केंद्र सरकार को नहीं पता शहीदों की शहादत का दिन

Lucknow Updated Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। भारत सरकार को आजादी के लिए कुर्बानी देने वाले क्रांतिकारियों की शहादत का दिन नहीं पता। इसका खुलासा एक आरटीआई में दी गई जानकारियों से हुआ है। राजधानी के त्रिवेणीनगर के आरटीआई कार्यकर्त्ता जयराम दास रस्तोगी के सवालों के जवाब में केन्द्रीय सचिवालय ने बताया है कि काकोरी षड्यंत्र में शहीद राजेंद्र लाहिड़ी को 19 दिसंबर 1927 को इलाहाबाद के नैनी जेल में फांसी दी गई थी। जबकि, आरटीआई कार्यकर्त्ता का दावा है कि राजेंद्र लाहिड़ी को इस तिथि से दो दिन पहले यानी 17 दिसंबर 1927 को ही फांसी दी गई थी। जिसके साक्ष्य राजकीय अभिलेखागार, महानगर में मौजूद हैं।
जयराम दास रस्तोगी के अनुसार, केन्द्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन संचालित लोकसभा चैनल की ओर से 14 अक्टूबर को सुबह 10.30 से 11 बजे के बीच शहीद भगत सिंह के संबंध में प्रसारण किया गया था। जिसमें काकोरी षड्यंत्र के शहीद राजेन्द्र लाहिड़ी को सन 1931 में फांसी दिए जाने की सूचना प्रसारित की गई। इसी कार्यक्रम में शहीद चंद्रशेखर आजाद की मृत्यु सन 1930 में होना दिखाया गया था। सूचनाएं गलत होने का आभास होने पर उन्होंने 16 अक्टूबर को केन्द्रीय सचिवालय से आरटीआई के तहत कुछ जानकारियां मांगी।
इसमें उन्होंने चार सवाल उठाए। पहले दो सवालों के अंतर्गत उन्होेंने क्रमश: पूछा कि शहीद भगत सिंह ने जिस केन्द्रीय असेम्बली में बम फेंका था उस भवन का वर्तमान समय में क्या अस्तित्व है? साथ ही क्या शहीद भगत सिंह की स्मृति में कोई मुद्रा या डाक टिकट जारी किया गया है? आश्चर्य की बात है, केन्द्र सरकार को नहीं पता कि शहीद भगत सिंह ने जिस केन्द्रीय असेंबली में बम फेंका था वह वर्तमान में कहां है? जयराम दास रस्तोगी को दी गई जानकारी के मुताबिक, केन्द्रीय सचिवालय के पास इसकी कोई जानकारी न होने का उल्लेख किया गया है। उन्होंने सूचना के तहत डाक टिकट जारी होने संबंधी जानकारी दी है।
वहीं, जयराम दास ने अपने तीसरे सवाल में लोकसभा टीवी द्वारा राजेन्द्र लाहिड़ी को 1931 में फांसी दिए जाने के संबंध में किए गए प्रसारण का उल्लेख करते हुए पूछा कि लाहिड़ी को किस अभियोग में और किस तारीख को फांसी दी गई थी। जिसके उत्तर में केन्द्रीय सचिवालय ने प्रसारण में दिए गए तथ्यों को गलत माना है। साथ ही राजेन्द्र लाहिड़ी को काकोरी षड्यंत्र में शहीद रामप्रसाद बिस्मिल, शहीद अशफाक उल्ला खान और शहीद रोशन सिंह के साथ 19 दिसंबर 1927 को फांसी दिए जाने की जानकारी दी है। आरटीआई कार्यकर्त्ता का दावा है कि यह सूचना भी गलत है। उनकी मानें तो, राजेन्द्र लाहिड़ी को 17 दिसंबर 1927 को फांसी दी गई थी। जिसके साक्ष्य महानगर स्थित राजकीय अभिलेखागार में उपलब्ध हैं।
अपने चौथे और अंतिम सवाल में जयराम दास ने पूछा कि शहीद चंद्रशेखर आजाद की मृत्यु किन परिस्थितियों में कहां और किस तारीख में हुई? क्योंकि लोकसभा चैनल में आजाद का शहादत वर्ष 1930 बताया गया था। इसके उत्तर में केन्द्रीय सचिवालय ने चैनल पर प्रसारित वर्ष की जानकारी को गलत मानते हुए इसे दुरुस्त किए जाने का आश्वासन दिया है। साथ ही बताया है कि शहीद आजाद की शहादत 27 फरवरी 1931 को हुई थी। जयराम कहते हैं कि जब सरकार के स्तर पर ही शहीदों से जुटी जानकारियों में इस प्रकार की गलतियां होंगी तो आम जनता के लिए तो उन्हें याद रख पाना भी मुश्किल हो जाएगा।

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