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न डॉक्टर, न दवाएं, बदहाल हुईं स्वास्थ्य सेवाएं

Agra Bureau Updated Wed, 12 Sep 2018 10:58 PM IST
न डॉक्टर, न दवाएं, बदहाल हुईं स्वास्थ्य सेवाएं
न डॉक्टर, न दवाएं, बदहाल हुईं स्वास्थ्य सेवाएं - फोटो : अमर उजाला
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मैनपुरी। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। यहां एक तरफ जहां दवाइयों की कमी बड़ी परेशानी बनी हुई है। वहीं, डॉक्टरों की कमी से भी जनपद के लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों के 187 में से 115 पद रिक्त चल रहे हैं।
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जिले में पिछले दो महीने से संक्रामक बीमारियां हावी हैं। आए दिन बुखार, डायरिया और सांस की दिक्कत के चलते मरीजों की मौत हो रही है। पिछले 12 दिन में केवल जिला अस्पताल में ही नौ मरीजों की संक्रामक बीमारियों से मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। यदि समय रहते संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए उचित उपाय नहीं किए गए तो आगे बड़ी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र किशनी
यहां प्रतिदिन 200 से 250 मरीज पहुंचते हैं। यहां विशेषज्ञ डॉक्टर के चार में से सभी चार पद रिक्त चल रहे हैं। यहां उपचार के नाम पर केवल खाना पूर्ति के लिए कोट्रीमोक्साजोल उपलब्ध है। एंटीबायोटिक इंजेक्शन में सिर्फ जेंटामायसिन उपलब्ध है। इसके अलावा कोई इंजेक्शन नहीं है। सीएचसी पर एक्सरे मशीन व अल्ट्रासाउंड मशीन न होने के कारण मरीजों को 36 किलोमीटर दूरी तय कर जिला अस्पताल में अपना इलाज कराना पड़ रहा है। यहां मरीजों को भर्ती करने के बाद एक या दो घंटे बाद या तो घर भेज दिया जाता है या फिर उच्च अस्पताल के लिए रेफर। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉक्टर शंभू सिंह अधिकारियों के दबाव में यही कहते हैं कि दवाइयों की कोई कमी नहीं है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करहल
यहां प्रतिदिन 300 से 350 मरीज पहुंचते हैं। यहां भी उपचार के नाम पर खानापूर्ति होती है। महिला चिकित्सक के रूप में डॉ. तृप्ति दुबे के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अभिषेक यादव की तैनाती है। यहां उपचार की तो बात छोड़ो साफ-सफाई का भी अच्छा प्रबंध नहीं है। यहां चारों तरफ गंदगी के ढेर दिखाई देते हैं। यहां कुल चार एमबीबीएस डॉक्टर तथा दो संविदा डॉक्टरों की भी तैनाती है लेकिन यहां से भी मरीजों को एक-दो घंटे बाद ही रेफर कर दिया जाता है। अधिकारियों का इतना दबाव है कि कोई डॉक्टर दवाओं की कमी होने के बाद भी दवा कम होने की बात नहीं कहता है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेवर
यहां प्रतिदिन 200 से 250 मरीज पहुंचते हैं। सात पदों के सापेक्ष मात्र दो डॉक्टरों की तैनाती है। महिला चिकित्सक के पद पर संविदा चिकित्सक की तैनाती है। जो अधिक समय अपने नर्सिंग होम में देतीं हैं। यहां एंटीबायोटिक तथा पीसीएम कम मात्रा में दी जाती हैं। इससे मरीजों को उनकी बीमारी के अनुरूप दवाएं उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। स्थानीय लोगों ने कई बार अस्पताल में चिकित्सक तैनाती की मांग कर व्यवस्थाएं दुरुस्त किए जाने की मांग की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। यहां मरीज को भर्ती करने के साथ ही रेफर स्लिप थमा दी जाती है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र औंछा
क्षेत्र में संक्रामक बीमारियां हावी हैं। प्रतिदिन 120 से 150 मरीज यहां पहुंचते हैं। मरीजों के लिए बेड तक की उचित व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में डाक्टर पवन कुमार चिकित्साधीक्षक के रूप में तैनात हैं। यहां दो अन्य डॉक्टरों की भी तैनाती है डा. राजदीप, डा. राहुल आनंद एक महीने से अस्पताल में नहीं आ रहे हैं। इससे यहां आने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्राथमिक उपचार के बाद मरीज को रेफर कर दिया जाता है।

जनपद में डॉक्टरों की स्थिति एक नजर में
अस्पताल का प्रकार स्वीकृत पद कार्यरत रिक्त पद
सीएचसी और पीएचसी 133 53 80
जिला अस्पताल 28 13 15
जिला महिला अस्पताल 80 03 05
100 शैय्या अस्पताल 18 03 15
कुल डॉक्टरों के पद 187 72 115

डॉक्टरों की कमी को लेकर कई बार उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया गया है। दवाइयों की कमी को दूर करने के हर संभव प्रयास जारी हैं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। जिन दवाइयों की आवश्यकता है उन्हें मंगाया जा रहा है।
डॉ. एके पांडेय सीएमओ

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