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मोहनलालगंज में बाघ की दहशत

Lucknow Updated Sun, 10 Feb 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। राजधानी में एक साल बाद फिर बाघ की दहशत है। शहर से लगभग 30 किमी दूर मोहनलालगंज इलाके में शनिवार सुबह लोगों ने खेत व नजदीक के जंगलों में किसी बड़े वन्यजीव के पगचिह्न देखे और वन विभाग को सूचना दी। जानकारी पर पहुंची वन विभाग की टीम ने सर्च ऑपरेशन चलाया और पगचिह्नों के आधार पर क्षेत्र में तेंदुए जैसे बड़े वन्यजीव के होने की आशंका जताई है। हालांकि बाघ की मौजूदगी से इन्कार किया है। मोहनलालगंज के दहियर गांव निवासी मोहित अपने खेत के साथ-साथ आसपास के खेतों की भी रखवाली करते हैं। शनिवार सुबह खेतों में उन्हें किसी वन्यजीव के पगचिह्न दिखाई दिए। उन्होंने इसकी जानकारी पिता लालबिहारी को दी। बात फैलने पर अन्य ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए और आगे जाकर देखा तो चकमार्ग से लगे सैकड़ों एकड़ खेतों में वैसे ही पगचिह्न दिखाई दिए। इसके बाद दहशतजदा ग्रामीणों ने वनविभाग को जानकारी दी। क्षेत्र में तेंदुए-बाघ की आशंका के बावजूद महज डंडों के साथ पहुंचे वनकर्मियों ने खेतों और जंगलों का मुआयना किया और ग्रामीणों को सावधानी बरतने की बात कहकर लौट गए। इस दौरान डिप्टी रेंजर केके सिंह ने कुछेक नमूनों को मापने के साथ उनकी तस्वीरें भी खीचीं।
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एक कुंतल से अधिक वजनी है जीव ः डिप्टी रेंजर केके सिंह ने बताया कि पगमार्क तेंदुए जैसे किसी वजनी वन्यजीव के लग रहे हैं, जिसका कि वजन सवा कुंतल से अधिक का है। उधर, मौके पर गए बिना ही रेंजर आरबी सिंह ने क्षेत्र में किसी हिंसक वन्यजीव की मौजूदगी से इन्कार किया है।

दो वर्गकिमी क्षेत्रफल में मिले निशान ः सर्च ऑपरेशन के दौरान टीम को दहियर गांव से लगभग 400 मीटर की दूरी पर खेतों के साथ आसपास के जंगलों में भी पगचिह्न मिले। कई खेतों में दो प्रकार के पगचिह्न थे, जिनमें से कुछ लकड़बग्घे जैसे और अधिकतर बड़े वन्यजीव से मिल रहे हैं। इसके बाद वनकर्मियों ने भारी भरकम नर तेंदुए के होने की आशंका जताई है।
बढ़ी दहशत, होती रही चर्चा ः दहियर इलाके में बाघ-तेंदुए को लेकर दिनभर चर्चा होती रही। वन विभाग की टीम के किसी निष्कर्ष पर न पहुंचने से अफवाहों को और बल मिला। टीम के जाने के बाद बाजारों और गांवों में लोग झुंड बनाए हुए दिखे। हालांकि शाम के साथ ही चहलकदमी कम हो गई और लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकले। इंद्रजीत खेड़ा, गनेशखेड़ा, पूरनपुर, शिवडेरा गांवों में भी सन्नाटा छा गया। लोगों ने अपने मवेशियों को भी घरों के अंदर बांधा।
पिछले साल भी आया था बाघ ः जनवरी 2012 की शुरूआत में भी मलिहाबाद के रहमानखेड़ा में एक वयस्क नर बाघ आ पहुंचा था। बाघ खीरी से भटक कर यहां सर्दियों में पहुंचा था। 20 शिकार डकारने के दौरान तब बाघ को यहां 111वें दिन तीन हथनियों की टीम ने ट्रैंकुलाइज कर वापस दुधवा भेज दिया था। बाघ को तब रेडियो कालर बांधा गया था, लेकिन कुछ दिनों बाद ही बाघ विभाग केराडार से गायब हो गया। बाघ का नाम लोगों ने बादशाह रखा था।

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