मालती आदर्श बालिका विद्यालय की मान्यता होगी समाप्त

Lucknow Updated Wed, 19 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। बिना अनुमति विद्यालय स्थल परिवर्तन करने के मामले में मालती आदर्श बालिका विद्यालय की मान्यता समाप्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बेसिक शिक्षा परिषद को इस बाबत संस्तुति भेजी है। इससे पहले कमल जूनियर हाईस्कूल में भी ऐसा मामला सामने आया था। मालती आदर्श बालिका विद्यालय की स्थापना सआदतगंज के नूरबाड़ी क्षेत्र में करीब 50 साल पहले हुई थी। विद्यालय को बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से मान्यता के साथ ही सहायता भी मिली हुई है। जानकारों की मानें तो, स्कूल प्रबंधन ने स्थल परिवर्तन के लिए विभाग की अनुमति मांगी थी। हालांकि प्रबंधन के तर्क को अस्वीकार करते हुए शासन ने अनुमति देने से इन्कार कर दिया। इसके बावजूद एक जुलाई को विद्यालय को पारा में स्थानांतरित कर दिया गया। नियमत: सहायता प्राप्त विद्यालय के स्थल परिवर्तन के लिए शासन और बेसिक शिक्षा परिषद से अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य है। विशेष परिस्थितियों में इसकी अनुमति प्रदान की जा सकती है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सर्वदानंद के अनुसार विद्यालय प्रबंधन ने स्थानांतरण के संबंध में विभाग को कोई जानकारी नहीं दी। लिहाजा कमल जूनियर हाईस्कूल के साथ ही मालती आदर्श बालिका विद्यालय की मान्यता समाप्त करने और सहायता रोकने की संस्तुति की गई है।

...तो किराए की जमीन पर कैसे मिली मान्यता ः मालती आदर्श बालिका विद्यालय के प्रकरण ने विभागीय कार्यप्रणाली को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। प्रिंसिपल हेमलता गुप्ता का दावा है कि सआदतगंज में विद्यालय का संचालन किराए की जमीन पर किया जा रहा था। परेशानियों के चलते प्रबंधन ने पारा के कुमार पुरम में जमीन लेकर एक जुलाई को स्कूल का संचालन शुरू कि या। नियमत: किराए की जमीन पर संचालित विद्यालय को सहायता नहीं दी जा सकती। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि बिना शर्तों को पूरा किए इतने सालों से यह विद्यालय किस प्रकार बेसिक शिक्षा परिषद से सहायता लेता रहा?

करोड़ों की जमीन का है खेल! ः राजधानी में बेसिक शिक्षा परिषद से सहायता प्राप्त करीब 40 विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। इनमें से करीब आधा दर्जन विद्यालय प्रबंधनों की ओर से स्थल परिवर्तन के लिए या तो आवेदन किया जा चुका है या फिर आवेदन के लिए भाग-दौड़ शुरू है। स्थल परिवर्तन के पीछे विद्यालय प्रबंधन भले ही कोई भी कारण बता रहे हों, लेकिन जानकारों की मानें तो इन प्रबंधनों की नजर विद्यालयों की करोड़ों की जमीनों पर है। माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता डॉ.आरपी मिश्र कहते हैं कि सहायता प्राप्त विद्यालयों की जमीनों की वर्तमान कीमतें करोड़ों में हैं। ज्यादातर प्रबंधन या तो इसका सौदा कर चुके हैं या फिर करने की फिराक में हैं। चूंकि यह सहायता प्राप्त विद्यालय हैं तो इस सौदे में विभाग एक बहुत बड़ा रोड़ा है।

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