बढ़ रहा है कैंसर, घट रहे हैं संसाधन

Lucknow Updated Sun, 16 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के रेडियोथेरेपी विभाग में इस साल अब तक कैंसर से पीड़ित 3200 मरीजों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। ये संख्या 2011 में 2800 थी। दो साल के इन आंकड़ों से ही पता चलता है कि कैंसर कितनी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। दूसरी ओर इलाज के लिए मशीनें और प्रशिक्षित लोगों की बेहद कमी है। ये बातें केजीएमयू के रेडियोथेरेपी विभाग के हेड प्रो. नसीम जमाल ने विभाग के 26वें स्थापना दिवस के मौके पर कहीं। प्रो. जमाल ने बताया कि देश में वर्तमान में 30 लाख कैंसर रोगी हैं। इनमें हर साल 10 लाख मरीजों की संख्या बढ़ रही है जबकि आठ लाख मरीज हर साल बीमारी के कारण दम तोड़ देते हैं। बीएलके सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रेडिएशन आंकोलॉजिस्ट और चेयरमैन डॉ. शैली हुक्कू और प्रो. जीएन अग्रवाल ने बताया कि विकासशील देशों में कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। हमारे देश में एक करोड़ की जनसंख्या पर कम से कम एक लीनियर एक्सीलिनिरेट मशीन चाहिए जो नहीं है। यही हाल मानव संसाधन का भी है। प्रो. हुक्कू ने बताया कि देश में 406 मेडिकल कॉलेज हैं लेकिन इनमें मात्र 154 एमडी की सीटें हैं। ये संख्या डीएनडी कोर्स को मिलाकर 200 हो रही है। इसी तरह मेडिकल फिजिसिस्ट और टेक्नीशियनों की कमी भी है। प्रो. हुक्कू ने कैंसर के इलाज के लिए आधारभूत ढांचे को बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। डॉ. राममनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के निदेशक प्रो. एमसी पंत ने बताया कि देश में 574 कोबाल्ट, ब्रेकी और लीनियर एक्सीलिनिरेटर हैं जबकि इस समय ये संख्या कम से कम 1200 होनी चाहिए। विकसित देशों के मानकों के अनुसार मशीनों की संख्या लगभग 5500 होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोबाल्ट थेरेपी आउटडेटेड हो रही है। इससे अच्छी कोशिकाएं भी रेडिएशन का शिकार हो जाती हैं जबकि लीनियर एक्सीलिनिरेटर से टारगेट थेरेपी दी जाती है। प्रो. पंत ने कहा कि नेशनल कैंसर कंट्रोल प्रोग्राम के तहत केंद्र सरकार ने 2600 करोड़ रुपए जारी किए हैं लेकिन इस बजट का इस्तेमाल बिना प्रशिक्षित मानव संसाधन के नहीं हो सकता।

प्रो. पंत से केजीएमयू वापस आने का आग्रह ः केजीएमयू के कुलपति प्रो. डीके गुप्ता ने इस मौके पर प्रो. एमसी पंत से केजीएमयू में वापस आने का आग्रह किया। कुलपति ने कहा कि केजीएमयू में लीनियर एक्सीलिनिरेटर लगाने के लिए मशीन सप्लाई करने वाली कंपनी कोशिश कर रही है जबकि ये कार्य विभाग के डॉक्टरों को करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि मशीन को लगाने के लिए पांच करोड़ रुपए मिल गए हैं। शताब्दी अस्पताल में बेसमेंट में इस मशीन की स्थापना की जाएगी। इस मौके पर उन्होंने केजीएमयू परिसर में फैली अव्यवस्थाओं पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि अस्पताल के मुख्य भवन में खाली पड़े ऑर्थोपैडिक विभाग के वार्ड में पैराप्लीजिया वार्ड को स्थानांतरित किया जाएगा। अभी ये वार्ड ईएनटी विभाग के पास है।

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