कलेक्ट्रेट, रजिस्ट्री ऑफिस और तहसीलों में पड़े ताले

Lucknow Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। पदोन्नति में आरक्षण मामले में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ सरकारी कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार का राजधानी में शुक्रवार को व्यापक असर रहा। विभिन्न विभागों के मुख्यालय से लेकर जनपदीय कार्यालयों और तहसीलों तक में कामकाज नहीं हुआ। ज्यादातर कार्यालयों के कर्मचारियों ने सुबह हाजिरी लगाने के बाद कमरों में ताले डाल दिए। पदोन्नति में आरक्षण व्यवस्था लागू न करने संबंधी नारे लगाते हुए जुलूस भी निकाले गए। विरोधी गुट की ओर से कार्यालयों में ताला लगा देने से पदोन्नति में आरक्षण के समर्थक कर्मचारी चाहकर भी काम नहीं कर पाए। कलेक्ट्रेट, तहसील, निबंधन जैसे कार्यालय बंद होने से कई लोग परेशान हुए जबकि नगर निगम सहित कुछ कार्यालय में बंद का बिल्कुल असर नहीं रहा। हालांकि दोपहर बाद दोनों गुटों के कर्मचारी अपने-अपने घर चले गए।

कलेक्ट्रेट में सुबह ही पड़ गए ताले ः कलेक्ट्रेट में विरोध के चलते शुक्रवार को कोई काम नहीं हुआ। कर्मचारी सुबह समय पर ऑफिस पहुंचे और अपनी उपस्थिति दर्ज की। सवा दस बजे तक एडीएम, एसीएम, एसडीएम सदर, एएसडीएम सहित प्रशासन के अन्य अधिकारियों व अनुभाग कक्षों में पदोन्नति में आरक्षण का विरोध करने वालों ने ताले डाल दिए। सभी अधिकारियों की कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई के लिए लगे मुकदमों में सामूहिक रूप से तारीख बढ़ाने की नोटिस लगा दी गई। सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के बैनर तले आरक्षण विरोधी कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट में जुलूस निकालकर नारेबाजी भी की।

सैकड़ों रजिस्ट्री पर भारी पड़ी हड़ताल ः हड़ताल के चलते शुक्रवार को सैकड़ों लोगों की रजिस्ट्री नहीं हो पाई। कलेक्ट्रेट की तरह शहर का निबंधन कार्यालय भी नहीं खुला। अधिकांश कर्मचारी सुबह कार्यालय तो पहुंचे लेकिन काम नहीं किया। वे भवन के बरामदे में इकट्ठा हुए और प्रतीकात्मक प्रदर्शन करके विरोध जताया। साथ ही सभी डिप्टी रजिस्ट्रार कक्षों में ताले लगा दिए। डिप्टी रजिस्ट्रार व दूसरे अधिकारी भी अपने कक्ष में बैठ नहीं पाए। लोगों को कार्यालय के चैनल गेट पर ही ताले मिले। बरामदे में एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दोपहर बाद तक लोगों को कार्यालय बंद होने की वजह बता रहा था।

तहसीलों में भी नहीं हुआ काम ः सदर सहित राजधानी की चारों तहसीलों में भी काम नहीं हुआ। सदर तहसील में तहसीलदार व नायब तहसीलदार की कोर्ट के ताले खुल ही नहीं पाए। राजस्व कार्यों के दूसरे अनुभाग भी बंद रहे। हालांकि, यहां प्रमाण पत्र बनवाने वालों की भीड़ को देखते हुए आवेदन, वितरण और खतौनी काउंटर खुले रहे। प्रमाण-पत्र आवेदकों की सुविधा केलिए दो नायब तहसीलदार भी मौजूद रहे लेकिन राजस्व संबंधी दूसरे कार्य न होने से कई लोगों को वापस जाना पड़ा। ऐसा असर मोहनलालगंज, बीकेटी व मलिहाबाद तहसील में भी दिखा। मोहनलालगंज तहसील में दरवाजा बंद कर रजिस्ट्री का कार्य किए जाने की शिकायत पर वकीलों ने हंगामा भी किया।

