कपोल कल्पनाओं पर आधारित है बिग-बैंग थ्योरी

Lucknow Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। प्रख्यात खगोल वैज्ञानिक पद्मविभूषण प्रो. जयंत विष्णु नार्लीकर ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति से जुड़ी बिग बैंग थ्योरी को नकार दिया है। उनका कहना है कि यह सिद्धांत हकीकत पर कम और कल्पनाओं पर अधिक आधारित है। वैज्ञानिकों को बाकी विकल्पों एवं नए प्रयोगों की दिशा में काम करना चाहिए। भेड़ चाल की तरह अनुसरण करने से कोई फायदा नहीं है। प्रो. नार्लीकर शुक्रवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में हम अपने ब्रह्मांड को कितने अच्छी तरह से जानते हैं विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। शिक्षकों, वैज्ञानिकों एवं छात्र-छात्राओं से पूरी तरह भरे सभागार में प्रो. नार्लीकर ने ब्रह्मांड के रहस्य पर चर्चा करते हुए बिग बैंग सिद्धांत की पोल खोली। उन्होंने कहा कि आज ब्रह्मांड के फैलने को आधार बनाकर बहुत से आधुनिक लोग मानते हैं कि ब्रह्मांड का जन्म बिग बैंग यानी महाविस्फोट से हुआ था लेकिन यह पूर्ण सत्य नहीं है। बिग बैंग की व्याख्या किसी सिद्धांत से नहीं हो सकती है। यह वैज्ञानिक तर्कशास्त्र की कमजोरी है, जहां सारे तर्क एवं नियम समाप्त हो जाते हैं। ध्यान देने की बात यह है कि हमारे आधुनिक प्रयोग एवं प्रेक्षण हमें केवल एक अत्यधिक गर्म ब्रह्मांड की जानकारी देते हैं न कि सीधे-सीधे बिग-बैंग की। कपोल-कल्पनाओं का सहारा लेकर ऐसे विचार को विज्ञान की कसौटी पर खरा नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि हमें पूरी सच्चाई से वैकल्पिक सिद्धांतों की जांच पड़ताल करनी चाहिए। 1990 के दशक में फ्रेड हायल के साथ दिए गए अर्ध-स्थिर अवस्था मॉडल की चर्चा करते हुए नार्लीकर ने कहा कि ब्रह्मांड फैलने-सिकुड़ने की लंबी प्रक्रिया से गुजरता रहता है वैसे ही जैसे कि किसी घड़ी का पेंडुलम दोलन करता है। यह मॉडल प्रेक्षण के अनुरूप हैं और अन्य कई भविष्यवाणियां करता है।

विज्ञान को करना पड़ा संघर्ष ः प्रो. नार्लीकर ने कहा कि विज्ञान को भी स्वीकारे जाने के लिए कड़े संघर्ष करने पड़े हैं। भारत में आर्यभट्ट के सिद्धांतों की लोगों ने अनदेखी की और गैलीलियो को रोम की चर्च ने सजा दी। विज्ञान कथा लेखन के लिए भी जाने वाले नार्लीकर का कहना था कि माना जाता है कि सोलहवीं सदी में कॉपरनिकस ने बताया था कि पृथ्वी सूर्य के चारो ओर घूमती है। लेकिन इस तथ्य का खुलासा इससे दो हजार वर्ष पहले ही इटली के समोस कस्बे के रहने वाले अरिस्तार्कास ने कर दिया था। लेकिन यह बात अरस्तू जैसे ग्रीक दार्शनिक के प्रभाव के कारण दब गयी। क्योेंकि इन लोगों का मानना था कि पृथ्वी स्थिर है। इस अवसर पर उन्होंने छात्र-छात्राओं द्वारा पूछे गए अनेक सवालों के जवाब भी दिए। इससे पूर्व कुलपति जी. पटनायक ने प्रो. नार्लीकर के योगदानों पर विस्तृत प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. एमएम वर्मा का रहा।

फिजिक्स की परीक्षा स्थगित ः शुक्रवार को द्वितीय पाली में होने वाली एमएससी फर्स्ट सेमेस्टर फिजिक्स की परीक्षा व्याख्यान के चलते स्थगित कर दी गयी। परीक्षा नियंत्रक ने इस संदर्भ में विभाग को लिखा था। अब यह परीक्षा 24 दिसंबर को होगी।

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