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अवार्डशीट न रोलनंबर, कैसे भेजें छात्रों के नंबर

Lucknow Updated Mon, 11 Feb 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। यूपी बोर्ड में सतत एवं समग्र मूल्यांकन (सीसीई) की प्रक्रिया दूसरे सत्र में भी पटरी पर नहीं आ सकी है। आंतरिक परीक्षाएं तो किसी तरह से समय से निपट गइ लेकिन अभी तक राजधानी के स्कूलों को बोर्र्डं से न तो अवार्डशीट मिल सकी है और न ही नामावली। ऐसे में छात्रों के सीसीई के अंक बोर्ड को कैसे भेजे जाएं यह स्कूलों के समझ में नहीं आ रहा है। दूसरी ओर नामावली न मिलने के चलते उसकी गलतियां दुरुस्त होने की संभावनाएं भी घटती जा रही हैं। ऐसे में राजधानी में परीक्षा देने वाली दसवीं के लगभग 60 हजार विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट मंडराता नजर आ रहा है।
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यूपी बोर्ड में हाईस्कूल की परीक्षा में आंतरिक मूल्यांकन लागू किए जाने के पीछे जिम्मेदारों के दो तर्क थे। पहला कि इससे नियमित मूल्यांकन एवं अध्ययन से छात्रों में गुणात्मक सुधार होगा और दूसरा यूपी बोर्ड का दसवीं का रिजल्ट भी इससे बेहतर होगा। आंकड़ों में रिजल्ट इस प्रयोग के बाद सुधरा भी लेकिन गुणात्मक सुधार के दावे फिलहाल धराशाई हो गए। स्कूलों ने इस परीक्षा प्रणाली को गंभीरता को लेकर भी सवाल खड़ा कर दिया। प्रोजेक्ट वर्क या प्रैक्टिकल फाइल की मानीटरिंग की बोर्ड ने कोई व्यवस्था ही नहीं की। ऐसे में वास्तव में प्रोजेक्ट हुए या कागजों पर केवल नंबर ही चढ़े यह परखना मुश्किल है। पिछले साल शिक्षक संघ की हेल्पलाइन में सिलेबस से ज्यादा सवाल छात्रों ने सीसीई की वसूली पर उठाए थे। फिलहाल किसी तरह परीक्षा हो भी गई तो अब इसके अंक बोर्ड को भेजे जाने की प्रक्रिया फंस गई है। बोर्ड की ओर से अभी तक स्कूलों को अंक भेजने के लिए न तो अवार्डशीट उपलब्ध कराई गई है और न ही कोई प्रोफार्मा। राजधानी में दसवीं की परीक्षा के लिए पंजीकृत लगभग 60 हजार छात्रों का रोलनंबर भी अभी तक स्कूलों को नहीं पहुंचा है। ऐसे में इनके अंकों का विवरण किस आधार पर भेजा जाए स्कूलों को इस सवाल के जवाब का इंतजार है।


नामावली की गलतियां छात्रों पर पड़ेगी भारी
स्कूलों को उनके यहां दसवीं में पंजीकृत छात्रों की बोर्ड द्वारा जारी नामावली उपलब्ध कराई जाती है जिसमें रोलनंबर सहित छात्रों के अन्य विवरण उपलब्ध होते हैं। स्कूल इनका विवरण जांच कर और नामावली की त्रुटियों का संशोधन करके डीआईओएस कार्यालय को उपलब्ध कराते हैं जिससे कमियां सुधार ली जाए और छात्रों की मार्कशीट में गलतियां न हो। राजधानी में स्कूलों को फरवरी के पहले सप्ताह में ही दसवीं की नामावली मिल जानी चाहिए थी और दूसरे सप्ताह तक करेक्शन के साथ उसे बोर्ड भेज दिया जाना था। लेकिन स्कूलों का इंतजार अभी जारी है। अमीनाबाद इंटर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जेपी मिश्रा कहते हैं कि नामावली में अक्सर गंभीर त्रुटियां देखने को मिलती हैं। अक्सर स्कूलों द्वारा भेजे गए संशोधित विवरण भी बोर्ड को शिक्षा विभाग द्वारा समय से नहीं भेजे जाते हैं। इसके चलते छात्रों की मार्कशीट में भारी तादात में गड़बड़ियों की शिकायतें आती हैं। छात्रों को बोर्ड कार्यालय तक दौड़ लगानी पड़ती है और वह मानसिक एवं आर्थिक शोषण का शिकार होते हैं। समस्या यह है कि बोर्ड परीक्षा में एक महीने का ही समय बचा है। अभी तक नामावली मिली नहीं है। शिक्षक जल्द ही बोर्ड परीक्षा की तैयारियों में जुट जाएंगे। ऐसे में देरी के चलते नामावली का परीक्षण भी प्रभावित होगा और रोलनंबर के अभाव में नंबर भेजने की प्रक्रिया में भी देरी होगी।

यह है आंतरिक मूल्यांकन में अंकों का बंटवारा
- 70 अंकों की हाईस्कूल परीक्षा, 30 अंक का आंतरिक मूल्यांकन
- भाषा में लेखन, वाचन व व्याकरण के होंगे 10-10 अंक
- अगस्त, अक्टूबर और दिसंबर माह में परीक्षाएं
अन्य विषयों में 15 अंक के प्रैक्टिकल व 15 अंक के प्रोजेक्ट

कोट्स
अभी तक बोर्ड ने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को ही नामावली नहीं भेजी है। जैसे ही नामावली मिलेगी उसे स्कूलों को उपलब्ध करा दिया जाएगा। हालांकि बोर्ड परीक्षा एवं परिणाम आने तक बोर्ड के पास भेजे गए संशोधनों को ठीक करने का पर्याप्त समय होता है।
- उमेश त्रिपाठी, जिला विद्यालय निरीक्षक, लखनऊ

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