सीएम और गवर्नर हाउस तक पहुंचा गुस्सा

Lucknow Updated Mon, 24 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। दल्ली में सामूहिक दुष्कर्म से उपजा आक्रोश रविवार को भी नहीं थमा। दोपहर होते ही समूहों में युवा मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर जमा हो गए। युवाओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। डीएम ने पुलिस की मदद से उन्हें खदेड़ने की कोशिश की तो कुछ युवतियों ने डीएम अनुराग यादव का हाथ पकड़ लिया और उन्हें धरना स्थल पर चलकर वार्ता करने को मजबूर कर दिया। धरनास्थल पर करीब तीन घंटे तक वार्ता चली। इस दौरान तय हुआ कि युवा एक समूह बनाएं और महिलाओं की सुरक्षा के लिए अपने सुझाव उन्हेें। उन्होंने मंगलवार से बदलाव दिखाई देने का आश्वासन दिया। इसके अलावा भी रविवार को कई धरने प्रदर्शन लखनऊ में हुए। प्रोटेस्ट मार्च का सिलसिला भी दिन भर चला। सीएम आवास पर हुए प्रदर्शन की रणनीति गांधी स्मारक से बनी। यहां कोहरे के बावजूद सुबह से ही प्रदर्शन के लिए लोग जमा होने शुरू हो गए थे, जिनमें युवाओं की अच्छी खासी तादात रही। विभिन्न संगठनों और संस्थाओं से भी लोग इसमें शामिल थे। यहां मोमबत्तियां जलाकर और बैनर-पोस्टरों के साथ नारेबाजी कर प्रदेश सरकार से दुराचारियों और महिलाओं से जुड़े अपराधों में कड़ी सजा के प्रावधान करने की मांग की गई। एक संगठन से आईं इंदु पांडेय का कहना था कि जब तक कानून सख्त नहीं होंगे और उनके अनुरूप सजा नहीं होगी तो भला कौन डरेगा। अपराधियों को ये लगता है कि वे राह चलती लड़की से छेड़छाड़ करके या उसका यौन उत्पीड़न करके भी छूट जाएंगे। यही वजह है कि दुस्साहस बढ़ रहा है, और लड़कियां अपने घरों में सीमित रह गई हैं। वहीं एबीवीपी ने केकेसी से रैली निकाली जो गांधी स्मारक पर समाप्त हुई। रूबल कुमार ने बताया कि रैली में आईटी कॉलेज की छात्राएं, कई सामाजिक संगठन और वॉलेंटियर शामिल हुए जो पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए कटिबद्ध हैं।
गांधी स्मारक से पहुंचे सीएम आवास ः गांधी स्मारक से कुछ समूह सीएम आवास पहुंचे। वे सीएम को ज्ञापन देने के लिए आवास परिसर में दाखिल हो गए और प्रदर्शन शुरू कर दिया। सुरक्षाकर्मियों को स्थिति हाथ से निकलती महसूस हुई तो उन्हाेंने उच्चाधिकारियों को सूचित किया। आनन-फानन में सीएम ओएसडी तक युवाओं का ज्ञापन पहुुंचाया गया और सीएम से मिलने की मांग के जवाब के लिए इंतजार करने को कहा गया। आवास में दाखिल हुए प्रदर्शनकारी जोरदार नारेबाजी करने लगे।
दरवाजे बंद किया फिर भी घुसे प्रदर्शनकारी ः इसी बीच कई और समूह भी आकर उनसे मिलने की कोशिश करने लगे। इन्हें रोकने के लिए सीएम आवास के सारे दरवाजे तुरंत बंद करवाए गए। मुख्य द्वार पर भीड़ जमा हो गई। पुलिस अधिकारियों ने तुरंत अतिरिक्त जाब्ता मंगवाया। धक्का-मुक्की और जोर आजमाइश के बाद बाहर खड़े युवा भी परिसर में दाखिल होने में सफल हो गए। सभी सीएम से मिलने की बात कहते हुए धरने पर बैठ गए। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें धरना स्थल पर जाने को कहा, लेकिन वे नहीं माने। ...और शुरू कर दिया खदेड़ना
काफी देर बाद डीएम अनुराग यादव मौके पर पहुंचे। फोन पर बात करने के बाद उन्हाेंने पुलिस को कुछ निर्देश दिए। जिसके बाद पुलिस ने धरने पर बैठे युवाओं खदेड़ना शुरू कर दिया। कुछ लोग नहीं उठ रहे थे, उन्हें पुलिसिया शैली में डांट-डपट से उठाया गया और धकियाते हुए सभी को परिसर से बाहर कर दिया गया। इस पूरी गहमागहमी के दौरान प्रदर्शनकारियों में शामिल छात्रा याशिका के पैर में चोट लगी, जिसे एसओ दिनेश यादव और कुछ विद्यार्थी सिविल अस्पताल ले गए और मरहम-पट्टी करवाई गई।
...और नहीं छोड़ा डीएम का हाथ ः बाहर जाते हुए युवाओं ने डीएम से सवाल किए कि रोजाना सड़कों पर छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं, आप कुछ नहीं करते, हमें प्रदर्शन भी नहीं करने देंगे। इस पर डीएम यादव ने उन्हें विधानसभा भवन के सामने धरना स्थल चलने को कहा, जहां वे उनसे वार्ता को राजी हुए। हालांकि युवाओं को इस पर विश्वास नहीं हुआ और लड़कियों ने डीएम के चारों ओर लगभग एक घेरा बनाते हुए उन्हें साथ चलने को कहा। मुख्यमंत्री आवास से धरना स्थल तक कई लड़कियां डीएम का हाथ पकड़े रहीं। वे पूरे समय हंसकर, झुंझलाकर, कहते रहे कि वे साथ चल रहे हैं, लेकिन युवाओं की जिद के आगे उनकी नहीं चली। धरना स्थल पर पहुंच युवाओं ने डीएम से लड़कियों को पेश आने वाली समस्याओं व अपराधों को बयां किया और उनसे जवाब मांगे।
‘बनाइए वॉलेंटियर्स की टीम, मेरे सहयोगी बनिए’ ः करीब तीन घंटे युवाओं और डीएम अनुराग यादव के बीच बातचीत होती रही। मैग्सेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडेय ने भी इस दौरान युवाओं को फांसी की सजा और अंग भंग जैसी सजाओं के क्या दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं युवाओं को समझाया। इस दौरान लड़कियों की सुरक्षा का सवाल उठा तो डीएम ने इसके लिए सभी से सहयोग मांगा। उन्होंने अपना मोबाइल नंबर 9415005000 और ईमेल एड्रेस anuragyadav2000@gmail.com सभी को देते हुए सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए सुझाव उन्हें ई-मेल करने को कहा। साथ ही कहा कि अगर पुलिस सहयोग नहीं करती तो उन्हें सूचित करें। वार्ता के दौरान कई छात्राओं ने बताया कि जब उनसे छेड़छाड़ होती है तो पुलिस चुपचाप देखती है, कई बार खुद पुलिस इसमें शामिल होती है। एक युवती ने कहा कि उसने लफंगे लड़कों के घर में घुसने की सूचना दी तो पुलिस 1 घंटे बाद आई। मुश्किल से उसने खुद को बचाया। इस पर डीएम ने आश्वासन दिया कि वे हालात को सुधारने के लिए पुलिस के उच्चाधिकारियों के साथ वार्ता कर रहे हैं, और लोगों को मंगलवार से बदलाव देखने को मिलेंगे।

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