भुखमरी के शिकार मजदूर ने फंदा कसकर दे दी जान

Lucknow Updated Sun, 16 Dec 2012 05:30 AM IST
बख्शी का तालाब। गांव कठवारा में तंगहाली के चलते भुखमरी का शिकार बने एक मजदूर ने शनिवार सुबह पेड़ से फंदा कसकर खुदकुशी कर ली। अपने इलाज के लिए पट्टे की जमीन गिरवी रखने वाले मजदूर के घर में तीन दिन से चूल्हा नहीं जला था। बच्चों को भूख से बिलखते देख उसके सब्र का बांध टूट गया था। उधर, मजदूर के भुखमरी का शिकार होने से इन्कार कर रही पुलिस व प्रशासन ने खुदकुशी की वजह बीमारी व गृहकलह बताई है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पुलिस के मुताबिक, गांव कठवारा निवासी रामखेलावन रैदास (40) मजदूरी करके पत्नी रेखा, बेटे सचिन (8) व गोलू (4) का भरण-पोषण करता था। पिछले कुछ दिनों से वह टीबी और गले में गांठ की बीमारी से परेशान था। पति की मौत पर बिलख रही रेखा ने बताया कि तंगहाली के चलते उसका परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया। राशन न होने के कारण तीन दिन से घर में चूल्हा नहीं जला था। बच्चों का भूख से तड़पना रामखेलावन से देखा नहीं गया। तंगहाली से निपटने का कोई रास्ता नजर न आने पर उसने जान दे दी।
रेखा का कहना है कि 15 साल पहले रामखेलावन की मां को पट्टे की जमीन मिली थी। उसकी मौत के बाद पट्टा रामखेलावन के नाम हो गया। टीबी व गले की गांठ से पीड़ित रामखेलावन ने इलाज के लिए 20 हजार रुपये में जमीन गिरवी रखी और मजदूरी करके घर का खर्च चलाने लगा। तमाम रुपये खर्च करने के बाद भी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती गई। इस कारण दो हफ्ते से वह मजदूरी पर नहीं जा रहा था। तीन दिन पहले घर का सारा राशन खत्म हो गया। दंपती व दोनों बच्चे पानी पीकर दिन गुजार रहे थे। तंगहाली का शिकार रामखेलावन अपने बच्चों को भूख से बिलखते देख परेशान था। चारों लोग शुक्रवार रात पानी पीकर लेट गए। भूख के कारण नींद नहीं आई। सभी करवटें बदलते रहे। रामखेलावन शनिवार सुबह शौच के लिए घर से निकला और पेड़ से फंदा कसकर जान दे दी। पड़ोसी अनिल कुमार सिंह, रामप्रसाद, नंदालाल ने भी रामखेलावन की तंगहाली की बात स्वीकारी है।

किसी ने नहीं सुनी गुहार ः रेखा का कहना है कि रामखेलावन का नेत्रहीन पिता नन्हा अपने दूसरे बेटे कुन्हू के साथ अलग रहता है। बच्चों को भूख से तड़पते देख रामखेलावन ने पिता, भाई व गांव के अन्य लोगों के आगे हाथ फैलाए लेकिन किसी ने मदद नहीं की। बीपीएल व अंत्योदय राशन कार्ड के लिए उसने प्रधान से लेकर ब्लॉक व तहसील प्रशासन तक कई बार गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। रामखेलावन के पास स्मार्ट कार्ड भी था, लेकिन बीमारी के दौरान कई अस्पतालों के चक्कर लगाने के बावजूद इसका लाभ उसे नहीं मिल सका।
गृहकलह में की खुदकुशी ः एसओ विनोद कुमार मिश्र का कहना है कि रामखेलावन व उसके पिता नन्हा के बीच आए दिन कहासुनी होती थी। बीमारी व पिता से होने वाली लड़ाई से तंग आकर उसने फांसी लगा ली। रामखेलावन के परिवार में आर्थिक तंगी जैसी कोई हालत नहीं है। तहसीलदार राजेश श्रीवास्तव का भी यही कहना है कि मजदूर रामखेलावन ने भुखमरी व आर्थिक तंगी के चलते फांसी लगाकर आत्महत्या नहीं की है, बल्कि बीमारी व पारिवारिक विवाद के चलते फांसी लगा ली।

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