गांव चलो का संदेश दे गए गडकरी

Agra Updated Tue, 07 Aug 2012 12:00 PM IST
आगरा। भाजपा केलिए उत्तर प्रदेश निकाय चुनावों में मिली सफलता, विधान सभा चुनावों में मिली हार पर मरहम लगाने का काम रही है। इसी मरहम से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने यूपी के भाजपाइयों को खड़ा करते हुए गांवों की ओर रुख करने का संदेश दिया। सोमवार को उन्होंने भाजपा की कार्य योजना बैठक के समापन सत्र को संबोधित किया।
दो दिवसीय कार्य योजना बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं ने उत्तर प्रदेश में मजबूत सांगठनिक ढांचे पर तो बल दिया ही, साथ ही गांवों में पार्टी के जनाधार बढ़ाने पर चिंतन और मनन हुआ। फिलहाल एक बार फिर महंगाई, भ्रष्टाचार पर यूपीए की विफलता का हवाला देते हुए भाजपाइयों में जान फूंकने की कोशिश की गई। सोमवार को भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने भी केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि देश में सब कुछ है। आर्थिक, सामाजिक और कृषि विकास नीति पर केंद्र सरकार को विफल बताया और आतंकवाद, बांग्लादेशी घुसपैठ, महंगाई और भ्रष्टाचार का मुद्दे उठाते हुए कहा सरकार फेल हो चुकी है। लोकसभा के लिए आप लोग कमर कस लें। उन्होंने तमिलनाडु, आंध्र, राजस्थान और यूपी का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस की हालत पतली है। राजस्थान से हम आश्वस्त है, यूपी संभालना है। आंध्र में हमें फायदा मिलेगा। इस तरह भाजपा को राजनीतिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया। लेकिन उन्होंन ेउत्तर प्रदेश में नेताओं को गुटबाजी खत्म करने की हिदायत भी दी।
मंथन बैठक के बाद भाजपा प्रदेश प्रवक्ता हरद्वार दुबे ने कहा कि मंथन बैठक काफी सफल रही प्रतिनिधियों उत्साह के साथ लौटे। गांव में किसानों के बीच जनाधार बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की गई। बैठक में आए सुझावों के अध्ययन के बाद एक महीने में कार्य योजना तैयार को अंतिम रूप दिया जाएगा। समापन अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत किया। राष्ट्रीय महामंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने योजना बैठक की रिपोर्ट प्रस्तुत की। अंत में आगरा के सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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गायब रहा हिंदुत्व और राममंदिर का मुद्दा
आगरा। हिंदुत्व और राम मंदिर के नाम पर सत्ता सुख भोग चुकी भाजपा अब इस मुद्दे को छूने से कतरा रही है। ये अलग बात है कि अलग-अलग बयानों में नेता इसे राष्ट्रीय मुद्दा बताते हैं। लेकिन पार्टी जनता के बीच इस मुद्दे को लेकर जाने के बजाय पार्टी एंटी एनकंबैसी फैक्टर के सहारे दिल्ली में अपना भविष्य देख रही है। इसीलिए सरकार की विफलताओं की गिनाने की ही कोशिश की जा रही है।

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