डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा पीजीआई

Lucknow Updated Fri, 14 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई में सभी श्रेणी के लगभग 50 प्रतिशत स्टाफ की कमी है। इसमें चिकित्सक से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ तक शामिल हैं। इस सुपर स्पेशियलिटी संस्थान को लगभग 300 विशेषज्ञों की आवश्यकता है, लेकिन वहां इस समय मात्र 150 विशेषज्ञ ही हैं। यही हाल पैरामेडिकल स्टाफ का भी है। यह जानकारी निदेशक प्रो.आर.के.शर्मा ने पीजीआई के 32वें फाउंडेशन-डे की पूर्व संध्या पर बृहस्पतिवार को प्रेस कान्फ्रेंस में दी।
निदेशक ने बताया कि संस्थान की ओपीडी में प्रतिदिन 400 नए मरीज व 2500 से 3000 पुराने मरीज आते हैं। इस समय 2000 पैरामेडिकल स्टाफ और 450 रेजीडेंट कर्मी काम कर रहे हैं। संस्थान में मरीजों की बढ़ती संख्या के अनुपात में स्टाफ की कमी से शासन को अवगत करा दिया गया है। उन्होंने बताया कि कैंसर रोगियों को एक महीने के अंदर पेट सीटी जांच की सुविधा मिलने लगेगी। इसके अलावा हड्डी के जोड़ों से संबंधित रोगियों को ज्वॉइंट एमआरआई की सुविधा मिल सकेगी। प्रो. शर्मा ने बताया कि कैंसर रोगियों में कभी-कभी सर्जरी के बाद दोबारा भी कैंसर पनपने की संभावना रहती है। पेट सीटी से कैंसर कोशिकाओं की आसानी से पहचान हो जाती है। निजी केंद्रों में पेट सीटी का खर्च 20 से 25 हजार रुपये आता है, लेकिन पीजीआई में यही सुविधा 9500 रुपये में मिलेगी। अभी तक पेट जांच की सुविधा दिल्ली के अलावा राजधानी के किसी भी चिकित्सा संस्थान में उपलब्ध नहीं है। वहीं, ज्वाइंट एमआरआई के जरिए शरीर के छोटे से छोटे जोड़ की परेशानियों को आसानी से पहचानकर उसका इलाज किया जा सकेगा। ज्वॉइंट एमआरआई की सुविधा कोलकाता और सीएमसी वेल्लौर में ही उपलब्ध है।
इमरजेंसी मेडिसिन व ऑप्थोमोलॉजी विभाग खोलने की कवायद शुरू ः पीजीआई में जल्दी ही इमरजेंसी मेडिसिन और ऑप्थोमोलॉजी विभाग का विस्तार किया जाएगा। इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में 60 बेड होंगे। वहां गंभीर मरीजों को एक छत के नीचे सभी सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा अत्याधुनिक ऑप्थोमोलॉजी विभाग का भी विस्तार होगा। मालूम हो कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने संस्थान के फाउंडेशन-डे के मौके पर इमरजेंसी मेडिसिन और ऑप्थोमोलॉजी विभाग शुरू न करने पर पीजीआई प्रशासन को आड़े हाथों लिया था। उन्होंने कहा कि सरकार की मंजूरी और बजट उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी लेने के बावजूद पीजीआई के अधिकारी विभाग शुरू करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
1987 में 10 बेड से हुई थी शुरुआत ः पीजीआई की शुरुआत वर्ष 1987 दिसंबर में 10 बेड से हुई थी। वर्तमान में इस संस्थान का नाम देश के दस सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा संस्थानों में है। शुरुआती दौर में संस्थान के पास एक वार्ड और एक ऑपरेशन थिएटर था। इसमें पहली सर्जरी एक पथरी के रोगी की गई थी। स्थापना दिवस के अवसर पर एशिया हार्ट फाउंडेशन की चेयरमैन और नारायण हृदयालय के डॉ. देवी प्रसाद शेट्टी सस्ती हृदय सर्जरी पर व्याख्यान देंगे। मुख्य अतिथि मुख्य सचिव व संस्थान के अध्यक्ष जावेद उस्मानी होंगे। इस मौके पर दो रेजीडेंट डॉक्टर, दो नर्सों व दो टेक्नीशियनों को सम्मानित किया जाएगा।

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