बैंड प्रदर्शन पर तालियों से गूंजी पुलिस लाइंस

Lucknow Updated Wed, 30 Jan 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। बिगुलर्स ने तूर्यनाद के साथ राज्यपाल का स्वागत किया। इसी तरह मुख्यमंत्री की भी आमद हुई। इसके बाद तेज चाल, धीमी चाल, रील, हिम मैलाडी आदि स्टाइल में पाइप्स एवं ड्रम्स बैंड, पीएसी ब्रॉस बैंड और मिलिट्री बैंड ने सधी धुनों का मन मोहक प्रदर्शन किया। पीएसी बैंड ने ‘कदम-कदम बढ़ाए जा..., ताकत वतन की हमसे है...’ जैसे देश भक्ति के गीतों की धुनों का प्रदर्शन किया तो पुलिस लाइंस परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। राज्यपाल बीएल जोशी, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, पुलिस-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों व जनसमूह की उपस्थिति में मंगलवार शाम परंपरागत तरीके से परिसमाप्ति समारोह (बीटिंग दि रिट्रीट) संपन्न हो गया। समारोह के अंत में राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने गणतंत्र दिवस परेड के पुरस्कार वितरित किए। बीटिंग दि रिट्रीट का मुख्य आकर्षण सेना व पीएसी की बैंड प्रस्तुतियां रही, जिसे देखने के लिए सैकड़ों लोग पुलिस लाइंस मैदान की दर्शक दीर्घा में जमा हुए थे। कार्यक्रम के दौरान उद्घोषक पीके तिवारी ने समारोह के आयोजन से परिचित कराया। ठीक सूर्यास्त के समय राष्ट्रगान के साथ समारोह संपन्न होने की घोषणा की गई। पहले राज्यपाल और फिर मुख्यमंत्री ने वहां से प्रस्थान किया। इससे पूर्व राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने बीट्रिंग दि रिट्रीट में शामिल सेना, अर्द्ध सैनिक बल, पीएसी की टुकड़ियों के साथ गणतंत्र दिवस परेड का नेतृत्व करने वाले आसाम रेजीमेंट के कर्नल करनदीप सिंह तुलसी, मेजर आरसी थापा, सहायक सेनानायक सौरभ कुमार, रजनीश लांबा, उपनिरीक्षक हितेश्री चौधरी, सुनील घुमान, गरिमा पाठक, सुभांशु तिवारी, श्रीमती पुष्पलता अग्रवाल, सुधीर राय, मुक्ति मुखर्जी को पुरस्कृत किया। बीटिंग दि रीट्रिट में बेहतर प्रदर्शन के लिए सुबेदार मेजर परशुराम राई, सूबेदार रमेश सिंह, सूबेदार आरए शेख, सूबेदार मेजर पाल सिंह, हवलदार मिलखराज, एचएल लियाना, हवलदार सेतन वंग्याल, सब इंस्पेक्टर गोरे सिंह गुरंग एवं उद्घोषक प्रेमकांत तिवारी को पुरस्कृत किया। इसके साथ परेड में प्रथम और द्वितीय स्थान पाने वाली विभागीय व स्कूली झांकियों, सांस्कृतिक दलों, मार्चपास्ट टुकड़ियों को शील्ड देकर पुरस्कृत किया गया। समारोह में मुख्य सचिव, डीजीपी, आईजी, डीआईजी, डीएम सहित शासन, प्रशासन, सेना व पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
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क्या है बीटिंग दि रिट्रीट ः यह प्रथा उस पुरातन काल से चली आ रही है जब सूर्यास्त होने पर युद्ध बंद कर दिया जाता था। बिगुल पर रिट्रीट की धुन सुनते ही योद्धा अपने शस्त्र समेट कर रण क्षेत्र से शिविरों में चले जाते थे। इसीलिए रिट्रीट वादन के समय स्थिर खड़े रहने की प्रथा चली आ रही है। नगाड़ा बजाना (ड्रम बीट्स) उस काल का प्रतीक है जब कस्बों एवं शहरों में रहने वाले सैनिकों को सायंकाल निश्चित समय पर अपने शिविरों में वापस बुला लिया जाता था। इन्हीं प्राचीन प्रथाओं के मेलजोल से वर्तमान परिसमाप्ति समारोह का जन्म हुआ।

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