डॉक्टर साथी मिले तो बीती दास्तां जुबां पे आई

Lucknow Updated Sun, 23 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। ‘अरे यार इसी टंकी के पीछे तू बैठा करता था उसके साथ’, ‘तू क्या कोई कम था, सबके सामने खुलेआम घूमता था रुचि के साथ’। हंसी- ठिठोली के बीच गलबहियां डाले केजीएमयू के पुराने छात्र रहे डॉक्टरों ने गुजरे जमाने की इस तरह की बातें साथियों संग साझा कीं। अपने परिवार के साथ देश-विदेश से आए डॉक्टरों ने ब्राउन हॉल में शनिवार को खूब एंजॉय किया। दोस्ती को यादगार बनाने के लिए ग्रुप फोटोग्राफी भी हुई। समारोह में स्टूडेंट लाइफ के दौरान झगड़ालू स्वभाव वाले डॉ. विजय कुमार के अब शांत प्रवृित्त के हो जाने पर डॉ. कौशर उस्मान ने कहा कि यह तो एकदम सुधर गया। डॉ. एमएल भार्गव ने कहा कि हमारा कॉलेज तो वैसा ही है बस वक्त बदल गया। इसके हर कोने से हमारी यादें जुड़ी हैं। ओल्ड परिसर में दिनेश व विवेक का चोरी अड्डा। हर जगह को एक नाम दिया गया था। आज उन्हें देख रहा हूं तो वही पुराने नाम याद आ रहे हैं। कार्यक्रम में एक-दूसरे के परिवारों का भी परिचय हुआ। उसके बाद ब्राउन हॉल के सामने पार्क में डॉक्टरों के परिवार पहुंच गए, जहां ग्रुप फोटोग्राफी का दौर शुरू हो गया। रात में ताज होटल में कार्यक्रम आयोजित हुआ, इसमें साथ खाना-पीना हुआ। रविवार को एमबी क्लब में फिर पुराने साथियों के परिवार एकत्र होंगे।
याद है-नोट्स देने से किया था मना ः स्कॉटलैंड से आईं डॉ. मनीषा ने अपने परिवार को अमेरिका से आए डॉ. विवेक त्यागी के परिवार से मिलाया। फिर शुरू हो गया यादें बांटने का दौर। डॉ. विवेक ने बताया कि नोट्स तैयार करने में मनीषा सबसे आगे थी। इसी के सहारे फर्स्ट इयर में बिना नोट्स बनाए काम चला। इस पर डॉ. मनीषा बोलीं- ‘अगले वर्ष भी तो तभी बनाए थे जब मैंने नोट्स देने से मना कर दिया’। डॉ. एमएल भार्गव ने बताया कि हमारे बैच में एमबीबीएस में 180 व डेंटल में 68 विद्यार्थी थे। यह सबसे बड़ा बैच था। हम लोगों की एकजुटता का ही उदाहरण है कि अधूरे कोर्स के कारण हमने एमबीबीएस प्रथम वर्ष की परीक्षा छोड़ दी थी। बाद में प्रशासन को दोबारा परीक्षा करानी पड़ी।
जनाब हम तो अब भी खुलेआम ही घूम रहे ः डॉ. संजय शेट्टी को पुरानी यादों में ले जाते हुए प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. विजय कुमार ने कहा कि रुचि के साथ तू तो खुलेआम परिसर में घूमता था। जरा भी परवाह नहीं करता था। इस पर डॉ. रुचि बोल उठीं, ‘जनाब हम तो अब भी खुलेआम ही घूमते हैं, आपकी पार्टनर नजर नहीं आ रहीं’। हंसी-ठिठोली के बीच छात्र जीवन की यादें ताजा करने की होड़ में किसी को वक्त की भी चिंता नहीं रही।
एक बैच में 9 जोड़े बंधे शादी के बंधन में ः 1987 बैच में नौ जोड़े शादी के बंधन में बंधे। इनमें डॉ. संजय शेट्टी और डॉ. रुचि शेट्टी के अलावा बड़ोदरा में सेल टैक्स कमिश्नर डॉ. आसिर त्यागी भी शामिल हैं, जिनकी शादी फाइनल ईयर में साथ पढ़ने वाली आई सर्जन डॉ. दीपाली से हो गई। अमेरिका से आए डॉ. विजय व डॉ. विनीता भी इनमें से ही हैं।
विदेश से आए दोस्तों से मिलने ः डॉ. आसिफ जा, डॉ. पंकज कौ यूके से और डॉ. हाफिज व डॉ. मनीषा शर्मा विदेश से अपने साथियों से मिलने आई। लोहिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. एमएल भार्गव ने ब्राउन हॉल में अपने पुराने साथियों को देखा तो खुशी से उछल पड़े। उन्होंने डॉ. विवेक त्यागी को देखते ही उन्हें गले से लगा लिया।
गुरुजनों को किया सम्मानित ः कार्यक्रम में डॉक्टरों ने पुराने साथियों से मिलने के साथ ही अपने गुरुजनों को बुलाकर उन्हें सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में डॉ. हलीम, डॉ. आरपी शाही और डॉ. पीके मिश्रा शामिल हैं।

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