जन्म की घड़ी आई, आज जन्मेंगे कन्हाई

Agra Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
आगरा। कान्हा के जन्म की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आ रही भक्तों का उल्लास बढ़ता जा रहा है। भक्ति के रंग में रंगा शहर कन्हाई के दर्शन का इंतजार कर रहा है। आज रात ठीक 12 बजे घंटे-घड़ियालों की गूंज के बीच कान्हा जन्म लेंगे। शहर के सभी प्रमुख राधा-कृष्ण मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया गया है। घरों में भी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
कृष्ण भक्ति में डूबे शहरवासी कृष्ण जन्मोत्सव को लेकर उत्साहित दिखाई दे रहे हैं। पिछले एक सप्ताह से तैयारियां की जा रही हैं। मंदिरों में साज-सज्जा का काम लगभग पूरा हो चुका है। वहीं अन्य प्रमुख जगह लगने वाली झांकियों को सजाने की तैयारी भी पूरी कर ली गई है। गुरुवार रात ठीक 12 बजे कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। घंटे-घड़ियालों की गूंज के बीच महिलाएं मंगलगीत गाएंगी। घरों में भी इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विजय नगर स्थित राधा-कृष्ण मंदिर के महंत पंडित सदाशिव ने बताया कि मंदिर पूरी तरह कन्हैया के जन्मोत्सव के लिए सजाए जा चुके हैं।

शहर के प्रमुख मंदिर
राधा कृष्ण मंदिर, शहजादी मंडी।
राधा कृष्ण मंदिर, विजय नगर कालोनी।
राधा कृष्ण मंदिर, नामनेर।
राधा कृष्ण मंदिर, नेहरू नगर।
राधा कृष्ण मंदिर, लायर्स कालोनी।
श्याम जी का मंदिर, बिजली घर।

ऐसे करें पूजा
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि जन्माष्टमी पर प्रात:काल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के व्रत का संकल्प लें। घर में पुष्प, अशोक के पत्ते और फूलों के गुलदस्ते से घर और मंदिर की सजावट करें। रात्रि में सबसे पहले खीरे को काटकर छोटे से लड्डू गोपाल को उसमें बिठा दें। उसके बाद पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं और नए वस्त्रों, आभूषणों से श्रंगार करें। चंदन, केशर और चावल से तिलक करें। बैंगनी और पीले फूलों की माला से कन्हैया सजाएं। ये फूल लड्डू गोपाल के प्रिय हैं। तत्पश्चात धूप, दीप और अगरबत्ती से आरती कर मंगलगान गाएं। फिर भगवान को खरबूजे की मींग, छुआरे, किसमिस और मखाने से बनी बर्फी या पाग का भोग लगाएं। गोले की बर्फी के साथ पांच फलों को चढ़ाएं। तदोपरांत इलाइची और तांबूल का भोग लगाकर आरती उतारें और मंगलगीत गाएं।

इस मंत्र का जाप करें
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ‘ओउम नमो भगवते वासुदेवाय नम:, श्रीकृष्णायै नम: श्रीपुरुष शूक्त।’ मंत्र का पाठ करना चाहिए। इस मंत्र से जीवन का अर्थ सिद्ध होता है और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

क्या है व्रत का महत्व
संस्कृत मनीषी चंदन लाला पराशार ने बताया कि व्रत से दीक्षा प्राप्त होती है। दीक्षा से दक्षिणा से प्राप्त होती है। दक्षिणा से श्रद्धा प्राप्त होती है और श्रद्धा से सत्य प्राप्त होता है। सत्य और सद्गुणों की प्राप्ति ही व्रत है। किसी भी गुण को संकल्प के रूप में ग्रहण करना, अच्छे कर्मों का संकल्प लेना, जीवन का सिद्ध समझना और कन्हैया के मानवीय गुणों को जीवन में ढालना ही जन्माष्टमी के व्रत का महत्व है।

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