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मेगा इंफ्राबिल्ड को आवास विकास का नोटिस

Lucknow Updated Wed, 13 Feb 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। हाईकोर्ट से राहत पाने के बाद आवास विकास परिषद ने पार्टनरशिप विवाद में फंसे वृंदावन योजना के एक बड़े प्लॉट का आवंटन निरस्त करने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए विकासकर्ता कंपनी को नोटिस जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि 15 दिन के भीतर इस प्लॉट की जो भी राशि बकाया है, उसका भुगतान कर दिया जाए अन्यथा आयुक्त की अनुमति से आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा। इस प्लॉट के मेगा इंफ्राबिल्ट और महामाया इंफ्राबिल्ट पार्टनर हैं। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने शुक्रवार को अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग करने पर महामाया इंफ्राबिल्ट प्रा.लि. पर दो लाख रुपए का हर्जाना ठोंका था, जबकि आवास विकास परिषद को जमीन का आवंटन रद्द करने की छूट दी थी।
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मेगा इंफ्राबिल्ट ने लिया था प्लॉट ः रायबरेली रोड पर वृंदावन योजना में मेगा इंफ्राबिल्ट प्रा.लि. ने 13,175 वर्ग मीटर का एक प्लॉट लिया था। बाद में उसने इसमें अपनी साझीदार कंपनी महामाया को भी शामिल कर लिया। कुछ दिनों बाद दोनों कंपनियों में विवाद हो गया और महामाया कोर्ट चली गई। महामाया इंफ्राबिल्ट ने अपनी याचिका में आवास विकास परिषद को भी पार्टी बनाया। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए आवास विकास परिषद को आवंटन रद्द करने और नए टेंडर आमंत्रित करने के लिए विज्ञापन जारी करने की छूट दी थी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह विवाद दो कंपनियों, याची और मेसर्स मेगा इंफ्राबिल्ड प्रा.लि. के बीच है। ऐसे में यह याचिका दायर किया जाना कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने कहा कि अलॉटी कंपनियों द्वारा अब भी एक करोड़ रुपए से अधिक की लायबिलिटी अदा की जानी है। लिहाजा यह जमीन के आवंटन की शर्त का उल्लंघन है।


महामाया को पहले पार्टनर बनाया फिर हटाने की अपील की ः संपत्ति अधिकारी आरके गौड़ के मुताबिक, कंपनी पर जो भी बकाया है, उसका भुगतान मांगा जा रहा है। इसके लिए 15 दिन का समय दिया गया है। इस दौरान अगर करीब एक करोड़ रुपए की यह राशि अदा नहीं की गई तो निरस्तीकरण का अंतिम नोटिस जारी कर दिया जाएगा। गौड़ ने कहा कि यह भूमि मेगा इंफ्राबिल्ट को आवंटित की गई थी। मेगा की ओर से फिर आवेदन किया गया कि महामाया इंफ्राबिल्ट को भी इसमें शामिल कर लिया जाए। इस प्रक्रिया की फीस लेकर पार्टनर को आवंटन में जोड़ लिया गया। बाद में मेगा की ओर से कहा गया कि महामाया को बतौर पार्टनर हटा दिया जाए। यह संभव नहीं था। इसके लिए दोनों पार्टनर की मंजूरी जरूरी थी। साझेदारी के इस विवाद में परिषद को बेवजह खींचा गया, इसलिए हम इस पूरे प्रकरण से छुटकारा चाहते हैं। 15 दिन में परिषद को उसका धन दिया जाए अन्यथा आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा।

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