनी
कारपोरेशन द्वारा बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा कंपनी के खाते में जाएगा। वार्षिक राजस्व आवश्यकता के अनुसार कारपोरेशन जितना टैरिफ बढ़ाएगा कानपुर में उसका 55 फीसदी और आगरा में 61 फीसदी कंपनी के खाते में जाएगा। कारपोरेशन घाटा बढ़ने पर टैरिफ बढ़ाएगा, लेकिन उसका अधिक लाभ कंपनी को मिलेगा।

‘अयोग्य’ को बनाया सलाहकार
रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि ‘अयोग्य’ फर्म का सलाहकार बनाकर करार किया गया। कारपोरेशन ने फ्रेंचाइजी देने के लिए सलाहकार कंपनी नियुक्त करने के लिए दस इमपैनल्ड कंपनियों से टेंडर मांगे थे। पांच में से केवल एक निविदा डियोलाइट टच तोहमत्सू ही पैनल के अनुसार थी। शेष चार निविदाओं में मे. फीडबैक वेंचर्स कंसोर्टियम पार्टनर कंपोजिशन में अंतर होने के कारण पैनल के अनुरूप नहीं पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार तीसरी न्यूनतम निविदादाता कंपनी और उस पर अवैध टेंडर के कारण इसे खारिज कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन उसे सलाहकार बना दिया गया। डियोलाइट का टेंडर इसलिए खारिज किया कि उसने काम पूरा करने के लिए नौ माह का समय मांगा था। वहीं फीडबैक वेंचर ने एक माह में करने का टेंडर दिया और फिर कारपोरेशन ने दो बार समय बढ़ाया। एक महीने में तय किया काम 14 महीने में पूरा हो सका।

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