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न सड़कें समंदर होंगी, ना घर में सैलाब

Agra Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
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नीरज शर्मा
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आगरा। ना सड़कें समंदर होंगी ना घरों में सैलाब, ना बारिश में कमर तक पानी में डूब कर चलने की मजबूरी और ना गाड़ी में धक्का लगाने की। निचले इलाके में घर लेने के लिए कोई कोसेगा भी नहीं। मूसलाधार बारिश में भी सूरसदन तिराहा, चर्च रोड, एमजी रोड पर आप फर्राटा भरते हुए नजर आएंगे। यह संभव होगा जल निगम और नगर निगम के संयुक्त प्रयास से। निचले इलाकों में भी बारिश अभिशाप नहीं बनेगी। शहर को जलभराव से मुुक्ति दिलाने को नया ड्रेनेज सिस्टम बन रहा है। जल निगम ने इसके लिए 1814 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की है। योजना में पुराने नालों में व्यापक सुधार के साथ नए नालों का निर्माण भी शामिल है।
मूसलाधार बारिश क्या थोड़ी तेज बारिश में ही शहर तालाब में तब्दील हो जाता है। सड़कें समंदर बन जाती हैं। घर में सैलाब सा आ जाता है। पिछले कई वर्षों से यह समस्या ज्यों की त्यों है। जल निगम ने इस समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए करीब 1814 करोड़ रुपये का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की है। इसमें शहर की पूरी ड्रेनेज व्यवस्था को नए सिरे गढ़ा जाएगा। डीपीआर तैयार करने में शहर के वर्तमान हालात और भौगोलिक स्थिति का सर्वे किया गया है। इसके तहत पुलिया क्रास, नए नाले बनेंगे। पुरानी ड्रेनेज लाइनों की मरम्मत की जाएगी। जरूरत के अनुसार नालों को छोटा बड़ा, जाली या ग्रिल लगाने जैसे काम भी होंगे।

योजना में शहर के वर्तमान ड्रेनेज सिस्टम को माडीफाई किया जाएगा। जल निगम ने इस काम के लिए अंतिम तिथि 2015 रखी है। यदि डीपीआर शासन से मंजूर हो जाती है तो शहर को काफी हद तक राहत मिलेगी। योजना की डीपीआर नगर निगम को भेज दी गई है।
एके सक्सेना
महाप्रबंधक, यमुना एक्शन प्लान शाखा

यूं होता है जल भराव
शहर में जल भराव के कई कारण है। भौगोलिक स्थिति के कारण निचले इलाकों में थोड़ी बारिश के दौरान पानी भर जाता है। शहर के कुछ हिस्से काफी ऊंचाई पर बसे हैं। कई इलाके काफी नीचे। शहर में नाले और सीवर कई स्थानों पर एक हो गए हैं। तमाम जगह सीवर को नाले में पंचर कर दिया है। नालों पर अतिक्रमण और नालों में कूड़ा डालने की परंपरा ने शहर का बंटाधार कर दिया है।
प्रमुख सचिव को प्रजेंटेशन
शहर के ड्रेनेज प्लान की डीपीआर का प्रजेंटेशन जल निगम के अधिकारी शहरी विकास मंत्रालय के सचिव सुधीर कृष्णा और प्रमुख सचिव नगर विकास उत्तर प्रदेश प्रवीर कुमार के समक्ष दे चुके हैं। दोनों ही अधिकारियों ने इस योजना पर सकारात्मक रुख दिखाया है। इस योजना को जेनर्म फेस दो या शासन स्तर से पास कराने की संभावनाएं हैं।

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