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रक्षाबंधन ने रुला दिए थे चंबल के बागी

Agra Updated Thu, 02 Aug 2012 12:00 PM IST
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बाह। बारूद उगल रही बागियों की बंदूकों ने चंबल के बीहड़ के अमन-चैन को आग लगा दी थी। 1960 में संत ‘विनोबा’ ने पिनाहट से बागियों के हृदय परिवर्तन को पद यात्रा शुरू की। कदौरा तक पहुंचते-पहुंचते 19 बागियों ने उनके सामने हथियार डाल दिए। जेल जाने से पहले कांता बहन ने टीका किया। हरिविलास बहन ने संत विनोबा और मेजर जनरल यदुनाथ सिंह की मौजूदगी में बागियों की कलाई पर राखी बांधी। उस वक्त बागियों की आंखों में आंसू छलक पडे़। जेल की सलाखोें के भीतर तक धर्म की बहनों की डोर बंधी रही। चंबल के अमन चैन को फिश्र् से आग लगी है। इतिहास की रक्षाबंधन की घटना के साथ संत विनोबा फिर से याद आ रहे हैं।
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12 मई 1960 को पिनाहट से संत ‘विनोबा’ मेजर जनरल यदुनाथ सिंह के साथ बागियों को मुख्य धारा में शामिल कराने े लिए पद यात्रा पर निकले थे। 13 मई को मुरैना के रछैड़, 14 मई को अंबाह, 16 मई को पोरसा, 17 को नगरा, 18 को कनैरा, 19 को कदौरा में पदयात्रा का पड़ाव रहा। यहां पर मान सिंह रूप गिरोह के 19 बागियों ने संत विनोबा के समक्ष हथियार डाल दिए। 22 मई को जेल जाने से पहले संत विनोबा और मेजर जनरल यदुनाथ सिंह की मौजूदगी में प्रार्थना सभा का आयोजन किया। रक्षाबंधन का पर्व था, बागियों लोकमन दीक्षित, तेज सिंह, भगवान सिंह, भूपा सिंह, कन्हई, बदन सिंह, पातीराम, विद्याराम, डरेलाल, मटरे, जंगजीत, रामसनेही, दुर्जन, श्रीकृष्ण, लक्ष्क्षी, मोहरमन, करन सिंह, रामदयाल, प्रभु को एक-एक कर कांता बहन ने माथे पर टीका किया और हरिविलास बहन ने राखी बांधी। यह पल बेहद बेहद भावुक था। मेजर जनरल उन्हें जेल पहुंचाने गए तो कांता और हरिविलास भी उनके साथ थीं। चंबल के इस इतिहास को करीब से देखने वाले रामकिशन गुप्ता ने कहा कि जेल की सलाखोें के भीतर तक धर्म के भाई-बहनों के रक्षाबंधन की डोर मजबूत रही। चंबल के अमन चैन को डकैतों ने फिर से आग लगा दी है। बीहड़ के डकैतों ने आगरा, मथरा, अलीगढ़, फरोजाबाद, इटावा, धौलपुर, मुरैना, ग्वालियर आदि शहरों में अपने पैर जमा लिए हैं। दहशत भरे दौर में एक और विनोबा की जरूरत है, जो आज के डकैतों को राखी के धर्म की याद दिला सके।

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