काउंटरों से कर्मचारी गायब, भटके बिजली उपभोक्ता ः लेसा के अधिकांश कर्मचारी भी कार्यालयों से गायब रहे। इसके कारण काउंटरों पर न तो बिल संशोधन हुए और न ही बिजली चोरी एवं स्लो मीटर के खिलाफ अभियान चल सका। मध्यांचल एमडी के निर्देश पर स्लो मीटर के खिलाफ शुक्रवार से अभियान चलना था। यहां पहुंचे लोगों को बताया गया कि जब तक आरक्षण मुद्दे को लेकर कर्मचारी अपना आंदोलन बंद नहीं करेंगे तब तक बिल संबंधी कार्य नहीं हो पाएगा। हालांकि कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार का असर राजधानी की बिजली व्यवस्था पर नहीं पड़ा।

एलडीए-आवास विकास परिषद में ठप रहा काम काज ः एलडीए में भी अधिकारी, कर्मचारी व अभियंताओं ने कामकाज ठप रखा। संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में प्राधिकरण परिसर में जुटे कर्मचारियों ने मुख्य प्रवेश द्वार पर एक विरोध सभा की। समिति के अध्यक्ष शिव प्रताप सिंह, अवधेश सिंह, डीएस भदौरिया व गिरीश चंद्र यादव इत्यादि ने ऐलान किया कि प्रोन्नति में आरक्षण के खिलाफ आंदोलित सर्वजन हिताय समिति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी जाएगी। अर्जन विभाग, लेखा विभाग सहित विभिन्न शुल्क जमा कराने के काउंटरों के ताले तक नहीं खुले। नक्शा व शमन शुल्क के साथ आवंटित मकानों की किस्त राशि जमा कराने प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे आम लोगों को बैरंग लौटना पड़ा। आवास विकास परिषद के कर्मचारियों ने कामकाज ठप रखने के साथ मुख्यालय परिसर में नारेबाजी भी की। यहां आरक्षण समर्थक कर्मचारियों कीओर से चार घंटे अधिक काम करने के पर्चे तो परिसर में चिपकाए गए थे मगर हड़ताल के कारण वे भी दोपहर में अपनी सीटों पर नहीं मिले।

... और यहां नहीं रहा हड़ताल का दबाव
कोषागार : कलेक्ट्रेट के कर्मचारी नारे लगाते हुए परिसर के कोषागार कार्यालय भी पहुंचे। उन्होंने कोषागार कर्मचारियों से पदोन्नति में आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ काम का बहिष्कार करने की अपील भी की लेकिन कोषागार के अधिकारियों ने पेंशनर्स की परेशानी का हवाला देते हुए हड़ताल करने से मना कर दिया। मालूम हो कि कोषागार में रोज सैकड़ों पेंशनर्स लाइव सर्टिफिकेट जमा करने पहुंचते हैं। शुक्रवार सुबह भी दर्जनों पेंशनर्स आए थे। लाइव सर्टिफिकेट जमा कराने की 20 दिसंबर अंतिम तारीख है।

नगर निगम : हड़ताल का नगर निगम मुख्यालय में भी असर नहीं दिखा। विरोध करने वाले कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार नहीं किया। समर्थक कर्मचारियों ने भी किसी तरह का कोई प्रदर्शन नहीं किया और सामान्य दिनों की तरह ही यहां कामकाज हुआ। नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मोहम्मद अकील ने कहा कि हालांकि वह पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ हैं लेकिन इस वे राजनीति में नहीं पड़ना चाहते। उनके अनुसार आरक्षण पर जो राजनीति हो रही है, उससे समाज में वैमनस्यता बढ़ेगी।

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