सत्यानंद-आर्यकुल कॉलेज को मिली मान्यता

Lucknow Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। फर्जीवाड़े के कारनामे गढ़ने के लिए चर्चा में रहे स्वतंत्र गर्ल्स डिग्री कॉलेज प्रबंधन को करारा झटका लगा है। लखनऊ विश्वविद्यालय कार्यपरिषद की शुक्रवार को हुई बैठक में कॉलेज को मान्यता देने से इनकार कर दिया है। पैनल निरीक्षण के दौरान कॉलेज में मानक अधूरे पाए जाने के चलते यह फैसला लिया गया है। हालांकि कॉलेज प्रशासन को दोबारा मानक पूरे करने के निर्देश दिए गए है। भविष्य में कॉलेज यदि मानक पूरे कर लेता है तो उसे मान्यता देने पर विचार किया जाएगा। हालांकि कार्यपरिषद ने दो अन्य कॉलेजों की मान्यता पर मुहर लगा दी है। इसमें सत्यानंद उच्च शिक्षा संस्थान और आर्यकुल कॉलेज ऑफ एजुकेशन शामिल है। सत्यानंद उच्च शिक्षा संस्थान में बीकॉम (ऑनर्स) और आर्यकुल कॉलेज ऑफ एजुकेशन में बीजेएमसी के स्ववित्तपोषित कोर्सेज के संचालन के लिए प्रस्ताव लाए गए थे। रजिस्ट्रार जेबी सिंह ने बताया कि यह दोनों कॉलेज शैक्षिक सत्र 2013-14 से कक्षाओं का संचालन कर सकते हैं। प्रशासनिक भवन में आयोजित कार्यपरिषद बैठक में शुक्रवार को कार्य सूची में शामिल 15 प्रस्तावों में स्वतंत्र गर्ल्स डिग्री कॉलेज की मान्यता का प्रकरण सबसे ऊपर रखा गया। रजिस्ट्रार जेबी सिंह के अनुसार बैठक में कॉलेज के निरीक्षण पर गए पैनल की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉलेज में अभी तक मानक पूरे नहीं किए जा सके हैं। इसके चलते कार्यपरिषद ने मान्यता देने से इनकार कर दिया। अगर कॉलेज मानक पूरे कर लेता है तो उसे दोबारा मान्यता देने पर विचार किया जा सकता है। गौरतलब है कि लविवि से संबद्ध स्वतंत्र गर्ल्स डिग्री कॉलेज एवं एसजी कॉलेज को मानकों के विपरीत संबद्धता दी गई थी। स्वतंत्र गर्ल्स कॉलेज को बिना मान्यता के कक्षाएं संचालित करने और एसजी गर्ल्स कॉलेज का कोई भौतिक अस्तित्व न होने के साथ ही फर्जी कागजातों के आधार पर मान्यता पाने का दोषी पाया गया था। जांच के बाद लखनऊ विवि ने मामले शासन को सौंप दिया था। इसके बाद शासन के आदेशों पर लविवि कार्यपरिषद ने सत्र 2011-12 से स्वतंत्र गर्ल्स कॉलेज एवं इसी से जुड़ी दूसरी संस्था एसजी डिग्री कॉलेज की मान्यता समाप्त कर दी थी। लेकिन हाईकोर्ट के आदेशों पर दोबारा मान्यता देने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके लिए विवि के एक निरीक्षण पैनल ने कॉलेज में मानकों की जांच की। हालांकि, मानकों पर खरा न उतरने के चलते मामला फिर लटक गया है।

डॉ. एसएन राय के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई ः कार्यपरिषद ने एक अन्य फैसले में सैन्य विभाग के प्रवक्ता डॉ. एसएन राय के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इन पर वर्ष 2009 में नियुक्ति में फर्जीवाड़ा करने के आरोप लगाए गए थे। डॉ. एसएन राय ने विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराई गई सूचनाओं में पीजी में 56.6 फीसदी अंक मिलने का दावा किया था। जबकि उनके अंक काफी कम थे। प्रकरण की जांच के लिए 2009 में डॉ. एसएन राय के खिलाफ अनुशासनिक समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने शुक्रवार को डॉ. एसएन राय के पक्ष में कार्यपरिषद में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई जिसे खारिज कर दिया गया। अब उनके खिलाफ कुलपति के स्तर से कार्रवाई होगी।

मेडल पर लगी मुहर ः प्रयागदत्त चतुर्वेदी स्वर्ण पदक की स्थापना पर कार्यपरिषद ने मुहर लगा दी है। यह पदक निरालानगर निवासी प्रयागदत्त चतुर्वेदी की ओर से बीए (ऑनर्स) और बीए परीक्षा में सर्वाधिक अंक पाने वाले छात्र-छात्राओं को दिए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। स्वर्ण पदक की स्थापना के लिए एक लाख रुपये प्रदान किए जाने है। बैठक में निर्देश कर जारी इस प्रकार के मेडल की संख्या में इजाफा करने और छात्र-छात्राओं के बीच समय पर वितरण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में शारीरिक शिक्षा विभाग की प्रवक्ता डॉ. शशी कनौजिया को कार्य परिषद की सदस्यता के लिए नामित करने के प्रस्ताव को भी किनारे कर दिया गया है।

कुलपति के जिम्मे दीक्षांत ः आगामी जनवरी में प्रस्तावित लविवि के दीक्षांत समारोह के कार्यक्रम और तिथि निधार्रण की जिम्मेदारी कुलपति को सौंप दी गई है। कुलपति समिति का गठन करके जल्द ही इसके संबंध में कार्यक्रम का घोषणा करेंगे।

कॉल्विन कॉलेज का फैसला 28 को ः इन अहम फैसलों के बची अगली कार्यपरिषद की बैठक की तिथि का भी निर्धारण कर दिया गया है। यह बैठक 28 जनवरी 2013 को आयोजित की जाएगी। इस बैठक में कॉल्विन ताल्लुकेदार्स कॉलेज प्रशासन की ओर से मौजूदा स्कूल परिसर में बीबीए व बीसीए पाठ्यक्रमों के संचालन के प्रस्ताव समेत करीब सात संस्थानों को मान्यता देने पर विचार किया जाएगा।

पांच शिक्षक स्थाई ः लखनऊ विवि के पांच शिक्षकों को स्थाई किए जाने के प्रस्ताव पर भी कार्यपरिषद ने अपनी मुहर लगा दी है। इनमें जंतु विज्ञान विभाग की डॉ. मोनिश बनर्जी, हिंदी विभाग की प्रवक्ता डॉ. ममता तिवारी, जंतु विज्ञान विभाग की प्रवक्ता डॉ. सुचिता स्वरूप व प्रवक्ता डॉ. आशीष कु मार के साथ अर्थशास्त्र विभाग के आचार्य डॉ. अनिल कुमार बाजपेई शामिल हैं। एक वर्ष का परिवीक्षाकाल पूर्ण करने के उपरांत इन शिक्षकों के संकायाध्यक्ष एवं संबंधित विभागाध्यक्षों की ओर से स्थाई किए जाने के संबंध में संस्तुति की गई थी।

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