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गोमती ग्रीन्स में इंटीग्रेटेड टाउनशिप के नाम पर आवेदकों से धोखाधड़ी

Lucknow Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST
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लखनऊ। गोमती नगर विस्तार के सेक्टर सात में गोमती ग्रीन्स के नाम से प्रस्तावित एक निजी बिल्डर की इंटीग्रेटेड टाउनशिप भी अब विवादों के घेरे में आ गई है। टाउनशिप के लिए अनिवार्य पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी के बिना ही निर्माणकर्ता मेसर्स ईमार एमजीएफ बिल्डर ने चार-पांच सौ आवेदकों को रिहायशी फ्लैट का सपना दिखा आवंटन किया था। फ्लैट की प्रस्तावित कीमतों की साठ फीसदी रकम भी आवेदकों से जमा करा ली गई है जबकि,स्तविकता यह है कि प्रस्तावित निर्माण स्थल पर एलडीए द्वारा स्वीकृत डीपीआर के तहत विकास के तय मानक तक अभी पूरे नहीं कराए गए हैं। अब नियम के इतर निर्धारित विकास व निर्माण कार्य शुरू कराए बिना आवंटियों से फ्लैट की तय कीमत की बकाया राशि जमा कराने अथवा भूखंड आवंटन निरस्त करने की चेतावनी दी जा रही है। प्रस्तावित गोमती ग्रीन्स में फ्लैट का आवेदन कर पैसा जमा कराने वाले ऐसे ही दर्जनों आवेदकों ने बिल्डर कंपनी की मनमानी के खिलाफ एलडीए प्रशासन से कार्रवाई की गुहार लगाई है। इसके बाद चेते एलडीए प्रशासन ने अब आरोपी बिल्डर कंपनी पर शिकंजा कसना शुरू किया है। एलडीए की तरफ से पूरे मामले की जांच शुरू कराते हुए आरोपी बिल्डर कंपनी से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
डीपीआर के शर्तों की अनदेखी ः मेसर्स ईमार एमजीएफ लैंड ने गोमती नगर विस्तार के सेक्टर सात में अमर शहीद पथ से सटे इलाके में गोमती ग्रीन्स के नाम से इंटीग्रेटेड टाउनशिप का डीपीआर एलडीए से 26 जून 2011 को पास कराया था। डीपीआर में तय मानकों के तहत बिल्डर कंपनी को सितंबर 2012 तक प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्र के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से स्वीकृत अनापत्ति प्रमाणपत्र के साथ ही सीवरेज सिस्टम का 50 फीसदी, ड्रेनेज सिस्टम का 40 प्रतिशत, सड़क निर्माण का 30 प्रतिशत और जलापूर्ति सिस्टम का 20 प्रतिशत डवलपमेंट कार्य पूरा कराना था। बिल्डर कंपनी ने तय मानकों की अनदेखी करते हुए न तो एलडीए को पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी दी और न ही तय मानक के तहत कोई विकास कार्य ही कराया है। एलडीए के अधिशासी अभियंता प्रो.यू. 3 (हाईटेक व इंटीग्रेटेड) ने पत्र संख्या 207/ईई/एचटीआईजी/ 2012 दिनांक 25 सितंबर 12 को तैयार रिपोर्ट में इसकी पुष्टि भी की है। इसमें साफ कहा गया है कि प्रस्तावित मे. ईमार एमडीएफ लैंड लिमिटेड की टाउनशिप गोमती ग्रीन्स के विकास कार्य की प्रगति के सापेक्ष अधिक भूखंडों की बुकिंग कर किस्तों का भुगतान प्राप्त किया जा रहा है।

काम कुछ नहीं, दबाव पूरी कीमत का ः प्रस्तावित टाउनशिप में आवेदन करने वाले हजरतगंज निवासी अजय कुमार सिंह ने बताया कि बिल्डर कंपनी ने उनके आवेदन पर 30 मई 2012 को यूनिट नंबर जीजीपी-एफ-एफ01-34 के तहत 239.2 स्क्वायर यार्ड सुपर एरिया वाले रिहायशी मकान की बुकिंग कर आवंटित की थी। अब प्रस्तावित क्षेत्र में बिना कोई निर्माण कार्य कराए ही 42.29 लाख की कीमत वाले उक्त फ्लैट की पूरी कीमत अदा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। टाउनशिप में पचास फीसदी निर्माण कार्य के बाद ही फ्लैट की बकाया राशि का भुगतान करने की बात पर बिल्डर कंपनी अब आवंटन निरस्त करने की चेतावनी देकर आवेदकों को परेशान कर रही है। अजय कुमार की तरह उक्त योजना में आवंटन पाने वाले दर्जनों आवेदकों ने इस संबंध में बिल्डर कंपनी के खिलाफ एलडीए उपाध्यक्ष व सचिव से अलग-अलग मिलकर शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायतों का करा रहे सत्यापन ः गोमती ग्रीन्स के नाम से सुल्तानपुर रोड पर प्रस्तावित मे. ईमार एमजीएफ लैंड लिमिटेड की इंटीग्रेटेड टाउनशिप के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की एनओसी अभी तक एलडीए को नहीं मिली है। यह एक गंभीर मामला है। निर्माणकर्ता बिल्डर कंपनी को नोटिस भेज स्पष्टीकरण तलब करते हुए स्वीकृत डीपीआर के तहत तय मियाद में निर्धारित विकास कार्य न कराने के बाद भी आवंटियों से फ्लैट की पूरी कीमत वसूले जाने की शिकायतों का सत्यापन करा जल्द ही कार्रवाई शुरू होगी।
एससी मिश्रा, मुख्य अभियंता एलडीए

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