संस्कृति विभाग इस बार फिर बाहर

Lucknow Published by: Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। गणतंत्र दिवस समारोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला संस्कृति विभाग अब इस समारोह में हाशिए पर आ चुका है। यह लगातार तीसरा वर्ष होगा जब विभाग की प्रस्तुतियां परेड में नहीं होंगी। इसके अलावा इस मौके पर विभाग के तत्वावधान में राजभवन में होने वाला कवि सम्मेलन भी नहीं होगा।
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संस्कृति विभाग के समन्वय में जुटने वाले प्रदेश के कलाकार गणतंत्र दिवस परेड का खास आकर्षण होते थे। इसके लिए कई दिनों तक अभ्यास भी कराया जाता था। परेड में बुंदेलखंड के कलाकार पाई डंडा और राई, पूर्वांचल के कलाकार धोबिया, ब्रज के कलाकार मयूर नृत्य और फूलों की होली का प्रदर्शन करते चलते थे। इसके लिए विभाग अलग से बजट भी रखता था। वर्ष 2011 में संस्कृति विभाग को तब अपनी प्रस्तुतियां देेने से मना कर दिया गया जब परेड की अवधि कम की जा रही थी। बसपा सरकार ने 2012 में भी यथावत स्थिति रखी। माना जा रहा था कि नई सरकार में परेड का पुराना स्वरूप लौटेगा और संस्कृति विभाग के समन्वय में कलाकार इसमें शामिल होंगे पर ऐसा नहीं हो सका।

दूसरी तरफ संस्कृति दिवस के तत्वावधान में गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजभवन में होने वाले कवि सम्मेलन एवं मुशायरे की परम्परा भी समाप्त होती जा रही है। नगर के कवियों, शायरों ने इसे शुरू करने के लिए राजभवन में ज्ञापन भी दिया था। बंद हो चली परंपरा को 2011 में बल तब मिला था जब राज्यपाल बीएल जोशी ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या 14 अगस्त 2011 पर कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया था। उसके बाद ये आयोजन नहीं हो सका।
अंग्रेजी प्रेम में बंद हुआ कवि सम्मेलन
जब टीवी राजेश्वर राज्यपाल बने तो उनके अंग्रेजी प्रेम और हिंदी में अरुचि का असर राजभवन में होने वाले कवि सम्मेलन और मुशायरे पर भी पड़ा। 15 अगस्त 2004 को संस्कृति विभाग ने उर्दू अकादमी के साथ राजभवन में मुशायरे का आयोजन किया पर फिर ये आयोजन राजभवन से बाहर हो गया। 2006 तक कभी गन्ना संस्थान तो कभी गांधी भवन में इसका अनियमित ढंग से आयोजन चला जो बाद में बंद ही हो गया।
गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने के लिए हमें काफी पहले ही सूचना मिल जाती थी लेकिन पिछली बार की तरह इस बार भी कोई सूचना नहीं मिली है।
- तरुण राज, कार्यक्रम समन्वयक, एसएनए

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